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JNU में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर लगा चार लाख से अधिक का जुर्माना, ABVP ने लगाया ये बड़ा आरोप

एबीवीपी जेएनयू इकाई ने चयनात्मक कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए है.

जेएनयू में एबीवीपी पर कार्रवाई
जेएनयू में एबीवीपी पर कार्रवाई (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : January 10, 2026 at 10:51 PM IST

2 Min Read
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नई दिल्ली: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में अपने कार्यकर्ताओं पर की जा रही चयनात्मक कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रसंघ की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. परिषद का कहना है कि राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े छात्रों के साथ असमान व्यवहार किया जा रहा है. एबीवीपी के कार्यकर्ताओं पर प्रति छात्र 19,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जो कुल मिलाकर लगभग 1.5 लाख रुपये तक पहुंच गया है.

एबीवीपी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि पुस्तकालय और डीन ऑफ स्टूडेंट्स कार्यालय में हुई तोड़-फोड़ जैसी घटनाओं में शामिल वामपंथी संगठनों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जबकि दूसरी ओर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखने वाले छात्रों पर आर्थिक दंड और प्रशासनिक कार्रवाई की गई. फरवरी 2022 से जनवरी 2026 के बीच अभाविप कार्यकर्ताओं पर कुल लगभग 4.64 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है और 8 से 10 छात्रों को निष्कासित कर उनकी डिग्रियां रोकी गई हैं, जिससे कई छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हुआ है.

एबीवीपी जेएनयू मंत्री का आरोप (ETV Bharat)

एबीवीपी जेएनयू मंत्री प्रवीण के. पीयूष ने बताया कि परिसर में अनुशासन भंग करने वाले तत्वों के मामलों में प्रशासन का रवैया अलग दिखाई देता है, जबकि ‘वंदे मातरम’ जैसे नारों के साथ अपनी बात रखने वाले छात्रों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है. जेएनयू छात्रसंघ की चुप्पी भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रश्नचिह्न लगाती है. एबीवीपी मांग करती है कि कार्यकर्ताओं पर लगाए गए जुर्माने तत्काल वापस लिए जाएं, अन्यथा संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा.

एबीवीपी जेएनयू उपाध्यक्ष मनीष चौधरी ने बताया कि जेएनयू प्रशासन का दोहरा रवैया एक बार फिर सामने आया है. एबीवीपी के नौ कार्यकर्ताओं पर 19-19 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि वामपंथी संगठनों द्वारा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. एबीवीपी के राष्ट्रवादी कार्यक्रमों को अनुमति नहीं मिलती, लेकिन वाम संगठनों को छूट है.

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