मेरठ के इस किसान की हर तरफ चर्चा; 10 बीघे में उगाईं 6 से 8 किलो तक की फूलगोभी, बंपर पैदावार का बताया ये तरीका
मेरठ में लगी किसान प्रदर्शनी में सबके आकर्षण का केंद्र बने सुनील भड़ाना, दावा-कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : December 24, 2025 at 2:09 PM IST
|Updated : December 24, 2025 at 3:03 PM IST
मेरठ: वैसे तो मेरठ गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार चर्चा गोभी के लिए हो रही है. गोभी भी 6 से 8 किलो की. नरहेड़ा गांव के किसान सुनील भड़ाना परम्परागत खेती से हटकर फूलगोभी की खेती करते हैं. सुनील का दावा है कि उन्होंने बिना कीटनाशक का इस्तेमाल किए ये फूलगोभी उगाई है. दरअसल, मेरठ में किसान प्रदर्शनी लगी हुई है. इसी प्रदर्शनी में सुनील की उगाई फूलगोभी आकर्षण का केंद्र बनी है.
सुनील भड़ाना ने बताया कि उन्होंने इस बार दस बीघा में फूल गोभी की खेती की है. उन्होंने अपनी फसल में सर्दी सीजन में कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया है, बल्कि, गोबर की खाद से ही फसल तैयार की है. इस साल उनके खेत में गोभी की बंपर पैदावार हो रही है. तैयार फसल में कुछ गोभी का वजन तो 8 किलो तक है. मेरठ में किसान प्रदर्शनी इन दिनों लगी है. इस प्रदर्शनी में उनकी गोभी आकर्षण का केंद्र बिंदु बन गई है.
सुनील भड़ाना बताते हैं कि वह पहले परम्परागत गन्ना ही उगाते थे. पहले गन्ना की फसल को शुगर मिल में दे देते थे, फिर अपने ही गन्ने के भुगतान के लिए घर में बैठकर इंतजार करते रहते थे. लेकिन व्यवस्था बदली है और किसानों की गन्ने के भुगतान की स्थिति भी सुधर गई है. हालांकि, अब उन्हें सब्जी की खेती करना ही पसंद है.
90 से 100 दिन में तैयार हो जाती है गोभी: सुनील बताते हैं कि महज तीन से साढ़े तीन महीने की छोटी सी अवधि में गोभी की फसल तैयार हो जाती है. काफी अच्छी किस्म की गोभी उन्होंने उगाई है. फूलगोभी और आलू की ही खेती पर उनका फोकस रहता है. जैसे-जैसे ये गोभी अपना आकार लेती है, उसके पत्ते भी ऊपर से सुरक्षित करके ढके रहते हैं. इसका फायदा ये होता है कि जब इसे मंडी या बाजार में लेकर जाते हैं तो अधिक सुरक्षित रहती है.

काफी ज्यादा मुनाफा गोभी की फसल से होता: किसान सुनील ने बताया कि उद्यान विभाग के कर्मचारी भी गोभी को दोनों हाथ में उठाकर मुस्कुराते हुए कहते हैं कि वे बेहद उत्साहित है. उन्होंने पहले कभी इतनी बड़ी गोभी नहीं देखी. वर्तमान में मंडी में भाव कम है, लेकिन लगभग एक महीने पहले अच्छा भाव मिल रहा था. तब मंडी में उनकी गोभी 20 से 25 रुपये किलो के मूल्य पर थोक विक्रेता खरीद रहे थे. अब जो ताजा रेट है, वह मंडी में 5 रुपये प्रति किलोग्राम तक जा रहा है. गन्ने से काफी ज्यादा मुनाफा गोभी की फसल से होता है.
जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि मेरठ जिले में किसान फल-फूल अब उगाने में भी दिलचस्पी ले रहे हैं. उद्यान विभाग लगातार किसानों को फल-फूल उगाने के लिए प्रेरित करता है. किसान सुनील खेती के लिए अधिकांश गोबर की खाद का इस्तेमाल करते हैं. जिससे बड़े साइज के गोभी का उत्पादन हो रहा है. किसान की खेत में उद्यान विभाग की टीम ने जाकर भ्रमण भी किया है. जहां औसत गोभी से बड़ी साइज की गोभी हैं. वहीं, काफी ऐसे गोभी भी हैं, जिनका वजह 6 किलोग्राम, 7 किलोग्राम और 8 किलोग्राम तक है.

सर्दी में खतरा कम: जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि उद्यान विभाग के द्वारा भी सब्जी की खेती पर 50% सब्सिडी किसानों को दी जा रही है. उद्यान विभाग, पत्ता गोभी, फूलगोभी, लौकी, खीरा और हरी मिर्च पर अनुदान दे रहा है. सर्दी के सीजन में खासतौर से गोभी की फसल पर कोई पेस्टिसाइड इस्तेमाल नहीं होता, जिससे इसकी गुणवत्ता और क्वालिटी बेहतर रहती है. सर्दी का मौसम गोभी की फसल के लिए बहुत अच्छा रहता है. सर्दी में फसल तैयार करना आसान भी है और लागत भी कम आती है. मुनाफा भी अच्छा खासा हो जाता है. कीटनाशक का भी खतरा भी नहीं होता है.
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. विजय मलिक ने बताया कि फूलगोभी में भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता. ये फाइबर से भरपूर होती हैं. इसमें पाचन को सुधारने की तो क्षमता होती ही है, वजन घटाने में भी मददगार साबित होती है. ये हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होती है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बेहद ही उपयोगी साबित होती है. अगर अच्छी गुणवत्ता की गोभी से कैंसर व मधुमेह जैसी बीमारियों के जोखिम भी कम होता है.
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