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जयपुर हाईकोर्ट में लगातार तीसरे दिन धमकी का 'बम', डेढ़ माह में पांचवीं बार

धमकी को देखते हुए गुरुवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में प्रशासन से अतिरिक्त सुरक्षा बल की मांग की गई.

Lawyers were escorted out of the High Court premises
वकीलों को हाईकोर्ट परिसर से भेजा बाहर (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : December 10, 2025 at 11:57 AM IST

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में लगातार तीसरे दिन बम विस्फोट की धमकी मिली. इस सप्ताह की शुरुआत से रोजाना ऐसी धमकी भरा ईमेल मिल रहा है. धमकी मिलने के बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने मुकदमों की सुनवाई करीब एक घंटे रोक दी. हाईकोर्ट परिसर की जांच की गई. वकीलों और पक्षकारों समेत अन्य सभी को मुख्य परिसर से बाहर कर तलाशी ली गई. धमकी को देखते गुरुवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के होने वाले चुनाव में प्रशासन से अतिरिक्त सुरक्षा बल की मांग की गई है.

हाईकोर्ट चौकी प्रभारी सुमेर सिंह ने बताया कि बम की सूचना पर पुलिस के बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने पूरे हाईकोर्ट परिसर के चप्पे-चप्पे की जांच की. हाईकोर्ट के मुख्य परिसर से न्यायिक कर्मी, अधिवक्ता व पक्षकारों को बाहर निकाला. फायर बिग्रेड और एंबुलेंस तैनात की.

पढ़ें: आखिर ये क्या हो रहा...हाईकोर्ट परिसर को लगातार दूसरे दिन भी बम से उड़ाने की धमकी, 5 दिन में तीसरी बार

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रहलाद शर्मा ने कहा कि अब यह गंभीर मुद्दा बन चुका है कि रोजाना कौन धमकी दे रहा है?. पता लगाना चाहिए कि इसके पीछे खास मुकदमे की सुनवाई टालना है या रोजाना धमकी देकर प्रशासन को उदासीन कर बाद में बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश है. शर्मा का कहना है कि जांच एजेंसी को चाहिए कि तत्काल पता लगाए कि आखिर धमकी कौन दे रहा है और इसके पीछे मंशा क्या है?.

पढ़ें:हाईकोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की फिर धमकी, सुनवाई हुई बाधित

डेढ़ माह में पांचवीं बार: हाईकोर्ट प्रशासन को 31 अक्टूबर को बम विस्फोट की पहली धमकी मिली. इसके बाद एक माह शांति रही. 5 दिसंबर को दूसरी धमकी मिली. इसके बाद 8 दिसंबर से रोजाना हाईकोर्ट प्रशासन को धमकी भरे मेल मिल रहे हैं. सेशन कोर्ट को भी दो बार बम विस्फोट की धमकी मिल चुकी है. हर बार मेल मिलने के बाद मुकदमों की सुनवाई बीच में बंद कर दी जाती है. कोर्ट परिसर खाली कराया जाता है. इससे भय का माहौल पैदा होता है और मुकदमों की सुनवाई प्रभावित होती है.