वर्षों पहले तय था RDG बंद होना, सरकार ने समय रहते योजना क्यों नहीं बनाई? : प्रेम कुमार धूमल
प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि, "आर्थिक संकट का समाधान भाषण नहीं, सख्त वित्तीय अनुशासन और खर्चों में कटौती से होगा."

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 9, 2026 at 6:37 PM IST
शिमला: RDG समाप्त करने पर हिमाचल में सियासत जारी है. इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि, हिमाचल में जो वित्तीय संकट की चर्चा हो रही है, वह अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है, बल्कि इसके संकेत वर्षों पहले ही स्पष्ट हो चुके थे. आरडीजी (Revenue Deficit Grant) के चरणबद्ध समाप्त होने की जानकारी पहले से थी, इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने समय रहते वैकल्पिक संसाधन जुटाने और वित्तीय प्रबंधन की ठोस योजना नहीं बनाई.
'भाषण से आर्थिक संकट का समाधान संभव नहीं'
प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि, "वित्त आयोग की रिपोर्ट में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि 31 मार्च 2026 के बाद आरडीजी समाप्त हो जाएगी. यह कोई नई घोषणा नहीं है. जब यह बात वर्षों पहले से ज्ञात थी, तो सरकार को उसी अनुसार अपनी नीतियां, खर्च और आय के स्रोत तय करने चाहिए थे. वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना केंद्र सरकार का दायित्व होता है, इसलिए इस विषय पर भ्रम फैलाने के बजाय राज्य सरकार को अपनी तैयारी पर जवाब देना चाहिए."
सरकार को पूर्व CM की नसीहत
हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, आर्थिक संकट हर संसाधन-सीमित राज्य में आता है, लेकिन समझदारी यह है कि उससे निपटने के लिए समय पर कठोर निर्णय लिए जाएं. अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि, जब भी कठिन आर्थिक परिस्थितियां आईं, तब सरकार ने बचत और वित्तीय अनुशासन का रास्ता अपनाया. मुख्यमंत्री और मंत्रियों के खर्चों पर नियंत्रण लगाया गया, अनावश्यक यात्रा और सुविधाओं में कटौती की गई. हमने अपनी सरकार के दौरान निजी यात्राओं में भी राज्य पर बोझ नहीं डाला और सादगी से कार्य करता रहा.
प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि, "हमारी सरकार ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में सुधार कर आय बढ़ाने पर जोर दिया. सब्ज़ी उत्पादन और मार्केटिंग को बढ़ावा देकर जहां पहले लगभग 250 करोड़ का कारोबार होता था, उसे बढ़ाकर लगभग 2250 करोड़ तक पहुंचाया गया. सेब उत्पादन में आई गिरावट की भरपाई वैकल्पिक कृषि से की गई थी, जिससे राजस्व में काफी सुधार हुआ और बजट बैलेंस करने में बहुत मदद मिली."
सबसे पहले गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाने की जरूरत
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने प्रदेश की वर्तमान सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, "एक ओर आर्थिक संकट की बात की जा रही है, दूसरी ओर बड़ी संख्या में चेयरमैन, सलाहकार और पदाधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जिन पर भारी खर्च हो रहा है. नई गाड़ियों की खरीद, अतिरिक्त स्टाफ और सुविधाओं पर व्यय- यह सब वित्तीय अनुशासन के विपरीत है. यदि सचमुच स्थिति कठिन है तो सबसे पहले गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगनी चाहिए."
'जिम्मेदार निर्णयों से आर्थिक चुनौतियों का समाधान'
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि, "केंद्र और राज्य संबंधों को लेकर भी तथ्य स्पष्ट होने चाहिए. जब-जब केंद्र में भाजपा सरकार रही है, हिमाचल को विशेष सहयोग मिला है- चाहे औद्योगिक पैकेज हो या विशेष श्रेणी राज्य का लाभ. केवल राजनीतिक बयानबाज़ी से आर्थिक स्थिति नहीं सुधरती, उसके लिए ठोस नीति, संसाधन सृजन और व्यय नियंत्रण आवश्यक है. प्रदेश का मुखिया यदि बार-बार यह कहें कि खजाना खाली है, तो इससे जन विश्वास कमजोर होता है. जरूरत इस बात की है कि सरकार ठोस कदम उठाए, खर्चों की समीक्षा करे, प्राथमिकताएं तय करे और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाए. आर्थिक चुनौतियों का समाधान जिम्मेदार निर्णयों और अनुशासित शासन से ही संभव है."
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