फीफा वर्ल्ड कप ने चंडीगढ़ के खिलाड़ियों में भरा नया जोश, महिला खिलाड़ी भी रातभर देख रहे मुकाबले
फीफा टूर्नामेंट ने चंडीगढ़ के युवाओं और महिला फुटबॉल खिलाड़ियों में नया जोश भर दिया है. मैचों से युवाओं को प्रेरणा मिल रही है.

Published : June 19, 2026 at 12:58 PM IST
|Updated : June 19, 2026 at 1:40 PM IST
चंडीगढ़: क्रिकेट के दीवानों की तरह अब भारत में फुटबॉल का जुनून भी तेजी से बढ़ रहा है. फीफा टूर्नामेंट शुरू होते ही चंडीगढ़ के युवा, खासकर फुटबॉल खिलाड़ी, देर रात तक टीवी और मोबाइल स्क्रीन से चिपके नजर आ रहे हैं. इस बार लड़कों के साथ-साथ महिला फुटबॉल खिलाड़ियों में भी फीफा मुकाबलों को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. कई खिलाड़ी रातभर जागकर मैच देख रहे हैं और सुबह मैदान में अभ्यास भी कर रहे हैं.
मैच नहीं, सीखने का मौका: शहर की विभिन्न फुटबॉल अकादमियों और खेल मैदानों में अभ्यास करने वाली युवा खिलाड़ियों का कहना है कि फीफा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि सीखने का बेहतरीन अवसर है. दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों की तकनीक, पासिंग, फिटनेस, गेम प्लान और मैदान पर फैसले लेने की क्षमता को देखकर वे अपने खेल में सुधार की कोशिश करती हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले उन्हें पेशेवर फुटबॉल की बारीकियां समझने का मौका देते हैं.

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी: महिला खिलाड़ियों का कहना है कि पहले फुटबॉल को केवल लड़कों का खेल माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. चंडीगढ़ में लड़कियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट उन्हें बड़े सपने देखने की प्रेरणा दे रहे हैं. कई खिलाड़ी अपने पसंदीदा स्टार फुटबॉलरों की स्टाइल और रणनीति को अभ्यास के दौरान अपनाने का प्रयास करती हैं.

कोच बोले-"बढ़ रही नई पीढ़ी की रुचि":ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान सेक्टर-22 स्कूल के फुटबॉल कोच भूपिंदर पिंका ने कहा कि, "फीफा जैसे बड़े टूर्नामेंट युवाओं में फुटबॉल के प्रति रुचि बढ़ाते हैं. मैच देखने के बाद खिलाड़ियों में नई ऊर्जा और सीखने की ललक दिखाई देती है. अब कई बच्चे नियमित प्रशिक्षण लेकर पेशेवर खिलाड़ी बनने का सपना देख रहे हैं."
खिलाड़ियों में खासा उत्साह: वहीं, गोलकीपर नंदिनी ने कहा कि, "दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को देखकर आत्मविश्वास बढ़ता है. उनकी तकनीक और गोल बचाने के तरीके हमें काफी कुछ सिखाते हैं." इसके अलावा मिड-फॉरवर्ड खिलाड़ी खुशी ने कहा कि, "हर मैच में नई रणनीति देखने को मिलती है. हम कोशिश करते हैं कि उन तकनीकों को अपने अभ्यास में शामिल करें." साथ ही फुटबॉल खेलना शुरू करने वाले युवा खिलाड़ी अरशद ने कहा, "फीफा देखने के बाद फुटबॉल के प्रति मेरा उत्साह और बढ़ गया है. अब मैं इस खेल में आगे बढ़ने के लिए नियमित अभ्यास कर रहा हूं."

शहर में हर जगह फुटबॉल की चर्चा: फुटबॉल का यह बढ़ता क्रेज अब मैदान तक सीमित नहीं है. शहर के कैफे, हॉस्टल, स्पोर्ट्स क्लब और घरों में भी फीफा मैचों की चर्चा हो रही है. युवा अपने दोस्तों के साथ देर रात मुकाबले देखने के लिए विशेष प्लान बना रहे हैं. खिलाड़ियों का मानना है कि फीफा केवल एक टूर्नामेंट नहीं बल्कि खेल भावना, जुनून और एकजुटता का वैश्विक उत्सव है, जिसका असर अब चंडीगढ़ के युवाओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है.
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