भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ किसानों का बिगुल, 19 मार्च को दिल्ली कूच का ऐलान
जींद में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसान एकजुट हो गए हैं. एमएसपी गारंटी कानून लागू करने की मांग तेज की.

Published : March 2, 2026 at 10:35 AM IST
जींद: जींद की जाट धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय किसान एकता (सिद्धपुर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसानों के भविष्य के लिए “डेथ वारंट” करार दिया. किसान जागृति यात्रा के तहत पहुंचे डल्लेवाल का स्थानीय किसानों ने फूलमालाओं से स्वागत कर स्मृति चिन्ह भेंट किया. उन्होंने कहा कि, "देशभर के किसानों को एकजुट होकर इस समझौते का विरोध करना होगा, अन्यथा भारतीय कृषि व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है."
कर्ज और घाटे का बढ़ता बोझ: डल्लेवाल ने कहा कि, "वर्तमान में देश के किसानों पर 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है. यदि किसानों को उनकी फसलों का वाजिब दाम मिलता तो उनके पास करीब 35 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती थी.पिछले 25 वर्षों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर फसल खरीद के कारण किसानों को 111 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है. यह स्थिति सरकारों की नीतिगत विफलता को दर्शाती है."
एमएसपी गारंटी कानून की मांग तेज: सभा में डल्लेवाल ने स्पष्ट कहा कि, "किसानों की लूट रोकने के लिए एमएसपी गारंटी कानून लागू करना अनिवार्य है. सरकारें किसानों के प्रति झूठी हमदर्दी दिखाकर केवल वोट बटोरती रही हैं. अब समय आ गया है कि किसान अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करें. उन्होंने घोषणा की कि 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में विशाल किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर के किसान अपनी मांगों को लेकर जुटेंगे."
अमेरिकी उपज से भारतीय बाजार पर खतरा: भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष अभिमन्यु कोहाड़ ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिका के किसानों को दी जाने वाली भारी सब्सिडी के बावजूद उनकी उपज को भारतीय बाजार में बेचने के लिए समझौता कर चुकी है. उन्होंने कहा कि, "यदि अमेरिकी उत्पाद बड़े पैमाने पर भारत आए, तो भारतीय किसानों की फसल की खरीद पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और बाजार व्यवस्था चरमरा सकती है."
दिल्ली पहुंचने का आह्वान और गिरफ्तारी की चेतावनी: किसान नेताओं ने आह्वान किया कि 19 मार्च को अधिक से अधिक संख्या में किसान दिल्ली पहुंचें. यदि प्रशासन उन्हें रोकता है तो शांतिपूर्ण तरीके से गिरफ्तारियां देने के लिए भी तैयार रहें. किसान जागृति यात्रा गांव-गांव जाकर किसानों को संगठित और जागरूक करने का काम कर रही है. कार्यक्रम में कई किसान नेता मौजूद रहे और अंत में यात्रा नारनौंद के लिए रवाना हो गई.
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