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वैश्वीकरण के दौर में पीछे छूटती लोक कला-परंपराओं को पुनर्स्थापित करने के लिए सजा लोक कला संगम

संस्कार भारती की जयपुर प्रांत अध्यक्ष मधु भट्ट तैलंग ने बताया कि पहली बार लोक कला और लोक परंपरा को लेकर कार्यक्रम हो रहा है.

folk artist performing
प्रस्तुति देते लोक कलाकार (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 20, 2026 at 10:57 PM IST

5 Min Read
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जयपुर: वैश्वीकरण के दौर में पीछे छूटती लोक परंपराओं को पुनर्स्थापित करने, गांव-ढाणियों के लोक कलाकारों को मंच देने और ललित कलाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को सशक्त करने के उद्देश्य से जयपुर में लोककला का मंच सजा. संस्कार भारती, जवाहर कला केन्द्र और पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग की सहभागिता से आयोजित 'लोक कला संगम 2026: राजस्थान रै लोकरंग रो उजास' का शुक्रवार से आगाज हुआ. आयोजन में लोक जीवन की भारतीय अवधारणा, परंपरा, जीवन-व्यवहार, पर्यटन, पर्यावरण और लोक देवताओं जैसे विषयों पर मंथन करते हुए लोकधरोहर को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया गया.

राष्ट्रीय चेतना का काम संस्कार भारती का प्रमुख उद्देश्य: राजधानी में शुक्रवार को लोक कला का संगम देखने को मिला. जहां एक ओर मंच पर चिंतन और संवाद की चौपाल सजी. वहीं दूसरी ओर शाम को लोक कलाओं की जीवंत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को लोकभाव में डुबो दिया. आयोजन को लेकर संस्कार भारती की जयपुर प्रांत अध्यक्ष प्रो मधु भट्ट तैलंग ने बताया कि पहली बार लोक कला और लोक परंपरा को लेकर ये कार्यक्रम हो रहा है. उन्होंने बताया कि संस्कार भारती लोक चेतना का काम करती आई है, ललित कलाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का काम संस्कार भारती का प्रमुख उद्देश्य है. जो लोक परंपराएं वैश्वीकरण के युग में पीछे छूट गई, उनको पुनर्जीवित और पुनर्स्थापित करने के लिए ये प्रयास किया गया है.

लोक कला संगम की ये है खास बात, देखें वीडियो (ETV Bharat Jaipur)

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तैलंग ने बताया कि यहां उन लोग कलाकारों को मंच उपलब्ध कराया गया है, जो गांव-गांव ढाणी-ढाणी में अपनी परंपराओं को आज भी थामे हुए हैं. ये कला मंच उनके लिए संजीवनी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कार भारती इस संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही है. सभी प्रान्त में इस तरह के आयोजन होंगे और यहां से एक इंटर स्टेट रिलेशंस भी विकसित होगा. ताकि राजस्थान के कलाकार बाहर जा सकें और बाहर के कलाकार यहां आकर अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें.

Lok Kala Sangam 2026
मुंह बोलती कारीगरी (ETV Bharat Jaipur)

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शेखावाटी, ब्रज और ढूंढाड़ से शुरूआत: उन्होंने बताया कि शास्त्रीय परंपराएं भी लोक से ही आई हैं. जयपुर घराने का प्रसिद्ध ध्रुपद भी लोक से ही निकल करके आया है. हालांकि लोक कला बहुत समृद्ध है. इस वजह से फिलहाल शेखावाटी, ब्रज और ढूंढाड़ क्षेत्र को चुना गया है. खास बात ये है कि यहां लोक कलाओं के माध्यम से पर्यावरण, गौ पूजन, सामाजिक समरसता-एकता की बात उठाई जा रही है. वहीं संस्कार भारती के अखिल भारतीय महामंत्री अश्विन दलवी ने कहा कि 'फोक' शब्द के अनुवाद के रूप में 'लोक' का प्रयोग हुआ, लेकिन भारतीय संदर्भ में लोक केवल अनुवादित शब्द नहीं, बल्कि जीवन का व्यापक दर्शन है.

Lok Kala Sangam 2026
कलाकारों की रचना ने मोहा मन (ETV Bharat Jaipur)

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लोक चेतना कला के माध्यम से व्यक्त: इससे पहले लोक जीवन की भारतीय अवधारणा पर संवाद करते हुए डॉ इन्दु शेखर तत्पुरुष ने कहा कि विगत दो शताब्दियों में भारतीय चिंतन में व्यापक परिवर्तन आया है. लोक वही है जो लोकतंत्र में है, लोकप्रिय है और जनमानस की चेतना में रचा-बसा है. वहीं डॉ विवेक भटनागर ने लोक को सूक्ष्म से स्थूल और अवचेतन से चेतन तक की यात्रा बताया. उनके अनुसार, लोकस्वरूप में प्रचलित मान्यताएं ही लोक इतिहास का आधार बनती हैं. जबकि प्रो तनुजा सिंह ने चित्रकला और लोक के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि लोक चेतना कला के माध्यम से व्यक्त होती है. लोक का सरोकार जड़ों से है. वही जड़ें, जिनसे समाज की सांस्कृतिक पहचान निर्मित होती है.

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सुंदर कला से सजा आयोजन प्रांगण (ETV Bharat Jaipur)

आयोजन में 'लोक दृष्टि : विचार, व्यवस्था और जीवन व्यवहार' पर भी सत्र हुआ. जिसमें वक्ताओं ने बताया कि लोकगीत, लोकसंस्कृति और लोकपरंपराएं किसी एक समय की उपज नहीं, बल्कि सतत चलने वाली प्रक्रिया है. इस दौरान डॉ गीता तामोर ने कहा कि लोकगीतों में जो सहजता और आत्मीयता है, वो किसी तकनीकी संसाधन पर निर्भर नहीं होती. घर-आंगन में होने वाले विवाह समारोहों में महिलाएं बिना किसी मंच के लोकगीत गाकर परंपरा को जीवित रखती हैं. जबकि तनेराज सिंह सोढ़ा ने नई पीढ़ी के प्रकृति से दूर होते जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोक दृष्टि हमें सामूहिक सोच विकसित करना सिखाती है. यदि समाज 'बैडरूम संस्कृति' तक सीमित हो जाएगा, तो लोक जीवन का विस्तार सिकुड़ जाएगा.

Lok Kala Sangam
'लोक और कला' दोनों साथ (ETV Bharat Jaipur)

रंगारंग प्रस्तुतियों से सराबोर हुई शाम: जवाहर कला केंद्र में शाम होते ही शिल्पग्राम का मंच लोकधुनों से गूंज उठा. बृज वंदना से सांस्कृतिक यात्रा की शुरुआत हुई. भजनों में गौ महिमा का वर्णन, लांगुरिया, बम रसिया और जिकड़ी जैसे लोकरूपों ने दर्शकों को बांधे रखा. मयूर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति और भपंग वादन की ताल पर दर्शक झूमते नजर आए. फूलों की होली और चरकुला नृत्य ने ब्रज संस्कृति की झलक पेश की. यहां कार्यक्रम स्थल पर लोक कला- संस्कृति का बखान करती हुई स्टॉल्स भी सजी.