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बूंदी में नहरी पानी की मांग को लेकर गुडला टोल पर किसानों का महापड़ाव, रात भर डटे रहे काश्तकार

सीएडी और प्रशासनिक अधिकारियों की किसानों से वार्ता बेनतीजा रही.

Farmers in a massive protest at Gudla toll
गुडला टोल पर महापड़ाव में किसान (ETV Bharat Bundi)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : July 1, 2026 at 1:40 PM IST

3 Min Read
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बूंदी: सूखती धान की फसल बचाने की जद्दोजहद अब सड़क से प्रशासन तक पहुंच गई है. नहरी पानी की मांग को लेकर केशोरायपाटन क्षेत्र के किसानों ने मंगलवार रात गुडला टोल प्लाजा पर महापड़ाव डाला. अपनी फसल बचाने का संकल्प लिए किसान पूरी रात खुले आसमान तले डटे रहे. प्रशासन से तत्काल नहरों में पानी छोड़ने की मांग करते रहे. देर रात सीएडी विभाग और प्रशासनिक अधिकारी वार्ता के लिए मौके पर पहुंचे, लेकिन किसान बिना ठोस निर्णय के पीछे हटने को तैयार नहीं हुए.

किसानों का कहना था, धान की फसल सबसे अहम स्थिति में है. शीघ्र नहरी पानी नहीं मिला तो हजारों बीघा फसल सूखकर बर्बाद हो जाएगी. ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा. इसी चिंता को लेकर क्षेत्रभर के किसान एकजुट होकर गुडला टोल पर धरने पर बैठ गए. केशोरायपाटन शुगर मिल संयुक्त किसान समन्वय समिति के प्रतिनिधि नवीन शृंगी ने कहा कि किसानों ने अपनी फसल बचाने की अंतिम उम्मीद के तौर पर यह महापड़ाव शुरू किया. धान की फसल पानी के अभाव में सूख रही है. प्रशासन को कई बार स्थिति से अवगत कराया, लेकिन अब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया.

गुडला टोल पर महापड़ाव में किसान (ETV Bharat Bundi)

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किसान नेता गिर्राज गौतम ने कहा कि नहरी पानी पर किसानों का पहला अधिकार है, लेकिन आज खेतों में धान की फसल सूख रही है. प्रशासन मूकदर्शक बना है. किसानों ने लगभग एक माह पहले ही प्रशासन को संभावित संकट से अवगत करा दिया था. इसके बावजूद समय रहते कोई व्यवस्था नहीं की गई. पिछले तीन वर्षों से किसानों को हर बार नहरी पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. आंदोलन के बाद ही पानी छोड़ा जाता है. तब ही फसल बच पाती है. पिछले वर्ष एक जुलाई तक किसानों को नहर का पानी उपलब्ध करा दिया था, लेकिन इस बार अनावश्यक देरी कर किसानों को परेशान किया जा रहा है. यही स्थिति रही तो धान की फसल को भारी नुकसान होगा. गौतम ने चेताया कि यदि वार्ता के बाद भी सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो किसानों को मजबूरन आंदोलन को और व्यापक रूप देना पड़ेगा.

आंदोलन तेज करने की चेतावनी: देर रात उपखंड प्रशासन ने किसानों से वार्ता की. अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को कोटा में संभागीय आयुक्त सहित शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है. इसमें नहरी पानी छोड़ने के मुद्दे पर निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा. प्रशासन की ओर से सकारात्मक समाधान का भरोसा दिए जाने के बाद किसानों ने अंतिम निर्णय बुधवार की वार्ता के परिणाम पर छोड़ दिया. महापड़ाव के दौरान किसान नेताओं ने एकसुर में कहा कि यदि समय रहते नहरी पानी नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा. धरने को किसान नेता भंवर लाल चौधरी, देव किशन मीणा, हरीशंकर नागर, सरपंच मोनू मीणा आदि ने संबोधित किया.

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