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लातेहार में आम की बागवानी से किसान हुआ मालामाल! 15 साल पहले बंजर भूमि से शुरू हुई सफलता की कहानी

लातेहार सदर प्रखंड के मोंगर गांव के एक किसान ने 15 साल पहले आम की बागवानी की शुरूआत की थी. राजीव कुमार की रिपोर्ट.

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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : July 5, 2026 at 8:10 PM IST

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लातेहार: कहा जाता है कि पेड़-पौधे हमेशा ही मानव के लिए लाभदायक होते हैं. लातेहार सदर प्रखंड के मोंगर गांव के रहने वाले पूर्व मुखिया राजेंद्र प्रसाद और उनके परिवारजनों के लिए पेड़-पौधे आर्थिक समृद्धि के साधन बन गए हैं. दरअसल, पूर्व मुखिया राजेंद्र प्रसाद ने लगभग 15 साल पहले अपनी बंजर पड़ी जमीन में आम और दूसरे फलदार पौधों की बागवानी लगाई थी, आज बागवानी से उन्हें हर साल लाखों रुपए की कमाई हो रही है.

पूर्व मुखिया राजेंद्र प्रसाद के पास जमीन की कमी नहीं थीं. वह काफी अच्छे किसान भी हैं. उनके पास कुछ ऐसी भी जमीन थीं, जिस पर धान, गेहूं की खेती नहीं हो पाती थी. लगभग 15 साल पहले उन्होंने अपनी बंजर पड़ी लगभग 7 एकड़ भूमि में आम, आंवला, अमरूद की बागवानी शुरूआत की.

लातेहार के किसान ने आम की बागवानी से बदली किस्मत (Etv Bharat)

7 एकड़ जमीन में 3 लाख तक की आमदनी

इसके अलावा कुछ इमारती पौधे भी लगाए गए. उस समय बागवानी का प्रचलन भी इलाके में काफी कम था. थोड़ी मेहनत के बाद उनके बागान में आम और उन फलदार पेड़ों में फल आने लगे. धीरे-धीरे उत्पादन भी बढ़ने लगा और इसकी बिक्री बाजार में होने लगी. वर्तमान में हर साल कम से कम 3 लाख रुपए के आम, बाजार में बेच देते हैं. पूर्व मुखिया राजेंद्र प्रसाद के बेटे सच्चिदानंद प्रसाद बताते हैं कि लगभग 7 एकड़ जमीन में उनके पिताजी ने बागवानी लगाई थीं. वर्तमान समय में बागवानी में आम का बंपर उत्पादन हुआ है.

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बागवानी में आम के अलग-अलग किस्म के पेड़

सच्चिदानंद प्रसाद ने बताया कि उनके बागवानी में अलग-अलग किस्म के आम के पेड़ लगे हैं. इनमें कुछ ऐसे आम हैं, जो सीजन के शुरुआत में ही पककर तैयार हो जाते हैं जबकि कुछ ऐसे आम भी हैं, जो सीजन ऑफ होने के बाद ही पकते हैं. दोनों ही स्थिति में बाजार में आम की कीमत अपेक्षाकृत अधिक मिल जाती है. इसके अलावा आंवला और अमरूद से भी अच्छी आमदनी हो जाती है. यह आर्थिक आय का एक अतिरिक्त साधन भी बन गया है.

कई लोगों को मिली सीख, जनप्रतिनिधि भी करते हैं तारीफ

बता दें कि क्षेत्र में बागवानी का पहला प्रचलन था, जब बागवानी से उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी तो इनसे सीख लेकर कई दूसरे किसानों ने भी अपनी बंजर जमीन में आम की बागवानी की शुरूआत की. इधर राजेंद्र प्रसाद के इस कार्य की तारीफ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी करते हैं. पंचायत के पूर्व पंचायत समिति सदस्य पिंटू रजक ने बताया कि लगभग 15 साल पहले पूर्व मुखिया राजेंद्र प्रसाद ने बागवानी की शुरूआत थी. इस बागवानी से उन्हें अच्छी आमदनी भी हो जाती है. इसके अलावा बागवानी से पर्यावरण भी शुद्ध रहता है. उन्होंने कहा कि इनसे सीखकर आसपास के कई अन्य ग्रामीणों ने भी अपनी जमीन में बागवानी शुरू की और आज वे भी आम बेचकर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं.

mango Gardening in Mongar Village
आम के बागान में एक कुआं (Etv Bharat)

कच्चे आम की मांग में बढ़ोतरी

इधर, राजेंद्र प्रसाद की बागवानी के चर्चे सिर्फ उनके गांव तक सीमित नहीं है बल्कि आसपास के दूसरे गांव और जिला मुख्यालय में भी हैं. लातेहार जिला मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित कई लोग कच्चे आम के लिए आज भी उनके बागान पहुंचते हैं.

एक निवासी अमित कुमार ने बताया कि वह अक्सर लोगों से राजेंद्र प्रसाद की बागवानी की चर्चा सुनते थे. आज उन्हें कच्चे आम की जरूरत थीं, तो वह यहां पहुंच गए. अमित कुमार ने बताया कि राजेंद्र प्रसाद की बागवानी वाकई अनोखी है. अन्य लोगों को भी इनसे सीख लेनी चाहिए.

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