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वामन टिकरिहा डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न के लिए चयनित, बलौदाबाजार जिले से पहली बार राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयन

वामन टिकरिहा ने खेती को केवल आजीविका नहीं बल्कि ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बनाया. कई किसान और छात्र सीखने आते हैं.

Vaman Tikriha Selected for Krishak Ratna Award
बलौदाबाजार जिले से पहली बार राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयन (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : November 2, 2025 at 6:28 PM IST

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Updated : November 2, 2025 at 10:44 PM IST

8 Min Read
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चंद्रकांत वर्मा की रिपोर्ट

बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के किसान आज न केवल अन्नदाता हैं बल्कि नवाचार और प्राकृतिक खेती के प्रतीक भी बन रहे हैं. इसी का एक उदाहरण हैं, बलौदाबाजार जिले के मुसुवाडीह गांव के प्रगतिशील किसान वामन टिकरिहा. इनका नाम राज्य स्तरीय डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार के लिए चयन हुआ है. यह पहली बार है जब बलौदाबाजार जिले से किसी किसान को प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया है. ETV भारत ने उनसे खास बातचीत की और जाना उनकी उपलब्धि और चुनौतियों के बारे में-

वामन टिकरिहा डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न के लिए चयनित (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

क्यों मिला अवॉर्ड: कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वामन टिकरिहा को यह पुरस्कार उनकी बहुआयामी खेती, जैविक नवाचार, उद्यानिकी और पशुपालन में योगदान के लिए दिया जा रहा है. वामन टिकरिहा पिछले दो दशकों से खेती के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनके पास कुल 18.5 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें वे खरीफ और रबी दोनों मौसम में उत्पादन करते हैं.

हर मौसम में उत्पादन का मॉडल: खरीफ सीजन में उन्होंने 9.496 हेक्टेयर में सुगंधित धान, देवभोग, जंवाफूल, एचएमटी, चिंटू और अन्य पारंपरिक किस्मों की खेती की है. वहीं रबी में गेहूं 5 हेक्टेयर, चना 1 हेक्टेयर, सरसों 1 हेक्टेयर और अलसी 2 हेक्टेयर में उगाई है. उनकी खेती का पैटर्न पारंपरिक और आधुनिक तकनीक का संतुलित मिश्रण माना जाता है. वे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर न रहकर गौ आधारित जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा क्षमता बढ़ी है और उत्पादन लागत में कमी आई है.

Farmer Vaman Tikriha Story
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में वामन टिकरिहा को कृषक रत्न पुरुस्कार मिलेगा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

ETV भारत की टीम पहुंची मुसवाडीह गांव: बलौदाबाजार जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित मुसवाडीह गांव पहुंचकर हमने वामन टिकरिहा से विशेष बातचीत की. खेतों के बीच बने उनके घर में जब हम पहुंचे, तो वामन टिकरिहा अपनी पत्नी के साथ अमरूद के बगीचे में काम कर रहे थे. चेहरे पर हल्की थकान थी, लेकिन बातों में आत्मविश्वास झलक रहा था.

प्राकृतिक खेती ही भविष्य है: ETV भारत से एक्सक्लूसिव बातचीत में वामन टिकरिहा ने कहा कि, यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी किसानों का है जो मेहनत से मिट्टी में सोना उगाते हैं. मैं चाहता हूं कि हर किसान आधुनिक खेती की ओर बढ़े, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ा रहे. प्राकृतिक खेती ही भविष्य है. साल 1990 से खेती कर रहे वामन ने बताया कि साल 2001 से प्रयास कर रहे हैं लेकिन 25 साल के संघर्ष के बाद फाइनली अब उनको यह पुरुस्कार मिला.

Farmer Vaman Tikriha Story
पुरुस्कार के लिए चयनित होने पर परिवार के साथ जिले के कृषि समुदाय में खुशी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

खुद कर रहे नवाचार, सरकार से भी मांग: खेती के साथ वामन टिकरिहा ने 1 हेक्टेयर में उद्यानिकी फसलों की व्यावसायिक खेती शुरू की है. वे अमरूद, नींबू, अदरक, जिमीकंद, आम, बेर और करौंदा जैसी फसलों को वैज्ञानिक पद्धति से उगाते हैं. विशेष बात यह है कि उन्होंने बेर की 8 उन्नतशील किस्में, अमरूद की 5 किस्में और करौंदा की 2 किस्में लगाई हैं. उन्होंने सरकार से उम्मीद जताई कि ग्रामीण इलाकों में कृषि अनुसंधान केंद्रों की पहुंच और प्रशिक्षण बढ़ाया जाए, ताकि किसान नई तकनीक से सीधे जुड़ सकें.

उद्यानिकी फसल पर भी फोकस: वामन टिकरिहा का कहना है कि पारंपरिक धान और गेहूं के साथ अगर किसान उद्यानिकी फसलों को अपनाएं तो सालभर आमदनी बनी रहती है और जमीन का उपयोग बेहतर होता है. उनकी बागवानी का मॉडल अब आसपास के किसान भी देखने आते हैं. कृषि विभाग ने इसे इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल के रूप में उदाहरण बताया है.

मछली पालन और पशुपालन से डबल फायदा: वामन टिकरिहा के खेतों में 1 हेक्टेयर का खुद का तालाब है, जिसमें वे रोहू, कतला और मृगल जैसी मछलियों का पालन करते हैं. मछली पालन से उन्हें सालाना 2 लाख रुपये से अधिक की आय होती है. इसके साथ वे 5 गाय, 10 बकरी और 10 बतखों का पालन भी करते हैं. पशुपालन से दूसरा फायदा यह है कि, ये उनके खेतों के लिए जैविक खाद का स्रोत है. गौमूत्र, गोबर और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से वे जीवामृत और घनजीवामृत तैयार करते हैं, जो खेती के लिए उपयोग में लाए जाते हैं.

अवॉर्ड मिलने पर परिवार में भी खुशी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

अलसी से कपड़ा बना रहे: वामन टिकरिहा की एक और खास पहल ने उन्हें बाकी किसानों से अलग पहचान दी है. वे न केवल अलसी की खेती करते हैं, बल्कि उसके डंठलों से लिनेन रेशा निकालकर कपड़ा निर्माण के लिए जिला बेमेतरा में विक्रय भी करते हैं. अलसी उत्पादन के उप-उत्पादों का उपयोग कर जीरो वेस्ट फार्मिंग मॉडल को बढ़ावा देते हैं.

खेती में सबसे बड़ा लाभ तब है जब किसान हर हिस्से का उपयोग करना सीखे. बीज, पत्ती, तना, और मिट्टी, सबकी भूमिका होती है. बस समझदारी से उसका उपयोग करना चाहिए.- वामन टिकरिहा, किसान

मां लक्ष्मी जैविक कृषक समूह से जुड़ाव: वामन टिकरिहा, जैविक खेती मिशन के तहत बने मां लक्ष्मी जैविक कृषक समूह से जुड़े हैं. इस समूह के माध्यम से वे गौ आधारित खाद, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्नास्त्र जैसे प्राकृतिक उत्पाद घर पर ही बनाते हैं. इन प्राकृतिक खादों और कीटनाशकों से खेती की लागत में 40% तक कमी आई है.

Farmer Vaman Tikriha
बलौदाबाजार जिले से पहली बार राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयन (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई अवॉर्ड मिले: कृषक वामन टिकरिहा ने न केवल अपने जिले में बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई है. वे रायपुर में आयोजित फल और पुष्प प्रदर्शनी में लगातार भाग लेते हैं. उन्होंने बेर उत्पादन में प्रथम और द्वितीय पुरस्कार और मिर्ची उत्पादन में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया है. राष्ट्रीय आम महोत्सव, रायपुर में वे अपने आम और आम से बने उत्पादों की प्रदर्शनी भी करते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र और जिला उद्यानिकी विभाग के अधिकारी उनके फार्म को डेमो मॉडल फार्म के रूप में पेश करते हैं. कई कृषि विद्यार्थी उनके खेत में जाकर इंटर्नशिप और प्रशिक्षण भी करते हैं.

Vaman Tikriha Selected for Krishak Ratna Award
राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई अवॉर्ड मिले (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

क्या है डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार: यह राज्य का सर्वोच्च कृषि सम्मान है, जो हर साल उन किसानों को दिया जाता है जिन्होंने खेती, नवाचार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान दिया हो. पुरस्कार में प्रशस्ति पत्र, शॉल, श्रीफल और 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है. वामन टिकरिहा का चयन कृषि विभाग की राज्य स्तरीय समिति की ओर से किया गया.

Vaman Tikriha Selected for Krishak Ratna Award
बलौदाबाजार के किसान वामन टिकरिहा और उनका परिवार (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

किसान समाज और परिवार में उत्साह: कृषक वामन टिकरिहा के चयन की खबर जैसे ही मिली परिवार के साथ कृषि समुदाय में उत्साह फैल गया. आसपास के किसानों ने इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया.

शुरुआत में बहुत कठिन समय था. कभी-कभी हालात ऐसे भी आए जब उधार लेकर बीज बोना पड़ता था. उन्होंने हार नहीं मानी, जब उन्हें पुरस्कार मिला है तो लगता है कि भगवान ने हमारी मेहनत देख ली.- माधुरी टिकरिहा, वामन टिकरिहा की पत्नी

पापा कहते हैं कि खेती पढ़ाई से अलग नहीं है. दोनों में समझ जरूरी है. जब खेत में नई तकनीक अपनाते हैं, तो मुझे भी बताते हैं कि इसे विज्ञान की तरह समझो. उन्हें अवॉर्ड मिलने से मुझे बहुत ख़ुशी हो रही हैं.- बेटा निखिल टिकरिहा

यह सम्मान केवल वामन टिकरिहा का नहीं बल्कि पूरे बलौदाबाजार जिले का है. उन्होंने जिस लगन और सादगी से खेती को आत्मनिर्भर मॉडल बनाया है, वह प्रेरणादायक है.- दीपक कुमार नायक, कृषि विभाग के उपसंचालक

वामन टिकरिहा का उदाहरण आने वाले समय में जिले के युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करेगा- जिला पंचायत सीईओ दिव्या अग्रवाल

Farmer Vaman Tikriha Story
पुरुस्कार के लिए चयनित होने पर परिवार के साथ जिले के कृषि समुदाय में खुशी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

वामन टिकरिहा की कहानी यह साबित करती है कि सीमित संसाधनों में भी अगर किसान अपने ज्ञान, परिश्रम और नवाचार पर विश्वास रखे तो सफलता तय है.

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Last Updated : November 2, 2025 at 10:44 PM IST