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वन मंत्री संजय शर्मा ने चंबल नदी में छोड़े 10 घड़ियाल, पुनर्वास प्रक्रिया की हुई शुरूआत

वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि पालीघाट और चम्बल तट को 'इको-टूरिज्म जोन' के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाश की जाएंगी.

Forest Minister and others releasing gharials into river
नदी में घड़ियाल छोड़ते वन मंत्री व अन्य (ETV Bharat Sawai Madhopur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : November 13, 2025 at 2:11 PM IST

3 Min Read
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सवाई माधोपुर: वन मंत्री संजय शर्मा और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक शिखा मेहरा ने गुरुवार को 5 माह के 10 घड़ियालों को चंबल नदी में छोड़कर पुनर्वास प्रक्रिया की शुरूआत की. खंडार क्षेत्र के चम्बल नदी पालीघाट में स्थापित घड़ियाल रेयरिंग सेंटर में वैज्ञानिक पद्धति से रेस्क्यू किए गए 30 घड़ियाल हैचलिंग्स का पालन-पोषण किया गया. इनकी लंबाई 7 सेमी से बढ़कर लगभग 75 सेमी तक हुई है. अब बचे 20 घड़ियालों को आगामी दिनों में 5-5 के समूहों में क्रमवार चम्बल में छोड़ा जाएगा.

डीएफओ रामानंद भाकर ने बताया कि यह परियोजना घड़ियाल संरक्षण योजना की एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे चम्बल नदी क्षेत्र में घड़ियालों की संख्या और सुरक्षा दोनों में वृद्धि होगी. राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य, जो राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमाओं में लगभग 5400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है. यह देश का प्रमुख घड़ियाल प्रजनन और संरक्षण केंद्र है. यहां हर वर्ष चम्बल नदी से घड़ियालों के अंडे एकत्र किए जाते हैं, जिनसे घड़ियाल शावक निकलते हैं. इन्हें लगभग तीन वर्ष तक नियंत्रित वातावरण में पाला जाता है, तत्पश्चात इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाता है. इसकी कड़ी में आज खंडार स्थित पाली घाट चम्बल घड़ियाल अभ्यारण में घड़ियाल छोड़े गए.

वन मंत्री बोले,'घड़ियाल संरक्षण को सशक्त किया जाएगा' (ETV Bharat Sawai Madhopur)

पढ़ें: वन मंत्री शर्मा बोले- एमपी की तर्ज पर राजस्थान की चंबल नदी क्षेत्र में भी होगा घड़ियाल संरक्षण का कार्य

इस अवसर पर वनमंत्री संजय शर्मा ने चम्बल घड़ियाल अभयारण्य का अवलोकन कर घड़ियाल संरक्षण, कृत्रिम प्रजनन और वैज्ञानिक रेयरिंग तकनीकों की जानकारी ली तथा व्यवस्थाओं की सराहना की. वन मंत्री ने कहा की चम्बल नदी पारिस्थितिकी संतुलन की धुरी है. यहां घड़ियालों का संरक्षण केवल वन्यजीव संरक्षण नहीं, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता का प्रतीक है. पालीघाट में जिस प्रकार वैज्ञानिक ढंग से कार्य हो रहा है, उसी तर्ज पर धौलपुर और अन्य क्षेत्रों में भी चम्बल नदी तंत्र में घड़ियाल संरक्षण को सशक्त किया जाएगा. वन मंत्री ने कहा कि राजस्थान में पालीघाट और चम्बल तट को 'इको-टूरिज्म जोन' के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाश की जाएंगी.

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चंबल नदी पालीघाट घड़ियाल अभ्यारण पर हैचलिंग सेंटर पर घड़ियालों के बच्चों को रिलीज करने के लिए पहुंचे वन मंत्री ने अपनी टीम के साथ चंबल में बोटिंग कर चंबल सफारी का लुफ्त उठाया. अधिकारियों से चम्बल घड़ियाल सहित चम्बल सफारी की पूरी जानकारी ली और चम्बल सफारी के लिए ट्यूरिज्म बढ़ाने के निर्देश दिए. इस दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक शिखा मेहरा, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) राजेश गुप्ता, उप वन संरक्षक एवं उप क्षेत्र निदेशक (प्रथम), रणथम्भौर बाघ परियोजना के उपवन संरक्षक डॉ. रामानंद भाकर सहित अन्य वन अधिकारी एवं चम्बल घड़ियाल अभ्यारण के अधिकारी एंव कर्मचारी मौजूद रहे.