वित्त मंत्री ने नेता प्रतिपक्ष को लिखा पत्र, कहा- राजनीतिक निष्ठा से पहले राज्य के प्रति निष्ठा होनी चाहिए
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने नेता प्रतिपक्ष को 'मिनरल डेवलपमेंट रेगुलेशन एक्ट' में संशोधन के संबंध में पत्र लिखा है. नीरज कुमार की रिपोर्ट.

Published : August 24, 2026 at 9:34 PM IST
पलामूः झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने खनिज विकास विनियम कानून में संशोधन (Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026) को लेकर प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी को पत्र लिखा है.
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पत्र में कहा कि झारखंड के संवैधानिक अधिकारों और झारखंड के आर्थिक हितों में रक्षा की रक्षा होनी चाहिए. वित्त मंत्री ने बाबूलाल मरांडी से कहा कि उनके नेतृत्व में प्रदेश भाजपा केंद्र सरकार के समक्ष झारखंड के आर्थिक हित और संवैधानिक अधिकार की बात केंद्र सरकार के समक्ष रखे. उन्होंने कहा कि राजनीतिक निष्ठा से पहले राज्य के प्रति निष्ठा होनी चाहिए, राज्य सर्वोपरि है.

झारखंड को बकाया राशि से हाथ धोना पड़ेगाः वित्त मंत्री
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में लिखा कि अधिनियम में संशोधन कर 9डी जोड़े जाने से झारखंड जैसे खनिज संपदा राज्यों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा. 2026-27 में लगभग 14000 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्ति अनुमानित है. संशोधन से झारखंड को 14,000 करोड़ रुपए के राजस्व से वंचित होना पड़ेगा. इसके अतिरिक्त कोल कंपनियों के पास झारखंड की बकाया राशि 136042 करोड़ रुपए से भी हाथ धोना पड़ जाएगा.
झारखंड के सामने कई समस्याएंः राधाकृष्ण किशोर
वित्त मंत्री ने बाबूलाल मरांडी को कई बिंदुओं पर पत्र के माध्यम से जानकारी देते हुए अपनी बात रखी है. वित्त मंत्री ने लिखा कि खनन के माध्यम से आर्थिक लाभ केंद्र सरकार को प्राप्त होता है. इसके बदले में झारखंड को विस्थापन, जमीन से बेदखली, पर्यावरण का प्रदूषण, जंगलों पर दबाव, खनिज परिवहन से जर्जर सड़क, खराब स्वास्थ्य और अशुद्ध पानी समेत कई समस्याएं मिलती हैं.
आवश्यकता पड़ने परो संवैधानिक मंचों का उपयोग करेंगेः राधाकृष्ण किशोर
वित्त मंत्री ने पत्र के माध्यम से कहा है कि आप आदिवासी समाज के सदस्य हैं, झारखंड की पीड़ा को अच्छी तरह समझ सकते हैं. एक राजनीतिक व्यक्ति होने के नाते राजनीतिक प्रतिद्वंता लोकतंत्र का हिस्सा है, परंतु विचारों और सिद्धांतों का मतभेद राज्य हित में नहीं दिखना चाहिए. वित्त मंत्री ने पत्र में लिखा है कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार पूरे विषय पर अपनी बात केंद्र सरकार के समक्ष रखेगी. आवश्यकता पड़ी तो संवैधानिक मंचों का भी उपयोग किया जाएगा.
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