ETV Bharat / state

कुरुक्षेत्र में 23 फरवरी से किसानों का 3 दिवसीय महापड़ाव, सीएम आवास का करेंगे घेराव

कुरुक्षेत्र में किसानों के 3 दिवसीय महापड़ाव को लेकर किसान संगठन पूरी तरह से तैयार हैं. राशन-पानी के साथ आंदोलन के लिए जुटेंगे.

farmers Will Protest In Kurukshetra
किसानों का 3 दिवसीय महापड़ाव (Etv Bharat)
author img

By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 22, 2026 at 2:36 PM IST

2 Min Read
Choose ETV Bharat

कुरुक्षेत्रः हरियाणा की 11 किसान जत्थेबंदियों के बैनर तले किसानों ने 23, 24 और 25 फरवरी को कुरुक्षेत्र स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर तीन दिवसीय महापड़ाव करने का ऐलान किया है. किसान संगठनों ने कहा है कि "वे अपनी लंबित मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करेंगे."

कई मांगों को लेकर किसान कर रहे हैं आंदोलनः किसान नेताओं ने बताया कि आंदोलन के दौरान अधूरी रह गई मांगों, बुजुर्गों की पेंशन बहाली, बाढ़ के दौरान खराब हुई फसलों के मुआवजे और धान घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ये महापड़ाव आयोजित किया जा रहा है.

23 फरवरी से किसानों का 3 दिवसीय महापड़ाव (Etv Bharat)

23 को कुरुक्षेत्र के ताऊ देवीलाल पार्क में एकत्रित होंगे किसानः किसान नेता संजू नम्बरदार ने आरोप लगाया कि "समय रहते प्रशासन ने शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते किसानों को सड़क पर उतरना पड़ रहा है." किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि "सरकार को 22 तारीख से पहले मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला. संगठनों ने प्रदेश भर के किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे 23 फरवरी को सुबह 10 बजे कुरुक्षेत्र के ताऊ देवीलाल पार्क में जमा हों और तीन दिन के लिए आवश्यक राशन-पानी साथ लेकर आएं."

पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा आंदोलन: किसान नेता संजीव आलमपुर ने कहा कि "आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया जाएगा." हालांकि उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि "यदि प्रशासन की ओर से प्रदर्शन रोकने या दबाव बनाने की कोशिश की गई तो किसान संगठन आगे की रणनीति पर विचार करेंगे."

केंद्र और राज्य के फैसलों का सीधा असर किसानों पर पड़ेगाः किसान नेता दिलबाग सिंह ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाया जायेगा. किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए." उन्होंने दावा किया कि "कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कई फैसलों का असर सीधे किसानों पर पड़ रहा है. किसान संगठनों ने दोहराया कि यह आंदोलन किसानों के अधिकारों और न्यायपूर्ण मांगों के समर्थन में है और इसे व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है."

ये भी पढ़ें-जींद में भाकियू का प्रदर्शन, धान घोटाले में निष्पक्ष जांच की मांग, डीसी को सौंपा मांगपत्र, ट्रेड डील का भी किया विरोध