खुद की पहचान बनाने की जिद ने रची सफलता की कहानी, संगीता ने किया तानों से सक्सेस तक का सफर तय, बदली कई महिलाओं की जिंदगी
सरस मेले में उत्तराखंड की संगीता वर्मा ने स्टॉल लगाया है. संगीता खुद तो आत्मनिर्भर है ही अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना रही है.

Published : December 30, 2025 at 11:54 AM IST
|Updated : December 30, 2025 at 1:06 PM IST
फरीदाबाद: फरीदाबाद में इन दिनों सरस मेला लगा हुआ है. मेले में कई स्टॉल लगे हैं, जहां स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अपने बनाए यूनिक प्रोडक्ट लेकर आई हैं. इन प्रोडक्ट में महिलाओं की मेहनत साफ नजर आ रही है. सरस मेले में लगे स्टॉल में बिक रहे प्रोडक्ट आम प्रोडक्ट से न सिर्फ अलग हैं बल्कि बेहतर भी हैं. मेले में लगे हर स्टॉल की अपनी एक अलग कहानी है.

मेले में उत्तराखंड की संगीता ने लगाया स्टॉल: वहीं, सरस मेले में उत्तराखंड के देहरादून से आई संगीता वर्मा ने भी अपना स्टॉल लगाया है. इनके स्टॉल में खास तरह के प्रोडक्ट हैं, जो लोगों को बेहद पसंद आ रहे हैं. दरअसल, संगीता फूल और जड़ी-बूटियों से धूप बनाती हैं. इसके अलावा गाय के गोबर और फूल से दीये बनाती हैं. साथ ही संगीता पहाड़ी दाल लेकर अपने स्टॉल में आई हैं, जो सेहत के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद है.
ऐसे की शुरुआत: ईटीवी भारत के संवाददाता ने सरस मेले में आई संगीता वर्मा से बातचीत की. बातचीत के दौरान संगीता वर्मा ने बताया कि, "मैं एक अच्छे परिवार से आती हूं. मेरे परिवार में किसी भी तरह से कोई समस्या नहीं है. लेकिन मैं कुछ करना चाह रही थी. मैं अपनी अलग पहचान बनाना चाहती थी. अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी. खास तौर पर उन महिलाओं के लिए जो गरीब हैं, जिन्हें एक वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता, उनके लिए कुछ करना चाहती थी. इसी सोच को लेकर मैं आगे बढ़ी और लगभग 6 साल पहले मैंने 5 हजार रुपए से इस बिजनेस की शुरुआत की."
मंदिरों से फूल इकट्ठा करना शुरू किया: संगीता अपने शुरुआती दौर के बारे में बताती हैं कि, "मैंने शुरुआत में सबसे पहले मंदिरों से फूल इकट्ठा करना शुरू किया. जड़ी-बूटी खरीदी. फिर हमने उसे मिलाकर धूप, अगरबत्ती बनाई. इसके बाद गाय के गोबर और फूल से हमने दीये भी बनाए और मार्केट में अपने प्रोडक्ट लेकर जाने लगी. इसके बाद लोगों को अपने प्रोडक्ट के बारे में मैंने बताया. इस दौरान मैंने अपने साथ कुछ महिलाओं को भी जोड़ा, जो काफी ज्यादा गरीब थीं और उन्हें एक समय का खाना भी नसीब नहीं हो रहा था."

लोगों ने दिए ताने: संगीता को लोगों के ताने भी सुनने पड़े. इस बारे में संगीता ने बताया कि, "जब शुरुआत में मैं प्रोडक्ट लेकर घर से बाहर जाती थी तो लोगों ने ताने भी दिए. लोग कहते थे कि तुम इतने अच्छे परिवार से आती हो, तुम्हें किस चीज की कमी है, फिर भी तुम यह क्यों कर रही हो. लेकिन मेरे अंदर खुद की पहचान बनाने की ललक थी. इसलिए अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी और दूसरों के लिए रोजगार उपलब्ध करवाना मेरा मकसद था. इसी वजह से मैंने किसी के तानों पर ध्यान नहीं दिया. बस अपना काम जारी रखा."

सामान बिकने पर ये चीजें भी बनाने लगी: संगीता ने आगे बताया कि, "धीरे-धीरे लोग मेरे प्रोडक्ट को पहचानने लगे और सारा सामान बिकने लगा. इसके साथ ही मैंने चाय मसाला, कैंडी, पहाड़ी नमक, चाय मसाला, ऑर्गेनिक पहाड़ी दाल, उड़द दाल बड़ी, मूंग दाल बड़ी इत्यादि बनाना शुरू किया, जो टोटल होममेड हैं. इसमें किसी भी तरह की मिलावट नहीं है."
साथ जुड़ी महिलाएं 15 हजार प्रति माह कमा रही: संगीता कहती हैं कि, "आज जो भी महिलाएं मेरे साथ जुड़ी हैं, वे महिलाएं महीने का 15 हजार रुपए तक कमा लेती हैं. मुझसे जुड़ी कुछ महिलाएं ऐसी थीं, जो कर्ज में डूबी थीं. रोजगार के माध्यम से उन्होंने अपना कर्ज भी चुका दिया है और अच्छा-खासा कमा भी रही हैं. आज मेरे साथ जुड़ी महिलाएं काफी खुश हैं. अच्छे ढंग से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं और पैसे भी बचा रही हैं. अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा रही हैं."

जो ताना मारते थे, आज रोजगार मांग रहे: संगीता ने बताया कि, "जो लोग पहले मुझे ताना मारते थे, वो आज मुझसे रोजगार मांगते हैं. वो कहते हैं कि अगर कुछ काम हो तो मुझे भी बताना. आज मेरी अपनी खुद की पहचान है. अच्छी खासी मेरी इनकम है. पहले लोग मुझे मेरे पति की वजह से जानते थे, लेकिन अब मेरी खुद की अलग पहचान है. मैं अब अपने परिवार पर डिपेंड नहीं हूं, बल्कि मुझे खुशी होती है कि मैं पैसे कमा रही हूं और अपने हस्बैंड का साथ दे रही हूं. पहले अगर हमारे बच्चे मुझसे पैसे मांगते थे, तो मैं अपने पति से लेकर उन्हें देती थी, लेकिन अब मुझे खुशी है कि मैं खुद उन्हें पैसे देती हूं."

दूसरी महिलाओं से रोजगार करने की अपील: संगीता ने आगे कहा कि, "मैं दूसरी महिलाओं से भी कहूंगी कि खाली न बैठें, बल्कि कुछ न कुछ रोजगार करें, ताकि इनकम का सोर्स बने."
ग्राहकों को पसंद आया संगीता का प्रोडक्ट: सरस मेले में घूमने आई महिला कांति रावत भी संगीता के स्टॉल पर पहुंचीं. कांति रावत ने ईटीवी भारत को बताया कि, "इनका प्रोडक्ट पूरी तरह हैंडमेड है. घर में ही ये महिलाएं इसे बनाती हैं. इनमें किसी भी तरह की मिलावट नहीं है. मैं खुद इनका प्रोडक्ट प्रयोग कर रही हूं. मुझे ऐसा लग रहा है कि एक-दो दिन में इनका सारा प्रोडक्ट खत्म हो जाएगा, क्योंकि बिक्री ज्यादा हो रही है."
बता दें कि फरीदाबाद में लगे सरस मेले में संघर्ष से सफलता की कई कहानियां देखने को मिल रही हैं. इस मेले में कई ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने लोगों के ताने सुने, गरीबी की मार झेली, लेकिन आज वे खुद सक्षम हैं और दूसरों को रोजगार दे रही हैं.
ये भी पढ़ें:देसी घी से बदली किस्मत, गांव की राजकुमारी बनीं सक्सेसफुल बिजनेसवुमन, जानें फर्श से अर्श तक की दास्तां...

