छत्तीसगढ़ में सावन का चौथा सोमवार, बस्तर से दुर्ग, धमतरी से जांजगीर तक हर हर महादेव की गूंज
छत्तीसगढ़ में सावन के चौथे सोमवार पर भक्ति का अनूठा रंग देखने को मिला है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 24, 2026 at 7:12 PM IST
दुर्ग/ जांजगीर चांपा/ धमतरी/कोंडागांव: सावन के चौथे सोमवार पर छत्तीसगढ़ शिव भक्ति में डूबी नजर आई. दुर्ग से बस्तर तक श्रद्धालु शिव पूजा में लीन दिखे. पूरे राज्य में हर हर महादेव का जयघोष सुनने को मिला.
दुर्ग में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव की कांवड़ यात्रा
सावन के पावन अवसर पर भिलाई में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने कांवड़ यात्रा निकाली. यात्रा की शुरुआत दुर्ग स्थित पवित्र शिवनाथ नदी तट से हुई, जहां विधायक देवेंद्र यादव ने आस्था की डुबकी लगाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और कांवड़ में पवित्र जल भरा.इसके बाद हजारों शिवभक्तों के साथ कांवड़ यात्रा पैदल देवबलौदा स्थित प्राचीन शिव मंदिर के लिए रवाना हुई. लोगों और श्रद्धालुओं ने इस यात्रा का जगह जगह स्वागत किया.

जांजगीर चांपा में अनोखी शिव भक्ति
सावन 2026 के अंतिम सोमवार को जांजगीर चांपा में अनोखी शिव भक्ति देखने को मिली. यहां के खरौद में लाख छिद्रों वाले और लक्ष्मण जी द्वारा स्थापित शिवलिंग की पूजा करने श्रद्धालुओं का तांता लग पड़ा. भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालु लोट मारते हुए शिवालय पहुंचे और अपनी मनोकामना के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक किया. खरौद को रावण के भाई खर और दूषण की नगरी के रूप में जाना जाता है. यहां लाखों छिद्र वाले शिव जी को लक्ष्मण जी द्वारा स्थापित किए जाने की मान्यता है.
मान्यता है कि लंका विजय के बाद लक्ष्मण जी ने ब्रह्म हत्या के दोष निवारण के लिए लाखों छिद्र वाले शिव लिंग की स्थापना की थी और असाध्य रोग से मुक्ति पाई थी. लक्ष्मनेश्वर महादेव में लाख चावल और लाख बेल पत्र चढ़ाने की परंपरा है- सुधीर मिश्रा, पुजारी, लक्ष्मणेश्वर मंदिर खरौद

खरौद नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नागरिक सुबोध शुक्ला ने बताया कि लक्ष्मनेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना रामायण काल मे किए जाने की मान्यता है. यहां के मंदिर जिसके कारण खरौद को छत्तीसगढ़ का काशी कहा जाता है. उसका निर्माण 8वी शताब्दी मे हैहै वंशी राजाओं के द्वारा कराया गया था.

पौराणिक मान्यता के अनुसार राम, लक्ष्मण लंका में रावण का वध करने के बाद अयोध्या लौटे तभी, लक्ष्मण जी ने ब्रह्म हत्या का पाप काटने और असाध्य छय रोग से मुक्ति पाने के लिए लाखों शिव लिंग की एक स्थान पर पूजा की. जिसकी पूजा के बाद उन्हें ब्रह्म हत्या से मुक्ति मिल सकी थी- सुबोध शुक्ला, स्थानीय नागरिक
लक्ष्मणेश्वर महादेव का शिव लिंग अपने आप में विश्व में सबसे अलग है. यहां एक नहीं बल्कि एक साथ लाखों छिद्र को शिवलिंग के रूप मे पूजा जाता है.
धमतरी में आस्था का दिखा अजब रंग
धमतरी के रुद्री स्थित रुद्रेश्वर महादेव मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महानदी से जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया. 17 युवाओं की टोली ने पहली बार धमतरी में डाक कांवड़ यात्रा का आयोजन किया.
क्या है डाक कांवड़ यात्रा ?
डाक कांवड़ यात्रा की खास बात यह रही कि सभी 17 युवाओं ने समय का विशेष ध्यान रखा. युवाओं ने बताया कि पुराने समय में डाकिया चिट्ठी पहुंचाने के लिए समय का विशेष ध्यान रखता था. उसी भावना को डाक कांवड़ यात्रा से जोड़ते हुए उन्होंने तय समय में राजिम से रुद्री तक की दूरी दौड़ते हुए पूरी करने का प्रयास किया.

कोंडागांव में श्रद्धालुओं की भीड़
सुबह से ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. कोपाबेड़ा शिव मन्दिर में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने कतार में लगकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए.


