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खाद की कमी के खिलाफ किसानों का अनोखा प्रदर्शन, गधों को खिलाया गुलाब जामुन, यूरिया को दी 'श्रद्धांजलि'

उदयपुर में यूरिया खाद की भारी कमी से परेशान किसानों ने गधों को माला पहनाकर और खाद की बोरी को श्रद्धांजलि देकर विरोध किया.

गधे को खिलाया गुलाब जामुन
गधे को खिलाया गुलाब जामुन (ETV Bharat Udaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 5, 2026 at 3:20 PM IST

3 Min Read
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उदयपुर: प्रदेश के कई हिस्सों में रबी सीजन के दौरान यूरिया खाद की भारी कमी से किसान परेशान हैं. खाद नहीं मिलने से फसलों पर बुरा असर पड़ रहा है और उत्पादन घटने का खतरा मंडरा रहा है. कई जिलों में खाद दुकानों पर सुबह से लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी किसानों को जरूरत भर की यूरिया नहीं मिल पा रही.

अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन: इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को उदयपुर में मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने कृषि विभाग कार्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. यह प्रदर्शन अपने अनोखे अंदाज के कारण खासा चर्चा में रहा. किसानों ने गधों को माला पहनाई और उन्हें गुलाब जामुन खिलाकर सरकार की नीतियों पर तीखा व्यंग्य किया. साथ ही यूरिया खाद की बोरी का चित्र बनाकर उस पर फूल चढ़ाए और श्रद्धांजलि दी, जैसे खाद की 'मृत्यु' हो गई हो.

खाद की कमी से परेशान किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया (ETV Bharat Udaipur)

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कालाबाजारी के आरोप: किसान नेता मदनलाल डांगी ने बताया कि यूरिया की कमी से फसलों को सीधा नुकसान हो रहा है. समय पर खाद न मिलने से उत्पादन कम होने का डर है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. किसानों ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर यूरिया की कालाबाजारी जोरों पर है और ऊंचे दामों पर खाद बेची जा रही है, लेकिन प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा.

आंदोलन तेज करने की चेतावनी: किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर जल्द यूरिया की नियमित और पर्याप्त आपूर्ति नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही मौसम की मार और बढ़ती लागत झेल रहा है, ऐसे में खाद संकट ने उसकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं. सरकार को जमीनी हकीकत समझकर तुरंत समाधान निकालना चाहिए.

दूसरी ओर, कृषि विभाग ने मामले पर सफाई दी है. विभाग के एआरओ शिवदयाल मीणा ने कहा कि जिले में फिलहाल खाद की कोई गंभीर कमी नहीं है. स्टॉक आते ही किसानों को आपूर्ति की जा रही है. शिकायत मिलने पर मौके पर जांच करवाई जा रही है और कालाबाजारी पर कार्रवाई हो रही है. हालांकि, किसानों का कहना है कि कागजों पर स्थिति सामान्य दिखाई जा रही है, लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं.

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