'व्हीलचेयर नहीं दिया..' जवान बेटी को पीठ पर लादकर सदर अस्पताल में घूमता रहा पिता
सासाराम सदर अस्पताल में बिहार सरकार के दावे की पोल खोलती तस्वीर सामने आई है. इस मामले में सिविल सर्जन ने लापरवाही भरा जवाब दिया-


Published : December 24, 2025 at 7:08 PM IST
रोहतास : बिहार के रोहतास जिले के सबसे बड़े सरकारी सदर अस्पताल से मन को विचलित करने वाली एक तस्वीर सामने आई है. यहां एक पिता अपनी घायल बेटी को लेकर सदर अस्पताल पहुंचा लेकिन इलाज तो दूर व्हील चेयर तक उसे नसीब नहीं हुई. सबसे बड़ी बात कि स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता के कारण एक मजबूर बेबस पिता को घंटों अपनी जवान बेटी को पीठ पर लादकर अस्पताल के एक विभाग से दूसरे विभाग का चक्कर काटना पड़ा. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता को भी पूरी तरह उजागर कर दिया है.
घायल मरीज को नहीं मिला व्हीलचेयर : इधर मामले में पीड़ित पिता की मानें तो उनकी पुत्री का पैर फ्रैक्चर हो गया था. जिसके बाद वे अपनी पुत्री को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल सासाराम लेकर आए, लेकिन सदर अस्पताल में निवेदन करने पर भी उन्हें व्हीलचेयर मुहैया तक नहीं कराया गया. फिर क्या था, एक लाचार पिता ने बेटी को पीठ पर ही टांगा और फिर इलाज के लिए विभाग दर विभाग भटकते रहे.

''पिता ने बताया की बेटी का पैर फ्रैक्चर होने से वह चल फिर नहीं सकती, इसलिए अपने कंधे पर उठाकर उसे कभी डॉक्टर के पास तो कभी एक्सरे जांच के लिए ले जाना पड़ रहा है. हमने व्हीलचेयर मांगी लेकिन नहीं मिली तो हम ऐसे ही लेकर यहां-वहां दिखा रहे हैं.'' - राधेश्याम, पीड़ित पिता
'पीड़ित ही जिम्मेदार'-सिविल सर्जन : हालांकि इस संबंध में जब सासाराम के सिविल सर्जन डॉक्टर मनीराज रंजन से बात की गई उन्होंने बताया कि मरीज को व्हीलचेयर मुहैया न कराने जैसी कोई बात नहीं है. मरीज के परिजन जल्दीबाजी में होंगे. सदर अस्पताल में 3 से 4 व्हीलचेयर उपलब्ध है. अगर व्हीलचेयर उपलब्ध कराने में किसी स्टाफ ने कोताही बरती होगी तो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी.
"मरीज ने व्हीलचेयर मांगी होगी और न मिली होगी ऐसी कोई बात नहीं है. मरीज के परिजन ही जल्दबाजी में होंगे. अस्पताल में 3-4 व्हीलचेयर उपलब्ध है. व्हीलचेयर को उपलब्ध करवाने में किसी स्टाफ ने लापरवाही बरती होगी तो उसपर निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी."- डॉ. मनीराज रंजन, सिविल सर्जन, सदर अस्पताल, सासाराम
मरीजों को नहीं मिल रही बुनियादी सुविधाएं : अच्छा हुआ सिविल सर्जन ने ये नहीं कहा कि मरीज को यहां क्यों लाए हैं? सुविधाएं चाहिए तो प्राइवेट अस्पताल में जाइए. बिहार सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन दूसरी तरफ मरीजों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं.
स्वास्थ्य विभाग पर सवाल : इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता को भी उजागर कर दिया है. अस्पताल परिसर में एक पिता स्वास्थ्य कर्मियों एवं चिकित्सकों के सामने हीं अपनी पुत्री को कंधे पर उठाकर एक विभाग से दूसरे विभाग का चक्कर काटता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली. जिले के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों को व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलने से सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
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