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कॉर्बेट ढेला रेस्क्यू सेंटर की बढ़ी क्षमता, 10 नए बाड़ों और अत्याधुनिक लैब का हुआ शुभारंभ

वन मंत्री ने वन्यजीवों के सैंपल परीक्षण और आधुनिक उपकरणों के उपयोग के लिए एक अत्याधुनिक लैब का भी शुभारंभ किया.

CORBETT DHELA RESCUE CENTRE
कॉर्बेट ढेला रेस्क्यू सेंटर की बढ़ी क्षमता (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 19, 2026 at 3:55 PM IST

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रामनगर: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में आज प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने 10 नए बाड़ों का उद्घाटन किया. इस विस्तार के साथ रेस्क्यू सेंटर में बाड़ों की संख्या 20 से बढ़कर 30 हो गई है. जिससे यहां रखे जाने वाले बाघ और गुलदारों के लिए बेहतर और सुरक्षित आवास की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी.

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि वर्तमान में रेस्क्यू सेंटर में 13 लेपर्ड और 12 टाइगर मौजूद हैं,कुल 25 वन्यजीवों को यहां रखा गया है. नए बाड़ों के बनने से उनकी देखभाल और प्रबंधन अधिक व्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा. उन्होंने कहा पहले सीमित स्थान के कारण वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष की आशंका बनी रहती थी, लेकिन अब पर्याप्त जगह मिलने से उन्हें अलग-अलग और अनुकूल वातावरण में रखा जा सकेगा. इससे मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है.

कॉर्बेट ढेला रेस्क्यू सेंटर की बढ़ी क्षमता (ETV Bharat)

वन मंत्री ने वन्यजीवों के सैंपल परीक्षण और आधुनिक उपकरणों के उपयोग के लिए एक अत्याधुनिक लैब का भी शुभारंभ किया. इस लैब के माध्यम से रेस्क्यू सेंटर में मौजूद वन्यजीवों की स्वास्थ्य जांच और अन्य आवश्यक परीक्षण अब स्थानीय स्तर पर ही किए जा सकेंगे. जिससे उपचार और निगरानी की प्रक्रिया और तेज व प्रभावी होगी. वनाअग्नि की घटनाओं को लेकर सुबोध उनियाल ने कहा पिछले चार वर्षों में जन सहभागिता बढ़ाने पर विशेष फोकस किया गया है. जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन और राजस्व विभाग को भी वन अग्नि नियंत्रण अभियान से जोड़ा गया है. जिन क्षेत्रों में आग की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटियों का गठन कर प्रत्येक समिति को 30 हजार रुपये की सहायता दी गई है.

वन मंत्री ने कहा कर्मचारियों को आधुनिक उपकरणों जैसे फायर प्रूफ जैकेट, बूट, ब्रश कटर और वुड कटर से लैस किया गया है. साथ ही आग बुझाने में सहयोग करने वाले कर्मचारियों, समूहों और आम नागरिकों को प्रोत्साहित करने की योजना भी शुरू की गई है. नई तकनीक और त्वरित रिस्पांस टीम के कारण वन अग्नि की घटनाओं में कमी आई है. पिछले चार वर्षों में लगभग 19 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है. वन मंत्री ने विश्वास जताया कि जनभागीदारी, आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों के दम पर आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण और वन अग्नि नियंत्रण दोनों क्षेत्रों में और बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे.

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