ETV Bharat / state

IIT रुड़की में वाटर कॉन्क्लेव का आगाज, दुनियाभर से पहुंचेंगे शोधकर्ता, इन विषयों पर रहेगा फोकस

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की में चौथे वाटर कॉन्क्लेव का आगाज, कई देशों के विशेषज्ञ होंगे शामिल, अपने शोधपत्र पेश करेंगे वैज्ञानिक

Roorkee Water Conclave
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की में वाटर कॉन्क्लेव (फोटो सोर्स- ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 24, 2026 at 2:56 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की में 23 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक चौथे रुड़की वाटर कॉन्क्लेव यानी आरडब्ल्यूसी 2026 का आयोजन किया जा रहा है. इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का विषय ट्रांसबाउंड्री वाटर कोऑपरेशन थ्रू नेक्सस अप्रोच (Transboundary Water Cooperation through Nexus Approach) है. जिसमें जल प्रबंधन, सहयोग और टिकाऊ विकास पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे.

वाटर कॉन्क्लेव के शुभारंभ मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में नीति आयोग के सदस्य विनोद के पॉल ने वर्चुअली संबोधित किया. सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, नीति विशेषज्ञ और शोधकर्ता जल संसाधनों के बेहतर उपयोग व अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर अपने विचार साझा करेंगे. जबकि, वैज्ञानिक अपने शोधपत्र पेश करेंगे.

आईआईटी रुड़की में आयोजित वाटर कॉन्क्लेव में जुटेंगे दुनियाभर के विशेषज्ञ (वीडियो- ETV Bharat)

चौथे रुड़की वाटर कॉन्क्लेव का आगाज: बता दें कि 23 फरवरी यानी सोमवार से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी रुड़की) में राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) रुड़की के सहयोग से 23–25 फरवरी 2026 तक 'नेक्सस दृष्टिकोण के माध्यम से सीमापार जल सहयोग' विषय पर 4वें रुड़की वाटर कॉन्क्लेव (आरडब्ल्यूसी 2026) शुरू हो गया है. यह द्विवार्षिक कॉन्क्लेव है.

यह कॉन्क्लेव दुनियाभर के प्रमुख नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के नेताओं और जल विशेषज्ञों को उभरती जल चुनौतियों के एकीकृत एवं सतत समाधान पर विचार विमर्श के लिए एक मंच प्रदान करता है. जिसमें खासकर सीमापार नदी बेसिन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं सहनशीलता, हाइड्रो-मौसमीय चरम घटनाएं, भूजल स्थिरता, जल गुणवत्ता और जल–ऊर्जा–खाद्य नेक्सस शामिल है.

Roorkee Water Conclave
रुड़की में वाटर कॉन्क्लेव का शुभारंभ (फोटो सोर्स- ETV Bharat)

पहले दिन सत्र का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन और कुलगीत की प्रस्तुति से हुआ. जिसके बाद प्रो. आशीष पांडे ने स्वागत उद्बोधन दिया. आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत, डॉ. वाईआरएसराव और डॉ. मार्क स्मिथ महानिदेशक अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्ल्यूएमआई) ने भी अपने संबोधन दिए.

"जल सुरक्षा का सीधा संबंध जलवायु सहनशीलता, खाद्य प्रणालियों और ऊर्जा स्थिरता से है, क्योंकि एआई डेटा सेंटरों के बढ़ते उपयोग के कारण जल की मांग में वृद्धि हो रही है. रुड़की वाटर कॉन्क्लेव जैसे मंच साक्ष्य-आधारित संवाद को सक्षम बनाते हैं और सहयोगात्मक और विज्ञान आधारित जल शासन के लिए वैश्विक साझेदारियों को प्रोत्साहित करते हैं."- प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की

वहीं, आरडब्ल्यूसी 2026 के संयोजक प्रो. आशीष पांडे ने कहा कि जटिल सीमापार जल चुनौतियों के समाधान के लिए नेक्सस दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण है. आरडब्ल्यूसी 2026 को वैज्ञानिक अनुसंधान, नीति ढांचे और सामुदायिक सहभागिता को एकीकृत कर सतत जल प्रबंधन के लिए क्रियाशील मार्ग विकसित करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है.

Roorkee Water Conclave
रुड़की में वाटर कॉन्क्लेव (फोटो सोर्स- ETV Bharat)

इन देशों के विशेषज्ञ होंगे शामिल: विभिन्न देशों से कुल 42 मुख्य वक्ता अपने मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे और तकनीकी सत्रों में हिस्सा लेंगे. ये वक्ता संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, इजराइल, नीदरलैंड, कनाडा, जापान, नॉर्वे, श्रीलंका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और नेपाल समेत अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व करेंगे. इन विशिष्ट वक्ताओं की उपस्थिति वैश्विक दृष्टिकोण और वर्तमान जल प्रबंधन चुनौतियों के साथ नवाचारी समाधानों पर अहम अंतर्दृष्टि प्रदान करेगी.

आरडब्ल्यूसी 2026 की एक प्रमुख विशेषता 'जल सहयोग में सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक-आर्थिक पहलू' विषय पर आयोजित विशिष्ट पैनल है, जिसमें पद्मश्री सवजीभाई धोलकिया, पोपटराव पवार, भरत भूषण त्यागी और उमाशंकर पांडे समेत वरिष्ठ नीति-निर्माता जैसे राजीव रंजन मिश्रा (पूर्व महानिदेशक, एनएमसीजी), युगल जोशी (कार्यक्रम निदेशक, नीति आयोग), आरएन मिश्रा (पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसजेवीएन लिमिटेड), अतुल जैन (उपाध्यक्ष, दीन दयाल शोध संस्थान) और प्रो. अनिल के मिश्रा (तकनीकी विशेषज्ञ, एनआरएए, भारत सरकार) शामिल हैं.

यह उच्च स्तरीय पैनल विज्ञान, नीति और जमीनी नेतृत्व के बीच सेतु स्थापित कर समावेशी, सामुदायिक प्रेरित और संस्थागत रूप से सुदृढ़ जल शासन ढांचों को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है. कॉन्क्लेव में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख वक्ताओं, विशिष्ट पैनल सदस्यों और तकनीकी विशेषज्ञों की प्रभावशाली श्रृंखला शामिल है, जो प्रतिष्ठित संस्थानों और वैश्विक संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं.

ये भी पढ़ें-