'निशांत तानाशाह..' बोले PMCH के पूर्व प्रिंसिपल डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह, अपना जला हुआ पेट दिखाया
'मेरी बात नहीं सुनी गई, ये तानाशाही रवैया हैं', निशांत पर क्यों भड़के PMCH के पूर्व प्रिंसिपल. पटना से कृष्ण नंदन की रिपोर्ट, पढ़ें

Published : June 26, 2026 at 8:34 PM IST
पटना : पीएमसीएच के प्रिंसिपल डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह को हटाकर उनकी जगह डॉ गीता सिंह को पीएमसीएच के प्राचार्य का प्रभार दिया गया है. वहीं डॉक्टर नरेंद्र प्रताप को बेतिया मेडिकल कॉलेज स्थानांतरित कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने पूर्व प्राचार्य पर कर्तव्यहीनता और ड्यूटी से नदारत रहने का आरोप लगाया. इस बीच, स्वास्थ्य विभाग ने कहा, निरीक्षण के दौरान डॉक्टर नरेंद्र अपने निजी क्लीनिक में थे. इस दौरान उनका सरकारी वाहन भी क्लीनिक के बाहर था.
डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह ने दिया इस्तीफा : स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह ने अपना इस्तीफा दे दिया है. ईटीवी भारत से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि यह उनके आत्मसम्मान के खिलाफ है. बिना किसी सुनवाई के ही उनके ऊपर एक्शन हो गया है. उनका कहना है कि वह बेतिया कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर ज्वाइन करने नहीं जा रहे हैं.
''एक दिन पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हुई थी, उसमें मैं शामिल हुआ था. लेकिन जिस दिन स्वास्थ्य मंत्री का कार्यक्रम था, उस दिन सुबह में चाय बनाने के दौरान खौलता हुआ पानी मेरे पेट पर गिर गया और जांघ के नीचे तक का हिस्सा पूरी तरह जलकर गया, जिसका इलाज चल रहा है.''- डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व प्रिंसिपल, पीएमसीएच
'फोन आया था, लेकिन मैं दर्द में था' : नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, स्वास्थ्य मंत्री के कार्यक्रम के दौरान उन्हें फोन आया तो वह दर्द में थे और दवा खाकर सो रहे थे, जिसके कारण वह कॉल नहीं रिसीव कर पाए. उस दिन उनके साथ जो घटना घटी थी उसकी सूचना उन्होंने व्हाट्सएप पर अधीक्षक और तमाम स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दे दी थी. अस्पताल को भी इस संबंध में जानकारी दी गई थी.

''बाद में थोड़ा आराम मिलने पर मैंने स्वास्थ्य मंत्री के पीए और स्वास्थ्य सचिव को काफी फोन किया, लेकिन किसी ने फोन नहीं रिसीव किया. पक्षपातपूर्ण तरीके से पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर मेरे खिलाफ यह कार्रवाई हुई है. मुझे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया.''- डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व प्रिंसिपल, पीएमसीएच
'निजी क्लीनिक पर प्रैक्टिस करने का आरोप गलत' : डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, क्लीनिक मेरे घर में ही चलता है. लेकिन स्वास्थ्य मंत्री ने जिस दिन पीएमसीएच का दौरा किया था, उस दिन मैं अपने क्लिनीक में पेशेंट नहीं देख रहा था, बल्कि आराम कर रहा था. मेरे आवास के निचले हिस्से में क्लीनिक है और ऊपर वाले हिस्से में मैं रहता हूं. यह मेरा पैतृक मकान है और मैं यहां कई वर्षों से रह रहा हूं.

एनपी सिंह ने कार्रवाई पर उठाए सवाल: डॉ सिंह ने आगे कहा कि, सरकारी पद पर हैं तो सरकारी गाड़ी मकान में ही लगेगा. सभी सरकारी ऑफिसर की सरकारी गाड़ी उनके घर के बाहर ही लगती है. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें हटाने का जो कुछ भी तर्क दिया है वह पूर्वाग्रह से ग्रसित है.
'ये तानाशाही.. निशांत पर भरोसा नहीं' : डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री (निशांत कुमार) तानाशाह हो गए हैं. उन्हें स्वास्थ्य मंत्री पर भरोसा नहीं लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूरी उम्मीद है. कर्तव्यहीनता का गलत आरोप लगाया गया है और बिना कारण पूछे बेतिया मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर स्थानांतरित किया गया है, जो उनके सम्मान के खिलाफ है. उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है, इसलिए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है.

''अब हम अपनी पेंशन हासिल करने के लिए लड़ाई लड़ेंगे. रिटायरमेंट से 6 महीने पहले ऐसा एक्शन लिया गया है और साजिश के तहत यह कार्रवाई हुई है. अब हम सरकारी सेवा में नहीं रहेंगे, जहां वरियतम चिकित्सक के आत्मसम्मान का कोई महत्व नहीं है.''- डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व प्रिंसिपल, पीएमसीएच
आगे क्या, बोले- मुर्गी क्या जाने अंडे का क्या होगा? : डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि 3 इडियट्स फिल्म का एक गाना है 'मुर्गी क्या जाने अंडे का क्या होगा, लाइफ मिलेगी या तवे पर फ्राई होगा', यही उनका हाल है और वह भी नहीं जानते उनकी किस्मत में आगे क्या होगा?. वह देवी के उपासक हैं और सब कुछ माता रानी पर छोड़ दिया है. उन्हें स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से कोई उम्मीद नहीं है और ना ही स्वास्थ्य सचिव से कोई उम्मीद है. विभाग के अभिभावक के तौर पर उन लोगों ने वरियतम चिकित्सक के साथ गलत किया है.

''मुझे मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से उम्मीदें हैं. हम इस संबंध में पीएमओ को भी जानकारी देने जा रहे हैं. अभी हम तय नहीं कर पा रहे हैं कि न्यायालय जाना है या आगे क्या करना है.''- डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व प्रिंसिपल, पीएमसीएच
'शर्ट का बटन खुला था.. इस पर 2019 में सस्पेंड हुआ': डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि साल 2019 में भी वह स्वास्थ्य सचिव के द्वारा सस्पेंड हुए थे, वजह था कि उनके शर्ट के ऊपर का बटन खुला हुआ था. यह मामला कोर्ट में नहीं टिका और उन्हें 3 सप्ताह में कोर्ट ने फिर से बहाल कर दिया. फिर से उन पर यह एक्शन हुआ है. उन्होंने कहा कि पिछली बार स्वास्थ्य सचिव तानाशाह थे और इस बार स्वास्थ्य मंत्री तानाशाह हैं.

'सुपर स्पेशलिटी वार्ड में खामियां थी, सस्पेंड की वजह..': एनपी सिंह ने यह भी बताया कि बीते दिनों उन्होंने अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी वार्ड में खामियों को लेकर पीएमओ के संज्ञान में लाया था. वह नहीं जानते यह जो उनके ऊपर एक्शन हुआ है, उसका मूल कारण क्या है, लेकिन पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर यह एक्शन लिया गया है.
क्या है पूरा मामला? : बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बीते दिनों बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच का एक कार्यक्रम के दौरान औचक निरीक्षण किया. इस दौरान पीएमसीएच के प्रिंसिपल डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह गायब मिले. मंत्री ने अपने सचिव से फोन करवाया, लेकिन प्रिंसिपल ने फोन नहीं उठाया. इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत काफी बिफर गए. उन्होंने प्रिंसिपल पर कार्रवाई करने की बात कही और अगले ही दिन प्रिंसिपल पर एक्शन हो गया.
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