जहां बीता बचपन.. गंगा दशहरा पर मां गंगा की पूजा करने उसी बख्तियारपुर सीढ़ी घाट पहुंचे नीतीश कुमार
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की,स्वतंत्रता सेनानी पंडित शीलभद्र याजी की प्रतिमा को भी किया नमन. पढ़ें खबर

Published : May 25, 2026 at 9:06 PM IST
नालंदा: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सह राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार एक दिवसीय दौरे पर गंगा दशहरा के अवसर पर बख्तियारपुर सीढ़ी घाट पहुंचे. इस दौरान उन्होंने विभिन्न धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और श्रद्धांजलि अर्पित की.
घाट का निर्माण: दरअसल पूर्व सीएम नीतीश कुमार हर वर्ष गंगा दशहरा के अवसर पर बख्तियारपुर सीढ़ी घाट पूजा के लिए आते हैं. इस घाट का निर्माण 350 करोड़ की लागत से कराया गया था. सबसे पहले नीतीश कुमार सीढ़ी घाट स्थित गंगा तट पहुंचे.
सुख-समृद्धि की कामना: वहां उन्होंने विधिवत मां गंगा की पूजा-अर्चना कर राज्य एवं देश की सुख-समृद्धि की कामना की. इसके बाद वे राधे-कृष्ण मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया. इसके बाद सांसद प्रखर स्वतंत्रता सेनानी पंडित शीलभद्र याजी मेमोरियल पहुंचे. जहां उन्होंने पंडित शीलभद्र याजी की आदमकद प्रतिमा पर पुष्प चढ़ा कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए.
पैतृक आवास का दौरा: इसके बाद राज्यसभा सांसद बख्तियारपुर बाज़ार में स्थित अपने पैतृक आवास पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत सर्वेश्वरी ध्वज का पूजन किया. कुछ देर रुकने के बाद वह पटना के लिए रवाना हो गए. इस दौरान बड़ी संख्या में उनके चाहने वाले लोग मौजूद रहे.
जिंदाबाद के नारे: वहां मौजूद लोगों ने जब 'नीतीश कुमार जिंदाबाद' के नारे लगाए. तो पूर्व सीएम ने भी हाथ जोड़कर व हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया. इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे.

भावनात्मक जुड़ाव: पटना के बख्तियारपुर का 'सीढ़ी घाट' बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद नीतीश कुमार का पैतृक और भावनात्मक जुड़ाव का स्थान रहा है. यह उनका जन्मस्थान और बचपन का मुख्य क्रीड़ा स्थल है. बचपन में वे इसी घाट पर नहाया करते थे.
मीठे पानी का कुआं:नीतीश कुमार ने सीढ़ी घाट स्थित मंदिर के पास बने प्राचीनतम और अद्वितीय मीठे पानी के कुएं का अपने मुख्यमंत्री काल में निर्माण कराया था. ताकि गंगा नदी की मुख्य धारा तक बनने वाले रास्ते का निर्माण इस प्रकार से करायें कि सीढ़ी घाट डिस्टर्ब न हो और लोग आसानी से आवागमन भी कर सकें
गंगा दशहरा की विशेषता: गंगा दशहरा एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जो माता गंगा के स्वर्ग से धरती पर प्रकट होने की खुशी में मनाया जाता है. यह पर्व हर साल ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन गंगा नदी में स्नान और दान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.
भागीरथ की तपस्या: कहा जाता है कि राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से धरती पर प्रकट हुई थीं. गंगा के वेग को संभालने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया था.
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