ETV Bharat / state

ऋषिकेश अतिक्रमण पर SC के आदेशों का होगा पालन, प्रशासन को झेलना पड़ा था भारी विरोध

ऋषिकेश क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. अब इस मामले में वन मंत्री सामने आए हैं.

Rishikesh forest land demarcation
ऋषिकेश में वन भूमि चिन्हीकरण मामला (Photo-ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 1, 2026 at 7:59 AM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

देहरादून: उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर चल रहे विवाद के बीच वन मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किए जाने का दावा किया है. इससे पहले प्रशासन को स्थानीय लोगों का भारी विरोध झेलना पड़ा है. यही नहीं मौके पर अभियान के दौरान पथराव की स्थिति भी बन चुकी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अवैध अतिक्रमण हटाने को लेकर उत्तराखंड में कार्रवाई तेज हो गई है. इस पूरे मामले पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी.

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने यह भी कहा कि सरकार न्यायालय के आदेशों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना अनिवार्य है. दरअसल अवैध अतिक्रमण हटाने को लेकर ऋषिकेश में पिछले दिनों हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे. अतिक्रमण की पैमाइश के लिए पहुंची वन विभाग और जिला प्रशासन की टीम को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पथराव की नौबत आ गई. इस दौरान टीम में शामिल कई कर्मचारियों को हल्की चोटें भी आईं, जिसके बाद मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा.

ऋषिकेश अतिक्रमण पर SC के आदेशों का होगा पालन (Video-ETV Bharat)

कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर की जाएगी. जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं, उनके साथ अन्याय नहीं होगा, लेकिन अवैध रूप से कब्जा की गई वन भूमि को मुक्त कराना जरूरी है. सरकार और प्रशासन फिलहाल हालात पर नजर बनाए हुए हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है.
सुबोध उनियाल वन मंत्री उत्तराखंड

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को गिरफ्तार किया और 100 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए. विरोध कर रहे स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए रेल और सड़क यातायात को भी बाधित किया, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. इस पूरे घटनाक्रम ने इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया.

विवाद उस लीज की भूमि को लेकर है, जिस पर बीते कई वर्षों में कई कॉलोनियां बस चुकी हैं. इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग लंबे समय से यहां निवास कर रहे हैं और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अतिक्रमण की श्रेणी में चिन्हित किया जा रहा है. इसी प्रक्रिया के तहत वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम खाली जमीन की पैमाइश कर रही है, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके. हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान भी स्थानीय लोगों का विरोध लगातार देखने को मिल रहा है.

चुनावी वर्ष में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील माना जा रहा है. विपक्ष जहां सरकार पर लोगों को उजाड़ने का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा के लिए भी यह कदम राजनीतिक चुनौती बनता हुआ दिखाई दे रहा है. बावजूद इसके सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है और उसका पालन करना संवैधानिक जिम्मेदारी है.

पढ़ें-