बूंदी में किसान आंदोलन: धान के समर्थन मूल्य को लेकर दिन में प्रदर्शन, शाम को बनी बात
शाम को तीसरे दौर की वार्ता में धान के भाव को छोड़कर अन्य सभी किसानों की मांगों पर सहमति बन गई.

Published : November 3, 2025 at 7:28 PM IST
बूंदी: धान का समर्थन मूल्य 3200 रुपए प्रति क्विंटल करने सहित अन्य मांगों को लेकर जिले की कुंवारती कृषि उपज मंडी में किसानों ने सोमवार को बहिष्कार कर प्रदर्शन किया. किसानों ने मंडी के मुख्य द्वार को बंद कर नारेबाजी की और नीलामी प्रक्रिया को पूरी तरह ठप कर दिया. प्रशासन और किसानों के बीच दिन में तीन बार वार्ता के बाद शाम को सहमति बनी. मंडी सचिव क्रांति कुमार मीणा ने बताया कि धान के भाव 3200 रुपए करने सहित अन्य मांगों को लेकर किसान नेताओं के साथ दिन की दो वार्ताएं विफल रहीं, लेकिन शाम को तीसरे दौर की वार्ता में धान के भाव को छोड़कर अन्य सभी किसानों की मांगों पर सहमति बन गई है. जहां तक धान का भाव 3200 करने की बात है, यह हमारे स्तर का मामला नहीं है. अब मंगलवार से मंडी में कामकाज शुरू होगा.
इससे पहले सोमवार को किसानों ने पिछले सप्ताह ही मंडी प्रशासन और सरकार को चार दिन का अल्टीमेटम दिया था कि 3 नवंबर तक यदि धान का भाव 3200 रुपए नहीं किया गया तो वे आंदोलन तेज करेंगे. सोमवार को किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर रैली के रूप में मंडी पहुंचे. वहां पहुंचते ही उन्होंने मुख्य गेट को जाम कर नारेबाजी शुरू कर दी और मंडी परिसर में खरीदी-बिक्री की प्रक्रिया रुकवा दी. मंडी परिसर में सदर थाना पुलिस, पुलिस लाइन और आरएसी का भारी जाप्ता तैनात था. मंडी सचिव क्रांति कुमार मीणा, तहसीलदार अर्जुनलाल मीणा और सदर थाना प्रभारी रमेशचंद आर्य मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने आंदोलनरत किसानों को समझाने का प्रयास किया.
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विधायक हरिमोहन शर्मा पहुंचे मौके पर: बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत का सही मूल्य मिलना ही चाहिए. शर्मा ने यह भी अपील की कि आंदोलन को राजनीतिक रंग न दिया जाए, बल्कि इसे किसानों की आवाज के रूप में बनाए रखा जाए. प्रदर्शन के दौरान किसान नेता गिरिराज गौतम ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी, तो किसान अब सिर्फ मंडी में नहीं रुकेंगे, बल्कि धान की ट्रॉलियां लेकर जयपुर कूच करेंगे और मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना देंगे. गौतम ने कहा कि किसान अब थक चुका है, वह अब अपनी मेहनत का वाजिब मूल्य लेकर रहेगा.

दो दौर की वार्ता रही बेनतीजा: दिनभर चली गहमागहमी के बीच प्रशासन और किसानों के बीच दो बार वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. तहसीलदार और मंडी सचिव ने किसानों को आश्वासन देने की कोशिश की कि उनकी मांगें सरकार तक पहुंचा दी जाएंगी, लेकिन किसानों ने कहा कि अब आश्वासन नहीं, उन्हें कार्रवाई चाहिए. असफल वार्ता के बाद किसानों ने ऐलान किया कि जब तक धान का भाव 3200 रुपये तय नहीं होगा, तब तक मंडी में कोई किसान अपनी उपज नहीं बेचेगा. इस बीच तीसरे दौर की वार्ता में किसान धान तुलाई पर सहमत हो गए
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किसान संगठन से हुई वार्ता में ये हुए निर्णय:
- किसानों के कृषि जिंसों की तोल में ज्यादा अंतर नहीं आएगा.
- ऑक्शन प्लेटफॉर्म खाली करवा दिए जाएंगे.
- प्रवेश पत्र चालू हैं, सभी किसान प्रवेश पत्र लेकर ही मंडी में प्रवेश करेंगे.
- भाव में फर्क होने पर आढ़तीया संघ, किसान, व्यापारी एवं मंडी समिति का एक प्रतिनिधि उचित निर्णय करेगा.
- वर्तमान में लगे सीसीटीवी कैमरों को शीघ्र सही करवाया जाएगा. नवीन कैमरों के लिए विभाग से बजट प्राप्त कर लिया गया है, शीघ्र ही टेंडर कार्यवाही कर लगवा दिए जाएंगे.
- मंडी में चोरी की वारदात को रोकने के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी.
- इन मुद्दों पर किसानों, व्यापारियों, आढ़तियों की सहमति पर 4 नवंबर से पूर्व की तरह मंडी में क्रय-विक्रय कार्य करने की सहमति हुई.
मंडी स्तर की सभी मांगें मानी: मंडी सचिव क्रांति कुमार मीणा का कहना था कि धान के भाव 3200 रुपए करने सहित अन्य मांगों को लेकर किसान नेताओं के साथ दिन की दो वार्ताएं विफल रहीं, लेकिन शाम को तीसरे दौर की वार्ता में धान के भाव को छोड़कर अन्य सभी किसानों की मांगों पर सहमति बन गई है. जहां तक धान का भाव 3200 करने की बात है, यह हमारे स्तर का मामला नहीं है. कल से मंडी में कामकाज शुरू होगा.

