जानिए संगम की लहरों के बीच क्यों उतरे किसान? भाकियू युवा अध्यक्ष ने दी बड़ी चेतावनी
गंगा-यमुना की लहरों के बीच खड़े होकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 3, 2026 at 1:26 PM IST
प्रयागराज: पवित्र संगम तट पर एक बार फिर जन-आंदोलन की गूंज सुनाई दे रही है. भारतीय किसान यूनियन (युवा) के बैनर तले सैकड़ों किसानों और युवा कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों और जनसमस्याओं के स्थायी समाधान को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन शुरू किया है. आंदोलनकारियों ने इस विरोध प्रदर्शन को 'जल सत्याग्रह' का नाम दिया है और गंगा-यमुना की लहरों के बीच खड़े होकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है.
आंदोलन के मुख्य मुद्दे और किसानों की मांगें: भारतीय किसान यूनियन (युवा) के प्रदेश अध्यक्ष अनुज सिंह ने बताया कि ये आंदोलन किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या विचारधारा के विरोध में नहीं है, बल्कि यह आम जनता के अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई है.
उन्होंने निम्नलिखित मुख्य मुद्दों को रेखांकित किया-
- लंबित मामलों पर ठोस कार्रवाई की मांग: किसान नेताओं का आरोप है कि पिछले साल 25 मार्च को जिला अधिकारी (DM) के साथ चार दौर की सकारात्मक वार्ता हुई थी, जिसमें विभाग को एक सप्ताह के भीतर मुद्दों का निस्तारण करने का लिखित आदेश दिया गया था, लेकिन 3 महीने बीत जाने के बाद भी किसी विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया.
- किसानों पर दर्ज 'फर्जी मुकदमे': अनुज सिंह ने कहा कि पिछले 1 साल में प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में कई निर्दोष किसानों और आम जनता पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है और वे कचहरियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.
- भूमि अधिग्रहण और अवैध कब्जे: एयरपोर्ट थाना क्षेत्र में किसानों की जमीनों पर कथित अवैध कब्जों और भूमि अधिग्रहण के बाद उचित मुआवजे और न्याय न मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है.
- खाद और बिजली की भारी किल्लत: ग्रामीण क्षेत्रों में खाद (Fertilizer) की कमी और बिजली संकट के कारण खेती प्रभावित हो रही है. संगठन का कहना है कि सरकार कागजों पर पर्याप्त स्टॉक का दावा कर रही है, लेकिन धरातल पर बटाई (किराए) पर खेती करने वाले गरीब किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है.
- बुनियादी ढांचा और जलभराव: शंकरगढ़ सहित ग्रामीण इलाकों में सड़क, पेयजल और बिजली की समस्याएं बनी हुई हैं, वहीं शहर में भारी बारिश के बाद होने वाले गंभीर जलभराव से आम जनता त्रस्त है.
- हिंसक घटना पर कार्रवाई: धरना स्थल पर हुई एक पूर्व हिंसक घटना, जिसमें एक नाबालिग दलित (SC) बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी, उसके दोषियों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई न होने पर भी रोष जताया गया है.
प्रदेश अध्यक्ष, भाकियू (युवा) अनुज सिंह ने कहा कि "जब तक हमारी मांगों पर केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और लिखित निर्णय लेकर काम शुरू नहीं होता, तब तक यह जल सत्याग्रह समाप्त नहीं होगा. अगर स्थानीय प्रशासन हमारी नहीं सुनेगा, तो हम अपनी आवाज मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक ले जाएंगे."

अधिकारी ने बताया, किसानों के पूर्व में दिए गए ज्ञापनों पर जो भी कार्रवाई की गई थी, उससे किसान संतुष्ट नहीं हैं. प्रशासनिक स्तर पर किसान नेताओं से लगातार सकारात्मक वार्ता की जा रही है. किसानों को आश्वस्त किया गया है कि उनके उठाए गए मुद्दों पर नियम अनुसार और समयबद्ध तरीके से शीघ्रता से कार्रवाई की जाएगी.
प्रशासन को उम्मीद है कि इस आश्वासन के बाद किसान जल्द ही अपना धरना समाप्त कर देंगे. किसान संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका यह आंदोलन लंबा खिंच सकता है और आने वाले दिनों में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी इस आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंच सकते हैं.

