हुनर ने बदली तकदीर, मजदूर से बिजनेसमैन बने अरुण, घास और खजूर के पत्तों से शुरू किया कारोबार, लाखों में हो रही कमाई
मजदूर से बिजनेसमैन बने अरुण ने घास और खजूर के पत्तों से कारोबार शुरू किया. आज 70 महिलाएं उनके साथ जुड़कर रोजगार कर रही हैं.

Published : December 24, 2025 at 10:47 AM IST
|Updated : December 24, 2025 at 11:38 AM IST
फरीदाबाद: फरीदाबाद में इन दिनों सरस मेला लगा हुआ है. इस मेले में कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. देश के कोने-कोने से आए कलाकार यहां अपनी कला का हुनर दिखा रहे हैं. इस मेले में संघर्ष की ऐसी कहानी भी नजर आ रही है, जो अब संघर्षों से लड़कर एक मुकाम तक पहुंच चुकी है. इन्हीं में से एक हैं उड़ीसा के रहने वाले कलाकार अरुण.
दरअसल, अरुण पहले मजदूर थे, लेकिन अब वह एक बिजनेसमैन बन चुके हैं. अरुण घास और खजूर के पत्तों से अलग-अलग तरह की चीजें बनाते हैं, जो कि देखने में आकर्षक होती हैं, साथ ही टिकाऊ भी होती हैं.

पत्तों से शुरू किया कारोबार: ईटीवी भारत की टीम सरस मेले में पहुंची. ईटीवी भारत के संवाददाता ने कलाकार अरुण से उनके संघर्ष से लेकर सफलता तक की कहानी पूछी. कलाकार अरुण ने ईटीवी भारत को बताया कि, "मैं देश के कोने-कोने में इस तरह के मेले में अपने प्रोडक्ट को लेकर जाता हूं. अपने उड़ीसा में ही रहकर मैं सबई घासों से और खजूर के पत्तों से विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट बनाता हूं, जिसमें से मुख्य रूप से लेडीज बैग, लेडीज पर्स, ट्रे, फ्लावर पॉट, फूलदानी, कटोरी, बास्केट, चटाई, ड्राइंग टेबल मैट, डस्टबिन, डब्बा, ब्रेड ट्रे, पेन स्टैंड शामिल हैं."
साल 2005 में की शुरुआत: अरुण ने आगे बताया कि, "मैं इस काम को साल 2005 से कर रहा हूं. साल 2017 में मुझे इस काम में सफलता मिली. मेरे बनाए प्रोडक्ट की शुरुआती कीमत 30 रुपए है. 2200 रुपए तक मेरे बनाए प्रोडक्ट की कीमत होती है. अपने काम के लिए मुझे पहले सरकार की ओर से हजार रुपए का इनाम मिला था. इसके बाद मैं लगातार आगे बढ़ता रहा. आगे चलकर सरकार की ओर से मुझे 2 लाख से अधिक का लोन भी दिया गया."
मजदूर से बने सफल बिजनेसमैन: अरुण ने कहा कि, "साल 2005 से पहले मैं एक मजदूर था. अलग-अलग राज्यों में जाकर कंपनियों में काम किया करता था. मजदूरी किया करता था, जिससे मेरा भरण-पोषण ठीक से नहीं चल पा रहा था. इसी दौरान जब मैं एक बार गांव आया तो मुझे इस कला के बारे में पता चला और फिर मैंने इस कला को सीखा. इसके बाद घर से ही मैंने काम करना शुरू किया. धीरे-धीरे मेरे प्रोडक्ट को लोग सराहने लगे और बाजारों में भी इसकी बिक्री होने लगी. एक बार मेरे जिले में ही इस तरह के मेले का आयोजन हुआ, जिसमें वहां के डीएम साहब को मेरा बनाया हुआ सामान पसंद आया. इसके बाद उन्होंने मुझे सपोर्ट किया और फिर जिले में जहां भी मेला लगता था, वहां वे मुझे बुलाते थे. इसके बाद मेरा काम चल पड़ा. अब मैं एक लाख रुपये से अधिक महीने का कमा लेता हूं."

"पहले से बेहतर है अब की स्थिति": अरुण अपने पहले के समय के बारे में बताते हुए भावुक हो गए. उन्होंने बताया कि, "पहले मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं अपने बच्चों को पढ़ा सकूं. लेकिन आज मेरी आर्थिक स्थिति बेहतर है. अभी मेरा बेटा एक बड़े कॉलेज से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है. इसी बिजनेस के पैसों से मैंने अपनी बेटी की शादी भी की है."
70 महिलाओं को दे रहे हैं रोजगार: अरुण बताते हैं कि, "मैंने अकेले इस काम की शुरुआत की थी, लेकिन धीरे-धीरे कुछ-कुछ महिलाओं को अपने साथ जोड़ता गया. आज लगभग 70 ऐसी महिलाएं हैं, जो मेरे साथ इस काम को करती हैं. उन महिलाओं को मैंने रोजगार दिया है. काम के बदले मैं उन्हें पैसे देता हूं. ये महिलाएं मेरे घर पर आकर काम करती हैं. कोई महिला 4 घंटे काम करती है, तो कोई महिला 5 घंटे करती है. कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं, जो हमारे यहां से सामान ले जाकर अपने घर पर ही सामान बनाती हैं, क्योंकि महिलाओं को इस काम के साथ-साथ अपने घर-परिवार को भी देखना पड़ता है. आज ये महिलाएं भी मेरे यहां प्रोडक्ट बनाकर घर चला रही हैं. इस तरह कुल 70 महिलाएं मेरे साथ जुड़ी हैं."
बता दें कि अब देश भर में कहीं भी इस तरह के मेले का आयोजन किया जाता है, वहां अरुण खुद जाते हैं. इसके अलावा अगर एक साथ कई राज्यों में इस तरह के मेले का आयोजन किया जाता है, तो अरुण अपने साथियों को प्रोडक्ट के साथ उस मेले में भेज देते हैं. जैसे इन दिनों इस तरह का मेला चार राज्यों में लगा है. चारों राज्यों में अरुण का स्टॉल लगा हुआ है. इन स्टॉलों में अरुण के बनाए सामान बिक रहे हैं. इसके साथ ही अरुण के बनाए प्रोडक्ट ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं, जिनकी काफी डिमांड है. आज अरुण की कहानी अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणा है.
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