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गहलोत का प्रधानमंत्री को पत्र, याद दिलाए वादे, बोले- सरकार ने जनहित की योजनाओं को बंद किया

पूर्ववर्ती सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और रद्द किए गए प्रोजेक्ट्स को पुनः बहाल किया जाए.

PM NARENDRA MODI WILL AJMER VISIT,  GOVERNMENT STOPPED SCHEMES
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत. (Ashok Gehlot X handle)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 26, 2026 at 7:41 PM IST

3 Min Read
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जयपुरः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 28 फरवरी को अजमेर दौरे से पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएम को पत्र लिखकर उनकी ओर से पूर्व में किए गए वादों को याद दिलाया है. गहलोत ने कहा कि पीएम मोदी ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने दौरे में कहा था कि राजस्थान की जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन मोदी के वादे के विपरीत राज्य सरकार पूर्व की जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद कर रही है.

गहलोत ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि 'प्रिय नरेन्द्र मोदी,आगामी 28 फरवरी को राजस्थान की पावन धरा अजमेर में आपके आगमन पर हार्दिक स्वागत है. मैं इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान उस ‘गारंटी’ की ओर आकर्षित करना चाहता हूं, जो आपने 2 अक्टूबर 2023 को चित्तौड़गढ़ की पावन धरा से राजस्थान की जनता को दी थी. 2023 में मैंने राजस्थान की जनता को आगाह किया था कि यदि भाजपा सरकार में आ गई, तो कांग्रेस सरकार की योजनाओं को बंद कर देगी.

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तब आपने 2 अक्टूबर 2023 को स्पष्ट शब्दों में भरोसा दिलाया था कि भाजपा सरकार बनने पर कांग्रेस की किसी भी जनहितकारी योजना को बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें और बेहतर बनाया जाएगा. राजस्थान की जनता ने आपके इन शब्दों को ‘मोदी की गारंटी’ मानकर स्वीकार किया था. लेकिन खेद का विषय है कि वर्तमान राज्य सरकार आपके उस वादे के ठीक विपरीत कार्य कर रही है. पिछले दो वर्षों में प्रदेश की वे तमाम योजनाओं, जो देशभर में मॉडल के रूप में जानी जाती थीं और कई अन्य राज्यों ने जिन्हें अपने यहां लागू किया, उन्हें या तो बंद कर दिया गया है या बजट एवं शर्तों में कटौती कर निष्प्रभावी बना दिया गया है. इससे राजस्थान की जनता बेहद परेशान है.

राइट टू हेल्थ के नियम लागू नहीं किएः (Right to Health) गहलोत ने कहा कि देश का पहला स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनने के बाद भी वर्तमान सरकार ने इसके नियम लागू नहीं किए हैं. इससे जनता को मुफ्त इलाज का कानूनी अधिकार नहीं मिल पा रहा है.

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गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्टः ऑनलाइन डिलीवरी पार्टनर्स की सामाजिक सुरक्षा के लिए बनाया गया यह क्रांतिकारी कानून ठंडे बस्ते में पड़ा है. न बोर्ड बना और न ही फंड का लाभ संबंधित लोगों तक पहुंचा.

राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस: पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस नाम बदलने के साथ ही लाभार्थियों की संख्या 500 से घटाकर मात्र 150 कर दी गई है. इससे मेधावी छात्रों के विदेश में पढ़ने के अवसर सीमित हो गए हैं.

इंदिरा रसोई योजनाः इसका नाम बदलकर ‘अन्नपूर्णा रसोई’ किया गया, लेकिन केंद्रों पर कुप्रबंधन के कारण लाभार्थियों की संख्या पहले से लगभग आधी रह गई है. गहलोत ने कहा कि मेरी मांग है कि अजमेर की इस सभा में आप प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दें कि पूर्ववर्ती सरकार की इन तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं और रद्द किए गए प्रोजेक्ट्स को उनके मूल स्वरूप में पुनः बहाल किया जाए, ताकि राजस्थान की जनता स्वयं को ठगा हुआ महसूस न करे.