भरतपुर में लैंड पूलिंग योजना के खिलाफ किसानों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, बोले, 'काला कानून वापस लो'
किसानों ने सरकार से मांग की है कि एलपीएस योजना को वापस लिया जाए. किसानों की कृषि भूमि तथा अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए.

Published : May 26, 2026 at 3:44 PM IST
भरतपुर: भरतपुर विकास प्राधिकरण (बीडीए) की प्रस्तावित लैंड पूलिंग योजना के खिलाफ किसानों का विरोध अब खुलकर सड़कों पर उतर आया है. मंगलवार को शहर से जुड़े करीब 10 गांवों के किसान लैंड पूलिंग योजना विरोधी किसान मोर्चा के बैनर तले जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए एलपीएस योजना को काला कानून बताया. किसानों ने आरोप लगाया कि योजना के जरिए उनकी पुश्तैनी, उपजाऊ और सिंचित जमीन छीनी जा रही है, जबकि बदले में उन्हें न तो उचित मुआवजा मिलेगा और न ही राहत.
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने योजना वापस नहीं ली, तो आंदोलन को गांव-गांव तक फैलाया जाएगा. ज्ञापन में रामनगर, खेड़ा, कंजौली, सुरीना, मंडोली, नगला सीला सहित करीब 10 गांवों के लगभग 1000 प्रभावित खातेदार किसानों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है. किसानों का कहना है कि प्रस्तावित योजना के तहत उनकी उपजाऊ, सिंचित और बहुफसली कृषि भूमि को शामिल किया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका और पुश्तैनी खेती पर संकट खड़ा हो जाएगा.

पूर्व पार्षद (नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम) इंद्रजीत भारद्वाज ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि आज भरतपुर का किसान अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए सड़क पर उतर आया है और सरकार को इसे चेतावनी के रूप में लेना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि बीडीए पहले ही स्कीम नंबर-13, एसपीजेड, चंबल योजना, मेडिकल कॉलेज और वाटर वर्क्स जैसी योजनाओं में किसानों की जमीन ले चुका है और अब बची हुई कृषि भूमि को भी एलपीएस योजना में शामिल किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि बीडीए किसानों से 55 प्रतिशत जमीन बिना मुआवजे के ले रहा है, जबकि लौटाई जाने वाली 45 प्रतिशत जमीन पर भी कन्वर्जन चार्ज, सड़क निर्माण, सीवरेज, पानी और बिजली लाइन का खर्च किसानों से ही वसूला जाएगा. भारद्वाज ने आरोप लगाया कि बीडीए किसानों को जमीन का मालिक नहीं बल्कि किराएदार बनाने की कोशिश कर रहा है.
पूर्व सांसद पंडित रामकिशन ने कहा कि सरकार को किसानों की समस्या समझकर उसका समाधान करना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री प्रदेशभर में समस्याओं के समाधान के लिए दौरे कर रहे हैं, लेकिन भरतपुर में किसान उनसे मिलना चाहते थे, इसके बावजूद उन्हें समय नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि यदि सीएम को गांव-गांव जाकर समस्याएं सुननी पड़ रही हैं, तो इसका मतलब प्रशासन पूरी तरह असफल हो चुका है. उन्होंने कहा कि केवल समाधान करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि समस्याओं का समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए.

