मालवीय नगर अग्निकांड: हाईकोर्ट ने 6 महीने पहले फायर सेफ्टी एक्शन प्लान बनाने का दिया था आदेश, फिर भी हुई बड़ी अनदेखी
इस तरह के हादसों को रोकने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने करीब छह महीने पहले ही सख्त रुख अपनाया था.

Published : June 4, 2026 at 2:55 PM IST
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में हाल ही में हुई एक भीषण अग्निकांड की घटना ने एक बार फिर दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल दी है. इस हादसे ने जहां जान-माल का भारी नुकसान किया है, वहीं प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. यह घटना कोई इकलौती नहीं है, बल्कि यह दिल्ली में होटल, रेस्टोरेंट और नाइट क्लबों में अग्नि सुरक्षा मानकों की लगातार हो रही अनदेखी का एक भयावह परिणाम है.
अदालती आदेशों की भी अनदेखी
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस तरह के हादसों को रोकने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने करीब छह महीने पहले ही सख्त रुख अपनाया था. 7 जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिल्ली सरकार और एमसीडी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे राजधानी के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में आग से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना (फायर सेफ्टी एक्शन प्लान) तैयार करें. कोर्ट ने न केवल सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू करने को कहा था, बल्कि आग की घटनाओं के पीड़ितों के लिए एक मुआवजा योजना बनाने के निर्देश भी दिए थे. हालांकि, छह महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. प्रशासन की तरफ से अब तक न तो कोई व्यापक कार्ययोजना सामने आई है और न ही अग्नि सुरक्षा के प्रति कोई ठोस कदम उठाए गए हैं.

याचिकाकर्ता और एडवोकेट अर्पित भार्गव के अनुसार, हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संबंधित विभागों ने चुप्पी साध रखी है. भार्गव ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने जनवरी, मार्च और मई में कई बार अधिकारियों को ईमेल के जरिए रिमाइंडर भेजे, लेकिन किसी भी विभाग की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है. जब दिल्ली की अदालत खुद सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर है, तो उसके आदेशों का पालन न होना प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है. क्या प्रशासन को किसी और बड़े हादसे का इंतजार है? जब तक कोई ठोस नीति लागू नहीं होगी, तब तक दिल्ली के हजारों होटल, क्लब और रेस्टोरेंट जानलेवा 'डेथ ट्रैप' बने रहेंगे.
बता दें कि दिसंबर 2025 में गोवा के एक नाइट क्लब में लगी आग की घटना को आधार बनाकर यह दावा किया गया था कि दिल्ली में भी कई होटल और रेस्टोरेंट सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं. इन जगहों पर आग से निपटने के न तो उचित उपकरण हैं और न ही आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एक्जिट) की समुचित व्यवस्था है.
मालवीय नगर अग्निकांड ने यह सिद्ध कर दिया है कि सुरक्षा के दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है. भीड़भाड़ वाले इन इलाकों में अग्नि सुरक्षा की अनदेखी किसी भी दिन बड़े जनहानि का कारण बन सकती है.
शहरी मामलों के जानकार जगदीश ममंगाई के अनुसार यदि समय रहते प्रशासन ने दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन किया होता और सुरक्षा मानकों की जमीनी स्तर पर जांच की होती, तो शायद मालवीय नगर के इस हादसे को टाला जा सकता था. अब वक्त आ गया है कि सरकार और एमसीडी गहरी नींद से जागें और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए एक प्रभावी फायर सेफ्टी एक्शन प्लान को तत्काल लागू करें. अन्यथा, 'सुरक्षा से जुड़े एक्शन प्लान लागू होने से पहले और कितनी जानें जानी बाकी हैं?' यह सवाल अनसुलझा ही रहेगा और आम आदमी इसी तरह अपनी जान जोखिम में डालकर इन स्थानों पर जाने को मजबूर रहेगा.
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