ETV Bharat / state

घातक ड्रग चिट्टे के खिलाफ कैसे लड़ें जंग, हिमाचल से सीख लेंगे देश भर के राज्य, NCB ने की है तारीफ

हिमाचल के एन्टी चिट्टा मॉडल की सराहना एनसीबी ने भी की है. इस मॉडल का अध्ययन कर अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा.

सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : May 14, 2026 at 2:13 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

शिमला: बेशक हिमाचल प्रदेश खुद नशीले पदार्थों को तस्करी से उपजे कष्ट को झेल रहा है, लेकिन राज्य ने घातक नशे चिट्टे के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ रखी है. हिमाचल सरकार के एन्टी चिट्टा मॉडल की सराहना एनसीबी यानी नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने भी की है. अब देश के अन्य राज्य हिमाचल के मॉडल से सीख लेंगे.

हिमाचल का एंटी चिट्टा मॉडल अब अपराधियों की कमर तोड़ने में कामयाब हो रहा है. इस मॉडल की चर्चा देश के अन्य राज्यों में भी होने लगी है. नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के रीजनल ऑफिस ने इस मॉडल के बारे में हिमाचल प्रदेश से रिपोर्ट मांगी है. ब्यूरो इस मॉडल का अध्ययन कर अन्य राज्यों में भी लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगा.

हिमाचल सरकार ने चिट्टे के नशे के खिलाफ अभियान को लेकर एक व्यापक योजना तैयार करवाई है. इस योजना के तहत चिट्टे में संलिप्त अपराधियों के साथ-साथ नशे के कारोबार की पंचायत स्तर तक मैपिंग की गई. हिमाचल देश का पहला राज्य है, जहां चिट्टे की समस्या से जूझ रही पंचायतों को चिन्हित कर रेड, येलो और ग्रीन श्रेणी के रुप में चिह्नित किया गया है. एक सर्वे के बाद प्रदेश की 234 पंचायतों में चिट्टे का प्रभाव सबसे अधिक पाया गया. इन 234 पंचायतों को रेड श्रेणी में रखा गया है.

कांग्रेस सरकार इस नशे के ख़िलाफ़ सख्ती से कदम उठा रही है. सीएम ने कहा कि एनसीबी ने राज्य के एन्टी चिट्टा अभियान का विवरण मांगा है. इसे देश के अन्य राज्यों को भी भेजा जाएगा.- सीएम सुक्खू

174 अपराधियों को हिरासत में लिया

हिमाचल प्रदेश के एंटी चिट्टा मॉडल के तहत चिट्टे के कारोबार में संलिप्त अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है. पीड़ित युवाओं के पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जा रहा है. राज्य सरकार ने प्रिवेंशन ऑफ इल्लिसिट ट्रैफिक यानी पिट-एनडीपीएस एक्ट लागू कर 174 अपराधियों को हिरासत में लिया है. इस तरह की बड़ी कार्रवाई करने पर हिमाचल प्रदेश देश भर में पहले स्थान पर रहा. इसके अतिरिक्त नशा तस्करों की 51 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियां जब्त की गईं. यह पहले की तुलना में तीन गुणा अधिक है. 700 से ज्यादा मामले जांचने के बाद 300 मामलों को आर्थिक जांच और संपत्ति जब्त करने के लिए उपयुक्त पाया गया. राज्य में नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के मानकीकरण की योजना अंतिम चरण में है.

सिरमौर के कोटला बड़ोग में बन रहा आधुनिक पुनर्वास केंद्र

इसके अलावा नीति आयोग के साथ-साथ एम्स दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ के साथ मिलकर सिरमौर जिला के कोटला बड़ोग में एक आधुनिक पुनर्वास केंद्र बनाया जा रहा है. जल्द ही शिमला जिला के मशोबरा और कांगड़ा जिला के टांडा मेडिकल कॉलेज में भी पुनर्वास केंद्र शुरू होने वाले हैं. युवा पीढ़ी को चिट्टे के दलदल में जाने से रोकने के लिए स्कूल और कॉलेजों में ड्रग फ्री कैंपस अभियान, एंटी ड्रग शपथ और एंटी ड्रग सेल स्थापित किए जा रहे हैं.

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार 'मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के एंटी चिट्टा अभियान को सफल बनाने के लिए समाज का हर वर्ग अपनी भागीदारी निभाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. सामाजिक दबाव से बाहर निकलकर अभिभावक स्वयं टोल फ्री नंबर 112 पर अपने बच्चों में चिट्टे की लत छुड़ाने के लिए सहायता मांगने के लिए आगे आ रहे हैं. उल्लेखनीय है कि चिट्टे के घातक परिणामों से राज्य में तीन साल में 66 युवा मौत का शिकार बन चुके हैं. विधानसभा में भी इस सामाजिक बुराई पर चर्चा हुई है. चिट्टे के खिलाफ अभियान के लिए राज्य पुलिस के अफसरों को सम्मानित किया जा रहा है.'

ये भी पढ़ें: हिमाचल में अब सरकारी नौकरी और संस्थानों में एडमिशन से पहले होगा चिट्टा टेस्ट, CM सुक्खू ने की ये बड़ी घोषणा