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हिमाचल में बन्द हुए 5 दवा उद्योग, ये रहा सबसे बड़ा कारण

सोलन में पांच दवा उद्योगों ने अपना काम समेट लिया है. इससे 500 से ज्यादा कामगार बेरोजगार हुए हैं.

रातों रात हिमाचल में बन्द हुए 5 दवा उद्योग
रातों रात हिमाचल में बन्द हुए 5 दवा उद्योग (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : December 24, 2025 at 1:13 PM IST

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सोलन: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला में स्थित पांच दवा उद्योग रातों-रात बंद हो गए हैं. ये पांच दवा उद्योग किराए के मकान में चल रहे थे, जिस कारण ये नए नियमों पर खरे नहीं उतर पा रहे थे. इन उद्योगों के बंद होने से 500 से अधिक मजदूर बेरोजगार हो गए हैं. सोलन में बंद हुए सभी उद्योग किराए के मकान में चले हुए थे. ऐसे में इन उद्योगों के लिए एम मानकों को पूरा करना आसान नहीं था हालांकि यह सभी उद्योग लाभ में चले हुए थे.

इन उद्योगों का बंद होना 2023 में बने संशोधित अनुसूची एम के मानक पूरे न होना है. केंद्रीय दवा नियंत्रण संगठन ने इन मानकों को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया था. 1 जनवरी से ऐसे उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई होनी थी. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने राज्य दवा नियंत्रक को इन इकाइयों की जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि वो गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन कर रही है या नहीं. संशोधित अनुसूची एम दवा विनिर्माताओं के लिए गुणवत्ता मानकों और अच्छी विनिर्माण कार्यप्रणाली (जीएमपी) को निर्धारित करती है. इसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिसंबर 2023 में अधिसूचित किया था और यह 1 जनवरी, 2025 से अमल में आई.

क्या है अनुसूची एम

1 जनवरी से देश भर में बड़े उद्योगों की तरह मध्यम और छोटे उद्योगों में नई जीएमपी (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) से दवाओं का उत्पादन किया जाएगा. संशोधित अनुसूची एम दवा और सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1945 के तहत जीएमपी के नियमों का एक नया अपडेटेड सेट है जो फार्मा कंपनियों के लिए गुणवत्ता सुरक्षा और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है, जिसमें अब फार्मास्यूटिकल क्वालिटी, सिस्टम क्वालिटी, रिस्क मैनेजमेंट उत्पाद ,गुणवत्ता समीक्षा और कंप्यूटर कृत सिस्टम जैसे आधुनिक पहलू शामिल किए गए हैं ताकि भारतीय दवाएं विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सुरक्षित बन सके.

मानकों का पालन न होने पर होगी कार्रवाई

राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर का कहना है कि 'जिन दवा उद्योगों ने संशोधित अनुसूची एम के मानकों को पूरा नहीं किया है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने साफ कहा है कि ऐसी यूनिट्स की जांच शुरू करें. दवा कंपनियों को इन नए सख्त गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा. बड़े दवा निर्माता के लिए यह नियम 1 जनवरी 2025 में लागू हो चुका था और अब छोटे व मध्यम फार्मा उद्योग जिनका टर्नओवर ढाई सौ करोड़ या उससे कम है उनके लिए डेडलाइन 31 दिसंबर को खत्म हो रही है. इसके बाद उसका अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण और कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.'

1 जनवरी से लागू होंगे नियम

एमएसएमई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स ने रिवाइज्ड शेड्यूल एम के लिए कुछ समय मांगा था. उनके लिए नया नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होगा. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने साफ तौर पर कहा है कि ऐसी यूनिट्स की जांच शुरू की जाए और चेक करें कि वो नियमों का पालन कर रहे हैं या फिर नहीं. छोटी कंपनियों के लिए ग्रेस पीरियड खत्म हो गया है. इससे बचने के लिए ऐसे उद्योगों ने अपना कारोबार हिमाचल से समेटना शुरू कर दिया है.

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