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390 दिन से 'आजादी' के इंतजार में आरवीटी-7, 'रिहाई' पर निर्णय नहीं ले पा रहा NTCA

अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से आरवीटी-7 को रीवाइल्डिंग के लिए रामगढ़ टाइगर रिजर्व लाया गया.

Young tiger RVT-7 is waiting for freedom
युवा बाघ आरवीटी-7 को आजादी का इंतजार (Photo: Ramgarh Vishdhari Tiger Reserve, Bundi)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : December 31, 2025 at 11:07 AM IST

4 Min Read
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बूंदी: रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के युवा बाघ आरवीटी-7 को आजादी का इंतजार है. एक साल पहले कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से रीवाइल्डिंग के उद्देश्य से रामगढ़ रिजर्व लाए इस युवा बाघ को आज भी जंगल की खुली हवा नसीब नहीं हो पाई. खुले जंगल में दहाड़ने और पहचान बनाने का सपना संजोए आरवीटी-7 बीते 390 दिन से रिजर्व के एनक्लोजर में कैद है. इसकी आजादी पर न टाइगर रिजर्व प्रशासन अंतिम निर्णय ले पाया और न दिल्ली के नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने इसे जंगल में छोड़ने की अनुमति दी.

एनटीसीए की टीम आई थी: रामगढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ अरुण कुमार डी ने साफ कहा कि बाघ को खुले जंगल में छोड़ने का निर्णय पूरी तरह एनटीसीए के अधिकार क्षेत्र में आता है. दो से ढाई महीने पहले दिल्ली से एनटीसीए टीम यहां आई थी. टीम ने बाघ का निरीक्षण किया. सेहत और एनक्लोजर का जायजा लिया. दो महीने से अधिक बीत चुके, लेकिन निर्णय सामने नहीं आया. रिजर्व प्रशासन को एनटीसीए के निर्णय का इंतजार है.

आरवीटी-7 बाघ पर बोले... (ETV Bharat Bundi)

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हर दिन निराशा: आरवीटी-7 बीते 390 दिन से रोजाना एनक्लोजर के गेट तक आता है. जालियों पर झपट्टा मारता है. फिर मायूस होकर लौट जाता है. यह दृश्य कई बार कैमरों में कैद हुआ और सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ. एक साल में रामगढ़ प्रशासन ने इस बाघ को 90 से अधिक जानवरों का शिकार मुहैया कराया ताकि प्राकृतिक व्यवहार बना रहे.

चिड़ियाघर का बाघ बनाने की साजिश: रामगढ़ टाइगर रिजर्व के संस्थापक सदस्य त्रिभुवन सिंह हाड़ा ने कहा कि फलौदी रेंज में एक बाघिन मृत मिली थी. उसके पास दो शावक थे. दोनों शावकों को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क भेजा. इनमें एक बाघ को रीवाइल्डिंग के लिए रामगढ़ टाइगर रिजर्व लाए. वही आज का आरवीटी-7 है. हाड़ा बताते हैं, इस प्रक्रिया को शुरू हुए 13 महीने हो गए, लेकिन बाघ को खुले जंगल में नहीं छोड़ा जा सका. हाड़ा का आरोप है कि एनटीसीए और रिजर्व प्रशासन आरवीटी-7 को चिड़ियाघर का बाघ बनाना चाहते हैं, जो वन्यजीव संरक्षण की मूल भावना के खिलाफ है.

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टेरिटरी संघर्ष या प्रशासनिक हिचक: रामगढ़ रिजर्व के जानकारों की मानें तो टेरिटरी संघर्ष को आरवीटी-7 की कैद की वजह बताया जा रहा है. त्रिभुवन सिंह हाड़ा के अनुसार, 4 दिसंबर 2024 को आरवीटी-7 को रामगढ़ के सॉफ्ट एनक्लोजर में शिफ्ट किया. तभी बाघ आरवीटी-1 और आरवीटी-4 में टेरिटरी संघर्ष हुआ. इसमें आरवीटी-4 की मौत हो गई. संभव है कि इसी घटना के बाद से आरवीटी-7 को एनक्लोजर में रखा. जानकार टेरिटरी संघर्ष को जंगल की प्राकृतिक प्रक्रिया बताते हैं. इसे आधार बनाकर किसी बाघ को अनिश्चितकाल तक कैद में रखना उचित नहीं ठहराते. हाड़ा ने कहा कि वे जल्द इस मामले से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अवगत कराएंगे और बाघ आरवीटी-7 को खुले जंगल में छोड़ने की मांग करेंगे.

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यह भी जानें

  • 4 दिसंबर 2024 को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से रीवाइल्डिंग के लिए रामगढ़ लाए बाघ आरवीटी-7
  • 4 दिसंबर 2024 से अब तक रामगढ़ के एनक्लोजर में बंद
  • 90 से अधिक जानवरों को खा चुका
  • जंगल में प्री बेस की कमी
  • रामगढ़ रिजर्व में 8 बाघ बाघिन है. इनमें 5 फीमेल, 2 मेल तथा एक मेल शावक
  • जनवरी 2025 में टाइगर रिजर्व में बाघ आरवीटी 4 की टेरिटरी संघर्ष में अन्य बाघ से फाइट में मौत

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