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कड़ाके की ठंड से फसल भी हो रहे बर्बाद, किसानों के छूट रहे पसीने

लातेहार में कड़ाके की ठंड से किसान अपने फसलों को लेकर चिंतित हैं. पाला से बचाव के लिए दवा छिड़काव की मांग की है.

FARMERS OF LATEHAR
फसल को देखते किसान (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 7, 2026 at 4:59 PM IST

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लातेहारः जिले में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है. इससे आम जन जीवन के साथ-साथ फसलों को भी भारी नुकसान हो रहा है. दलहन, तिलहन के अलावा आलू और टमाटर आदि सब्जियों के खराब होने के कारण किसानों के पसीने छूटने लगे हैं. इन फसलों को नुकसान होने से किसान सीधे तौर पर प्रभावित होंगे.

दरअसल लातेहार जिले में पिछले कुछ दिनों से रिकॉर्ड तोड़ ठंड पड़ रही है. यहां का न्यूनतम तापमान 3 डिग्री तक पहुंच जा रहा है. इस स्थिति में खेतों में लगाए गए दलहन, तिलहन और सब्जियों को बड़ा नुकसान हो रहा है. महत्वपूर्ण बात यह है कि लातेहार जिले में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि में दलहन और तिलहन की खेती की जाती है. इसके अलावा बड़े पैमाने पर सब्जियों की भी खेती होती है.

किसानों से बात करते ईटीवी भारत संवाददाता राजीव कुमार (Etv Bharat)

दवा छिड़काव की मांग

दलहन- तिलहन के अलावा सब्जियों की खेती करने से किसानों को काफी अच्छा मुनाफा होता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ बनी रहती है. परंतु इस बार मौसम की मार के कारण किसानों को नुकसान होने की संभावना बन आई है. स्थानीय किसान सीतामुनि उरांव, विष्णु देव सिंह, भंवर सिंह आदि किसानों ने बताया कि अत्यधिक ठंड पड़ने के कारण फसलों का ग्रोथ काफी कम हो रहा है. किसानों ने कहा कि सब्जियों अथवा सरसों का बीमा भी नहीं होता है. इस कारण नुकसान के बाद किसानों को सरकारी मदद भी नहीं मिल पाती है. किसानों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकार के नुकसान से बचाव के लिए दवा छिड़काव की व्यवस्था की जाए.

सिंचाई ही इस समस्या का एकमात्र समाधान

इस संबंध में लातेहार जिला कृषि पदाधिकारी नेहा निश्चल ने बताया कि वर्तमान में जिस प्रकार की ठंड पड़ रही है, उससे सबसे अधिक प्रभावित दलहन और तिलहन की फसलें हो रही हैं. उन्होंने कहा कि अधिक ठंड पड़ने के कारण फसलों का ग्रोथ रुक जाता है, जिससे उत्पादन भी कम होता है. उन्होंने बताया कि इस समस्या से बचाव का एकमात्र उपाय लगातार फसलों की सिंचाई करना ही है. फसलों की लगातार सिंचाई करने से ठंड का प्रकोप फसलों पर नहीं होता है. उन्होंने कहा कि यदि किसी किसान को ज्यादा नुकसान हो गया हो तो वह केसीसी के माध्यम से सहयोग ले सकते हैं.

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