ETV Bharat / state

पेसा नियमावली पर भड़के चंपाई सोरेन! बोले - राज्य सरकार ने आदिवासियों के साथ किया सबसे बड़ा धोखा

पेसा नियमावली की अधिसूचना जारी होने पर पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर आदिवासियों के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया.

Former CM Champai Soren
वरिष्ठ बीजेपी नेता चंपाई सोरेन (Etv bharat)
author img

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 6, 2026 at 3:55 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

रांची: झारखंड में पेसा कानून को लेकर जारी सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है. पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर आदिवासियों के साथ सबसे बड़ा धोखा देने का आरोप लगाया है. रांची स्थित आवास पर मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए चंपाई सोरेन ने पेसा अधिसूचना की मंशा और उसके शब्दों पर गंभीर सवाल खड़े किए.

पेसा कानून की आत्मा पर कुठाराघात किया

उन्होंने कहा कि झारखंड में लंबे इंतजार के बाद पेसा कानून की अधिसूचना तो जारी कर दी गई लेकिन इसकी आत्मा को ही खत्म कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि 1996 में लागू हुए पेसा कानून की नियमावली बनाने में 25 साल से ज्यादा का वक्त लगा और इस दौरान सबसे लंबा शासन झारखंड में झामुमो–कांग्रेस–राजद गठबंधन का रहा, जो करीब 7 वर्षों तक सत्ता में रहा.

वरिष्ठ बीजेपी नेता चंपाई सोरेन (Etv bharat)

आदिवासी और मूलवासी के अधिकारों को कमजोर किया: बीजेपी नेता

चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि इतने लंबे शासन के बावजूद गठबंधन सरकार पेसा कानून को उसकी मूल भावना के साथ लागू करने में पूरी तरह विफल रही है. उन्होंने कहा कि अधिसूचना के पहले पन्ने में ही शेड्यूल एरिया में रहने वाले आदिवासी और मूलवासी समुदायों के अधिकारों को कमजोर कर दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी समाज, सरल और भोले भाले होते हैं और उनके इसी भोलापन का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार ने उनके साथ बड़ा विश्वासघात किया है, जिस उद्देश्य से पेसा कानून लाया गया था उसे, उसी अधिसूचना में खत्म कर दिया गया है.

राज्य सरकार ने पेसा की मूल भावना को कुचला: चंपाई सोरेन

बीजेपी नेता चंपाई सोरेन ने बताया कि झारखंड के शेड्यूल एरिया की जनता को यह समझने नही दिया गया कि उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ क्या किया गया है ? उन्होंने सरकार पर पेसा की मूल भावना को कुचलने और आदिवासी समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया.

लाखों लोगों के सामने पेसा नियमावली की कॉपी फाड़ेंगे: चंपाई सोरेन

इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने सरकार द्वारा जारी पेसा नियमावली के विरोध में लोगों को गोलबंद कर इसकी कॉपी की प्रति फाड़ने का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि किसी भी सूरत में जनजाति समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि इसके विरोध में मानकी, मुंडा मुखर होने लगे हैं और जल्द ही सभी को गोलबंद कर रांची में बड़ा कार्यक्रम होगा. गांव-गांव लोगों के बीच जाकर उन्हें बताने का काम किया जाएगा कि किस तरह से आदिवासियों की पुस्तैनी जमीन को खत्म करने का साजिश रची गई है.

मीडियाकर्मियों से बातचीत करते पूर्व सीएम चंपाई सोरेन (Etv bharat)

उन्होंने आखिर में कहा कि "किसी भी सूरत में टाटा की जमीन की लीज को बढ़ने नही दिया जाएगा, अगर जरुरत पडी तो इसके लिए विरोध तेज किया जाएगा होगा क्योंकि टाटा को जमीन देने के नाम पर चांडिल डैम बनाया गया, जिसकी वजह से आदिवासियों के 116 गांव उजड़ गए".

ये भी पढ़ें- हेमंत सरकार पर भड़के पूर्व सीएम चंपाई सोरेन, बोले- कहां है पेसा अधिनियम? 2026 होगा जनआंदोलन का साल

मंत्री दीपक बिरुआ ने जारी की चंपाई सोरेन की चार तस्वीरें, कहा- तीन पूर्व सीएम वाला होगा हाल

नगड़ी में रिम्स-2 निर्माण को लेकर पूर्व सीएम चंपाई सोरेन के तेवर गर्म, कहा- विवादास्पद जमीन को लेकर लगाएंगे जनता दरबार