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घाटशिला उपचुनाव प्रचार के अंतिम दिन पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन का छलका दर्द, फफक-फफक कर रोए, जानें वजह

घाटशिला उपचुनाव के लिए प्रचार थम गया है. आखिरी दिन पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन एक बयान को लेकर काफी भावुक हो गए.

Champai Soren Targeted CM Hemant
घाटशिला में प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन. (फोटो-ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : November 9, 2025 at 8:31 PM IST

4 Min Read
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जमशेदपुरः घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दिया गया बयान अब तूल पकड़ता जा रहा है. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने सीएम के बयान पर अपनी बातें रखीं. उन्होंने सीएम के बयान को आंदोलनकारी का अपमान बताया है.

घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार के अंतिम दिन झामुमो और भाजपा ने पूरी ताकत के साथ प्रचार-प्रसार किया. इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चुनावी सभा के दौरान चंपाई सोरेन को लेकर ऐसा बयान दिया है तो अब काफी तूल पकड़ लिया है. भाजपा में इस बयान को लेकर आक्रोश है.

अपनी बातें रखते हुए भावुक हुए चंपाई सोरेन

इधर, भाजपा नेता चंपाई सोरेन प्रचार के अंतिम दिन मीडिया से मुखातिब हुए. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चंपाई सोरेन भावुक नजर आये और फफक पड़े. चंपाई सोरेन ने कहा कि अबुआ सरकार ने आदिवासियों को कुचलने का काम किया है. आंदोलनकारियों पर लाठी चलवाया, जो शर्मनाक है. उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज कर सरकार ने यह साबित कर दिया कि उसे आदिवासियों के अधिकारों और भावनाओं की कोई परवाह नहीं है.

बयान देते पूर्व मुख्यमंत्री सह भाजपा नेता चंपाई सोरेन. (वीडियो-ईटीवी भारत)

सीएम हेमंत के बयान से आहत हुए चंपाई सोरेन

भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने कहा कि गुरुजी शिबू सोरेन के साथ मिलकर उन्होंने अलग राज्य के लिए आंदोलन किया था और अलग राज्य बनाया, लेकिन आज उन्हें सभा के बीच अपमानित किया गया है. उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारी को बैल की संज्ञा देना न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि यह सरकार की आदिवासी विरोधी मानसिकता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि इतनी संकीर्ण मानसिकता किसी झारखंड के नेता को नहीं रखनी चाहिए.

राज्य सरकार पर चंपाई ने उठाए सवाल

उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान वे परिवार और बच्चों के साथ जमीन पर चटाई बिछाकर सोते थे, लेकिन उस समय भी वह इतना नहीं रोए, जितना आज अपमान के बाद उनके आंखों से आंसू निकल रहे हैं. चंपाई सोरेन अपनी बात रखते हुए मीडिया के सामने फफक पड़े. चंपई सोरेन ने सवाल उठाया कि अबुआ सरकार ने अब तक आदिवासियों, किसानों और मजदूरों के लिए क्या किया है.

चंपाई ने बताया झामुमो छोड़ने की वजह

उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन ने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी की देखभाल करनेवाला व्यक्ति बताया था. इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान उनका अपमान किया था. इसलिए उन्होंने झामुमो छोड़कर भाजपा का दामन थामा था. चंपाई सोरेन ने कहा कि मैंने कभी जाति की बात नहीं की. हमेशा मजदूरों, किसानों और झारखंड की जनता की बात की है. मैंने अपने कार्यकाल में अबुआ आवास और मंईयां सम्मान योजना जैसी कई योजनाएं लाई. मैं आदिवासियों के लिए कई और योजनाएं लाना चाहता था और काम करना चाहता था, लेकिन मुझसे इस्तीफा लिखवा लिया गया. उन्होंने कहा कि सत्ता मेरे लिए लक्ष्य नहीं, बल्कि मेरा सेवा धर्म है.

घाटशिला की जनता देगी जवाब

चंपाई सोरेन ने कहा कि बैल बोलकर उनका अपमान किया गया है, लेकिन उन्हें देश के प्रधानमंत्री पर पूरा भरोसा है कि झारखंड के साथ न्याय अवश्य होगा. चंपाई सोरेन ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी अपने बेटे बाबूलाल सोरेन को टिकट दिलाने के लिए पैरवी नहीं की. उन्होंने कहा कि जनता सब जानती है और आने वाले उपचुनाव में वोट के माध्यम से इसका जवाब देगी.

इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ का भी मुद्दा उठाया और इसे लेकर राज्य सरकार को जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि संथाल परगना में सिदो कान्हू की धरती पर 300 से अधिक घर एक विशेष समुदाय के बन गए हैं, जो यह बताने के लिए काफी है कि कैसे डेमोग्राफी बदलाव हो रहा है.

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