हिमाचल में आसान नहीं नौकरशाहों की संख्या कम करना, पूर्व IAS और MLA जेआर कटवाल ने बताए कारण
कैडर स्ट्रेंथ में कमी, इसके प्रभाव, आर्थिक इम्पैक्ट जैसे सवालों के जवाब पूर्व IAS व भाजपा विधायक ने दिया है. रश्मिराज भारद्वाज की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 21, 2026 at 8:12 AM IST
|Updated : August 21, 2026 at 1:40 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में ऐसे चेहरे कम ही हैं, जिन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को भीतर से भी देखा हो और जनता के बीच राजनीतिक भूमिका में भी लंबा अनुभव हासिल किया हो. तेज तर्रार IAS ऑफिसर राजनीति को जनसेवा का प्राय मानने वाले बिलासपुर जिला के झंडूता विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक बने जेआर कटवाल इसी श्रेणी में आते हैं. कटवाल ने प्रशासनिक व्यवस्था को नजदीक से देखा है और अब विधायक के तौर पर जनता की अपेक्षाओं और सरकारी मशीनरी की कार्यक्षमता दोनों को समझते हैं. वर्तमान समय में हिमाचल में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के एक बयान ने सियासी और नौकरशाही के गलियारे में हलचल मचाई हुई है. सीएम सुक्खू हिमाचल में IAS, IPS और IFS कैडर की संख्या को कम करना चाहते हैं. प्रशासनिक अधिकारियों के कैडर स्ट्रेंथ में कमी, इसके प्रभाव और आर्थिक इम्पैक्ट ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब एक पूर्व आईएएस अधिकारी से बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. इन्हीं सभी पहलुओं पर ईटीवी भारत ने पूर्व IAS अधिकारी एवं भाजपा विधायक जेआर कटवाल से बातचीत की.
स्ट्रेंथ घटाने के निर्णय पर कोई स्टडी नहीं
प्रदेश सरकार की ओर से प्रशासनिक अधिकारियों के कैडर को कम करने के निर्णय को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में रिटायर्ड IAS अधिकारी एवं MLA जेआर कटवाल ने कहा कि, "एक प्रशासनिक व्यवस्था होती है. जो डेवलपमेंट के हिसाब से स्थापित होती है, जो आज कुछ, कल कुछ और आने वाले समय में कुछ और होंगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि IAS का कैडर 153 से 110 कर देंगे. इसी तरह से IFS का कैडर 118 से 83 किया जाएगा. मुझे नहीं लगता है कि उन्होंने कोई स्टडी की है. यह बात सही है कि कोई भी योजना, कार्य और कोई भी सरकारी निर्णय आम आदमी को ध्यान में रखकर उसके ऊपर सही तरीके से छानबीन के बाद होना चाहिए."
जेआर कटवाल ने कहा कि, प्रजातंत्र में सबसे पहले आम आदमी,युवा, महिलाएं व पिछड़े वर्ग सब हैं. हर सरकार उसके कल्याण का दम भरती है, लेकिन मेरा मानना यह है कि जिस आदमी को वोट देने का अधिकार है पैसे और संसाधनों के ऊपर उसका भी हक है. बुनियादी स्तर पर छोटे पद बढ़ाने चाहिए और टॉप हैवी नहीं होना चाहिए. मैं भी इससे सहमत हूं, परंतु इसका निर्णय एक या दो दिन में और एक व्यक्ति नहीं कर सकता. इसके लिए एक प्रशासनिक सुधार आयोग होता है. मुख्यमंत्री चाहे तो प्रशासनिक सुधार आयोग बठाएं. उन्होंने कहा कि वैसे भी इसमें बहुत सारे पक्ष इंवॉल्वड हैं. कोऑपरेटिव फेडरेलिज्म है. कोई भी निर्णय राज्य सरकार अकेले नहीं ले सकती. यह दो तरफ़ा मेकैनिज्म है. यहां की कोई मांग है तो केंद्र में जाएगी, जिस पर सेंटर चर्चा करेगा. इसके लिए एक सिस्टम होता है. मेरा मानना है कि ऐसी कोई स्टडी नहीं हुई होगी.

रिटायर्ड IAS अधिकारी एवं भाजपा विधायक ने कहा कि, मैं खुद ग्रामीण विकास का पक्षधर हूं. आम आदमी की व्यथा की सुनवाई होनी चाहिए, उनकी समस्याओं का निराकरण होना चाहिए, युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलने चाहिए, महिलाओं के कल्याण के लिए कार्य होना चाहिए. उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण बिल संसद में पास हो चुका है. ये सारी चीजें देखी जाए तो यह एक मिलजुल कर सामूहिक रूप से निर्णय लेने की बात है. ऐसा तो नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि मेरी निजी राय है कि आजकल के परिपेक्ष में हैवी टॉप कारगर सिद्ध नहीं होता धरातल पर छोटी सर्विसेज है, उनको मजबूत किया जाना चाहिए, जो सरकार का कर्तव्य है. इसको लेकर केंद्र सरकार से चर्चा करें.
रिटायर्ड IAS अधिकारी व भाजपा विधायक ने कहा कि, "प्रशासनिक अधिकारी केंद्रीय सेवाओं के तहत आते हैं. ये केंद्र में भी काम करते हैं और राज्य में भी कार्य करते हैं. उनकी पेंशन केंद्र सरकार देती है, लेकिन जिस सरकार में यह काम करते हैं. वेतन भत्ते वही अदा करते हैं. यह जो 200 करोड़ बचने की बात कही गई है मुझे नहीं लगता इस पर कोई स्टडी या कैलकुलेशन हुई है. अगर ऐसी कैलकुलेशन होनी है तो हम भी एक राजनीतिक दल है. बीजेपी भी एक मुख्य पार्टी है. हमारी भी सरकार थी आने वाले समय में आएगी. ये सामूहिक चर्चा का विषय है. चर्चा के बाद आम आदमी को केंद्र में रखते हुए ऐसे निर्णय लेने चाहिए."
अधिकारियों का सदुपयोग नहीं हो रहा
वर्तमान में जो प्रशासनिक अधिकारी हैं, उनसे कैसे काम लिया जा सके? इसको लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में रिटायर्ड आईएएस एवं भाजपा विधायक जेआर कटवाल ने कहा ये कार्य वर्गीकरण, पुनर्निर्धारण, सीमांकन सीमाओं का और अधिकारियों की डुप्लीकेसी ना हो. एक ही कार्य को तीन जगह न देखा जाए, एक ही काम के लिए तीन अथॉरिटी दस्तखत न करें. आज कंप्यूटर का युग है. छह आदमियों का काम एक कंप्यूटर कर सकता है. तो ये जो डिजिटल टेक्नोलॉजी है, इसका भरपूर सदुपयोग होना चाहिए. हाथ से लिखित नोट का जमाना अब गया. अब तो मोबाइल, कंप्यूटर और वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से काम होता है. इसके अलावा हमारा माइंडसेट लोगों के कार्य के प्रति संवेदनशील हो. आज की तारीख में जितने अधिकारी और कर्मचारी है. उनका सदुपयोग नहीं हो रहा है. उस लिहाज से काम नहीं हो रहा है, डुप्लीकेसी है. मैं यही कहता हूं कि धरातल पर स्ट्रेंथ होना जरूरी है. उसे पर सरकार की प्राथमिकता रहनी चाहिए.

प्रमोशन चैनल पर पड़ेगा फर्क
प्रशासनिक अधिकारियों का कैडर कम होने से प्रदेश में अधिकारियों के प्रमोशन चैनल पर भी क्या फर्क पड़ेगा? इस सवाल के जवाब में रिटायर्ड आईएएस और भाजपा विधायक जेआर कटवाल ने कहा कि हां अगर इसको सरासर देखा जाए तो फर्क पड़ेगा. प्रदेश में 153 में से 46 प्रशासनिक अधिकारी जो हैं वह राज्य सिविल सेवा से प्रमोट होकर जाते हैं. परंतु मैं एक बात में कहना चाहूंगा कि यह जो 33 प्रतिशत की रेशो है, जो पहले 25 प्रतिशत थी. अब 33 प्रतिशत हुई है. उसको बढ़ाकर 45 और 50 प्रतिशत भी किया जा सकता है. क्योंकि क्वालिटी आफ एजुकेशन हर जगह, सभी क्षेत्र और वर्गों में व्यापक रूप से उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि अच्छी बात है कि स्थानीय अधिकारियों का भी सही सदुपयोग हो. वे राज्यों की सीमाओं और संस्कृति से बेहतर तरीके से वाकिफ होते हैं. उनके प्रमोशन कोटा बढ़ाने पर विचार होना चाहिए.

सभी वर्गों के विचार किए जाएं शामिल
हिमाचल के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की संख्या निर्धारित करने का क्या पैमाना है? इस सवाल के जवाब में रिटायर्ड आईएएस और भाजपा विधायक जेआर कटवाल ने कहा, यह पदों के वर्गीकरण की बात है. IAS , HAS और डिपार्टमेंटल पोस्ट हैं. ये इस तरीके से चलती हैं. यह वर्गीकरण हमेशा चेंज होता रहता है मैंने इसलिए कहा कि कंप्यूटराइजेशन और डिजिटाइजेशन का युग है. यह वर्गीकरण जो तीव्र गति से चेंज हो रहा है. अब तो गृहणियां, युवा और छोटे बच्चे भी इस सिस्टम से वाकिफ है. ऑनलाइन, नेट या मोबाइल के माध्यम से ऐप पर सभी काम हो रहे हैं. ये जो हमारा आर्थिक राजनीतिक और सामाजिक परिवेश तीव्र गति से चेंज हो रहा है तो नए तरीके से वर्गीकरण होगा. सब चीजें उसमें सुलझ जाएंगी और जो प्रशासनिक आयोग की बात कही है, अपने आप यूनिट्स निर्धारित करेगा. उन यूनिट्स के लिहाज से पदों का वर्गीकरण होगा, जो सरकार के लिए बड़ा आसान होगा.

भाजपा विधायक जेआर कटवाल ने कहा कि, यह निर्णय सरकार के होते हैं कि कोई भी कमीशन कमेटी हो रिपोर्ट देती है. सरकार कैबिनेट जो पार्लियामेंट सिस्टम हमारा है वह इसके लिए उत्तरदायी होता है. उन्होंने कहा कि जो पार्टी पावर में है, उसका दायित्व बनता है इस तरह के पेचीदा और संवेदनशील मामलों में सरकार को सभी दलों, पक्षों और समाज के सभी वर्गों को भी अपने इस विचार विमर्श में शामिल करना चाहिए. तभी हम एक अच्छे निर्णय के ऊपर पहुंचेंगे.
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