पुल बना नहीं और हो गई पेमेंट.. CAG Report ने खोली बिहार सरकार के अनियमितता की पोल
बिहार सरकार की अनियमितताओं को कैग रिपोर्ट में उजागर किया गया. रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे फसल क्षति के नाम पर लूट हुई-


Published : February 26, 2026 at 5:07 PM IST
पटना : वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भारतीय नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आज विधानसभा और विधान परिषद यानी दोनों सदनों में पेश की. इस रिपोर्ट में एक बार फिर से नीतीश सरकार के वित्तीय अनियमिताओं का खुलासा हुआ है.
राजस्व वसूली न हो पाने पर नुकसान : बिहार विधानसभा में पेश की गई कैग रिपोर्ट कहा गया है कि 31 मार्च 2023 तक 4844 करोड़ 46 लाख रुपये राजस्व बकाया था और 1430 करोड़ 32 लाख रुपये का राजस्व 5 वर्षों से अधिक समय से वसूले नहीं गए. बिक्री कर, वाहन कर, खनन, भू-राजस्व और अन्य विभागों में हजारों करोड़ रुपये की वसूली लंबित पाई गई. कई विभागों ने पांच साल से अधिक पुराने बकायों का पूरा विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया.

बिक्री व्यापार कर में सबसे अधिक राजस्व बकाया : कैग रिपोर्ट के अनुसार बिक्री व्यापार कर पर 2371 करोड़ 90 लाख रुपये बकाया हैं, जिनमें 1289 करोड़ 39 लाख रुपये 5 साल से अधिक समय से लंबित हैं. माल एवं यात्रियों पर कर के रूप में 248 करोड़ 58 लाख रुपये राजस्व बकाया हैं. विद्युत पर कर एवं शुल्क के रूप में 20 लाख रुपये बकाया हैं. वस्तु एवं सेवाओं पर 3 करोड़ 25 लाख रुपये बकाया हैं. राज्य उत्पाद पर 54 करोड़ 30 लाख रुपये तथा खनन एवं धातुकर्म उद्योग पर 1505 करोड़ 16 लाख रुपये बकाया हैं. खान एवं भूतत्व विभाग ने 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित बकाया का विवरण नहीं दिया है. राशि वसूली के लिए भू-राजस्व के रूप में नीलामवाद दायर किया गया है.
बाढ़ प्रभावित घोषित नहीं होने के बावजूद कृषि सब्सिडी : कैग रिपोर्ट के अनुसार खरीफ 2019 में ऐसे 10 जिलों को ₹21.48 करोड़ की कृषि इनपुट सब्सिडी दी गई जिन्हें बाढ़ प्रभावित घोषित ही नहीं किया गया था. वहीं 14 अन्य जिलों के आवेदकों को ₹4.03 करोड़ की राशि ऐसे क्षेत्रों के नाम पर दी गई जो आपदा प्रभावित सूची में शामिल नहीं थे. 2019 और 2020 के दौरान चिन्हित फसल क्षति क्षेत्र से 1.34 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में ₹151.92 करोड़ की सब्सिडी वितरित की गई.
'नियमों का हुआ उल्लंघन' : SDRF मानकों का पालन नहीं करने से ₹3.74 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान हुआ. डेटाबेस की गलत मैपिंग और नियमों के उल्लंघन से 15.53 लाख मामलों में ₹56.14 करोड़ का अधिक, अनियमित भुगतान सामने आया. वहीं फसल क्षति 33 प्रतिशत से कम होने के बावजूद 2019–22 के दौरान 6.81 लाख मामलों में ₹159.28 करोड़ की सब्सिडी दी गई.
जमीन अधिग्रहण भुगतान में भी नियमों का पालन नहीं : कैग ने अपनी रिपोर्ट में अभी कहा है की जमीन अधिग्रहण के बाद ठीक से गणना नहीं किए जाने के कारण सीतामढ़ी में जमीन मालिकों को कम भुगतान हुआ. 617 प्रभावित परिवारों को 8.84 करोड़ कम मुआवजा दिया गया और जिला भू अर्जन अधिकारियों द्वारा सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि उपकर वसूली विभागीय दिशा निर्देश के अनुसार नहीं करने के कारण उपकार के संग्रह में 1.15 करोड़ का नुकसान हुआ. संपत्ति और दस्तावेज के कम मूल्यांकन के कारण 4.45 करोड़ निबंधन शुल्क कम प्राप्त हुआ.
कैग ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के क्रियाकलाप पर भी सवाल खड़ा किया है. 2022-23 में 2021-22 के मुकाबले 29% कम आय प्राप्त हुआ. 2022-23 में 327.20
करोड़ आय हुआ था, जबकि 2021-22 में 462.53 करोड़ था.
पुल बना नहीं लेकिन हो गया भुगतान : कैग रिपोर्ट ने बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के क्रियाकलाप पर भी सवाल खड़ा किया है. एक अपूर्ण पुल के निर्माण पर 5.35 करोड़ रुपए का भुगतान निगम ने कर दिया है, क्योंकि निगम ने पुरातात्विक स्थल, प्राचीन स्मारक और अवशेष अधिनियम 1958 के अनुपालन में नियम का पालन नहीं किया था.
फसल क्षति के नाम पर हुई लूट! : एक तरफ जहां सरकार के पास राजस्व की कमी है, वहीं दूसरी तरफ सरकार अपना राजस्व भी वसूल नहीं पा रही है. वहीं बाढ़ प्रभावित इलाकों में फसल क्षति के नाम पर जमकर लूट हो रही है. बाढ़ प्रभावित घोषित नहीं इलाकों के लोगों को भी कृषि इनपुट सब्सिडी बांट दिया गया है. पुल बना नहीं उसकी भी भुगतान कर दी गई तो इस तरह की कई अनियमित नीतीश सरकार के तरफ से की गई है. पिछले वर्ष भी कैग ने जो रिपोर्ट पेश की थी उस समय कई तरह की वित्तीय अनियमितता सामने आया था, इस पर काफी बवाल मचा था.
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