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फसलों को कीटों से बचाने के लिए खेत में लगाए ये सोलर लाइट, कीटनाशक की नहीं पड़ेगी जरूरत

हजारीबाग के किसान राजेंद्र टुडू ने अपने खेत में सोलर लाइट लगाई हैं. इससे उन्हें फसलों को कीटों से बचाने में मदद मिल रही है.

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ग्राफिक्स इमेज (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 7, 2026 at 11:52 AM IST

2 Min Read
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हजारीबाग: बदलते जमाने ने खेती का तरीका को बदल दिया है. किसान उन्नत तकनीक का प्रयोग खेती में कर रहे हैं. हजारीबाग के अति सुदूरवर्ती प्रखंड चुरचू के नगड़ी गांव में राजेंद्र टुडू प्रायोगिक तौर पर अपने खेत में एक ऐसा उपकरण लगाए हैं, जिससे उनके फसल की रक्षा हो रही है. कीट-फतिंगा उस उपकरण के कारण नष्ट हो रहे हैं. इस तकनीक से किसान के साथ-साथ उपभोक्ता को भी लाभ मिल रहा है.

सोलर लाइट से फसलों की होंगी सुरक्षा

हजारीबाग कृषि प्रधान क्षेत्र है. किसान सालों भर खेती करते हैं. किसान को सबसे अधिक नुकसान कीट-फतिंगा से होता है. जो उनके फसल को बर्बाद कर देता है. कीट से बचने के लिए किसान कीटनाशक का उपयोग करते हैं. जिससे फसल तो बच जाता है लेकिन वह फसल उपभोक्ता के लिए बेहद नुकसानदेह होता है.

संवाददाता गौरव प्रकाश की रिपोर्ट (Etv Bharat)

इसे देखते हुए चुरचू प्रखंड के नगड़ी गांव के प्रगतिशील किसान ने अपने खेत में उपकरण लगाया है, जो सोलर से चार्ज होता है. रात के समय उपकरण में पीली बत्ती जल उठती है. रोशनी के ठीक नीचे पानी भरा प्लेट लगा रहता है. जैसे ही कीट-फतिंगा लाइट की ओर आकर्षित होता हैं, वह पानी में डूब जाता है. जिससे कीट-फतिंगा मर जाता है. ऐसा होने से फसल सुरक्षित रह जाता है. क्षेत्र में काम करने वाला एफपीओ चुरचू नारी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ने राजेंद्र टुडू को यह उपकरण दिया है. एक एकड़ में 3 से 4 उपकरण लगाया गया हैं.

farmer Rajendra Tudu installed solar light in Farm to protect crops from pests In Hazaribag
खेत में लगाई गई सोलर लाइट (ETV BHARAT)

क्या कहते हैं किसान

राजेंद्र टुडू का कहना है कि उपकरण लगाने के बाद फसल सुरक्षित रह रहा है. इससे दो फायदा हो रहा है कि किसान जो कीटनाशक का उपयोग करते थे, वह पैसा भी बच रहा है. कीटनाशक उपयोग करने से किसान को स्वास्थ्य समस्या होता था, जो अब नहीं हो रहा है. इससे सबसे अधिक फायदा उपभोक्ता को हो रहा है, जो शुद्ध उत्पाद प्राप्त कर रहे हैं. राजेंद्र टुडू का यह प्रयोग सफल साबित हुआ है. अन्य किसान भी इसे अपने खेत में लगा सकते हैं, जिसे किसान को दोहरा लाभ मिलेगा और उपभोक्ता भी लाभान्वित होंगे.

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