RJD सांसद सुधाकर सिंह पर प्राथमिकी, हत्या का प्रयास और पॉकेटमारी का आरोप
मोतिहारी वाटर पार्क भूमि विवाद में राजद सांसद सुधाकर सिंह पर केस दर्ज किया गया है. इसके बाद राजनीतिक टकराव बढ़ गया है.

Published : July 6, 2026 at 11:51 AM IST
मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी में प्रस्तावित वाटर पार्क परियोजना को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर तेज हो गया है. किसान आंदोलन के दौरान पिपराकोठी थाना में राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह सहित कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामला और अधिक गर्मा गया है.
विवादित भूमि का पूरा विवरण: पूरा विवाद पिपराकोठी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के समीप सरकारी गैरमजरूआ जमीन पर प्रस्तावित वाटर पार्क परियोजना को लेकर है. प्रशासन का कहना है कि लगभग 14 एकड़ सरकारी भूमि में से करीब 3 एकड़ पर भारत सरकार की महत्वाकांक्षी वाटर पार्क परियोजना विकसित की जानी है, जो कि पूरी तरह से नियमानुसार है.
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुला पत्र:
— Sudhakar Singh (रोज़गार जहाँ, वोट वहाँ) (@_Sudhaker_singh) July 5, 2026
प्रिय Samrat Choudhary जी,
आशा है कि आप कुशल-मंगल होंगे। आपको जानकारी प्राप्त हुई होगी कि दिनांक 3 जुलाई 2026 को मुझे अपने किसान साथियों के साथ सत्याग्रह की जननी और बापू की कर्मभूमि चंपारण में जाने का सुअवसर प्राप्त हुआ था।… pic.twitter.com/7HPVMiC3Wi
स्थानीय किसानों का अपना दावा: दूसरी ओर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का दावा है कि वे वर्षों से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं. उनका कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए उन्हें जमीन से बेदखल नहीं किया जा सकता. किसानों की मांग है कि सरकार पहले उनकी स्थिति स्पष्ट करे, फिर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाए.
आंदोलन में नया राजनीतिक मोड़: 3 जुलाई 2026 को आंदोलन ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब राजद सांसद सुधाकर सिंह स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे. उन्होंने किसान सभा को संबोधित किया और किसानों के समर्थन में आंदोलन जारी रखने की बात कही. सभा के बाद सांसद किसानों के साथ विवादित स्थल तक पहुंचे और ट्रैक्टर पर बैठ गए.
ट्रैक्टर से जमीन की जुताई: सांसद विवादित स्थल पर ट्रैक्टर पर बैठकर जमीन की जुताई करते दिखाई दिए. इस घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की ओर से कार्रवाई तेज कर दी गई. पिपराकोठी थाना में दर्ज प्राथमिकी में सांसद सुधाकर सिंह पर हत्या के प्रयास, पॉकेटमारी और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं.

निर्माण एजेंसी ने दर्ज कराई एफआईआर: सांसद और प्रदर्शनकारियों पर हत्या के प्रयास और पॉकेटमारी का यह केस निर्माण स्थल पर काम कराने वाली निजी एजेंसी (ठेकेदार) की शिकायत पर दर्ज हुआ है. एजेंसी के कर्मचारियों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने काम रुकवाने के लिए मौके पर मौजूद स्टाफ और मजदूरों के साथ हिंसक मारपीट की थी.
हमले और लूट का आरोप: शिकायतकर्ता निर्माण एजेंसी के अनुसार, भीड़ ने कार्यस्थल पर मौजूद जेसीबी चालक और खलासी को बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया. इसके अलावा कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सांसद के नेतृत्व में आए लोगों ने उनके मोबाइल फोन, औजार और जेब में रखे नकदी पैसे (पॉकेटमारी) भी जबरन छीन लिए.
समर्थकों ने बताया राजनीतिक द्वेष: सांसद समर्थकों और किसान संगठनों का कहना है कि यह मामला पूरी तरह राजनीतिक है. उनका आरोप है कि किसानों की आवाज उठाने के कारण सांसद को निशाना बनाया जा रहा है. उनका कहना है कि यह दर्ज की गई एफआईआर पूरी तरह से विपक्ष की मजबूत आवाज को दबाने का एक प्रयास है.
लोकसभा स्पीकर से कल मुलाकात: सूत्रों के अनुसार सांसद सुधाकर सिंह 7 जुलाई को नई दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करेंगे. इस दौरान वे अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी, किसान आंदोलन और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं. हालांकि लोकसभा सचिवालय की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
जिला प्रशासन अपने रुख पर अडिग: इधर जिला प्रशासन अपने रुख पर पूरी तरह कायम है. अधिकारियों का कहना है कि जिस जमीन पर वाटर पार्क बनाया जाना है वह पूरी तरह सरकारी भूमि है और परियोजना जनहित में है. प्रशासन का दावा है कि विकास कार्य को किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होने दिया जाएगा.
Motihari, Bihar: RJD MP Sudhakar Singh says, " due to an alleged arbitrary decision by adm mukesh sinha, around 17.5 acres of land, valued at approximately ₹800 crore, was reportedly taken into police possession in bihar. construction was being carried out in an allegedly… pic.twitter.com/VQdWcSwjWo
— IANS (@ians_india) July 3, 2026
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी: दूसरी ओर किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा. उनका कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. इस विवाद ने अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग भी ले लिया है.
टकराव के बीच टिकी निगाहें: फिलहाल पिपराकोठी वाटर पार्क परियोजना को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच टकराव जारी है. एक तरफ सरकार विकास परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर किसान अपने खेती के अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं. अब इस पूरे मामले में आगे क्या मोड़ आता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं. .
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