फरीदाबाद के कानूनी सहायता मंच की अनोखी पहल, 100 से अधिक वकील फ्री में दिलाते हैं गरीबों को इंसाफ
फरीदाबाद का कानूनी सहायता मंच 100 से अधिक वकीलों के साथ गरीब और असहाय लोगों को निःशुल्क न्याय दिला रहा है.

Published : January 3, 2026 at 11:48 AM IST
फरीदाबाद: अक्सर जब कोई मामला पुलिस तक पहुंचता है, तो कानूनी कार्रवाई और न्याय के लिए वकील की आवश्यकता पड़ती है. लेकिन कई बार गरीब और असहाय लोग आर्थिक कमजोरी और कानूनी जानकारी के अभाव में अपनी लड़ाई लड़ ही नहीं पाते. ऐसे में निर्दोष लोगों को सजा मिल जाती है. वहीं, कई मामलों में डर, जानकारी की कमी और संसाधनों के अभाव के कारण शिकायत न तो थाने तक पहुंच पाती है और न ही अदालत तक, जिससे अपराधियों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं और वे कमजोर वर्गों पर अत्याचार करते रहते हैं.
‘कानूनी सहायता मंच’ बना उम्मीद: ऐसे में फरीदाबाद की संस्था कानूनी सहायता मंच गरीब और असहाय लोगों के लिए न्याय की किरण बनकर सामने आई है. इस एनजीओ ने जरूरतमंदों को निशुल्क कानूनी सहायता देकर उन्हें उनका हक दिलाने का बीड़ा उठाया है. कानूनी सहायता मंच से जुड़े 100 से अधिक वकील एकजुट होकर विभिन्न अदालतों में गरीब लोगों के मामलों की पैरवी करते हैं, ताकि आर्थिक कमजोरी किसी के लिए न्याय के रास्ते में बाधा न बने और हर पीड़ित तक इंसाफ पहुंच सके.
साल 2017 में हुई शुरुआत: इस बारे में अधिक जानकारी के लिए ईटीवी भारत ने कानूनी सहायता मंच के संचालक एडवोकेट आकाश गुप्ता से बातचीत की. एडवोकेट आकाश गुप्ता ने बताया कि, "हमने इस एनजीओ की शुरुआत साल 2017 में की. शुरुआती दौर में 11 लोगों की हमारे पास टीम थी, लेकिन अब हमारी टीम में 100 से अधिक वकील हैं, जो अलग-अलग कोर्ट में बैठते हैं. हमने शुरुआत में सोचा कि क्यों ना एक ऐसा मंच बनाया जाए, जहां पर किसी भी तरह से गरीब असहाय व्यक्तियों को हमारी कानूनी सहायता की जरूरत हो, तो उसे इंसाफ दिया जाए. इसी वजह से हमने कानूनी सहायता मंच बनाया. आज हम महिला उत्पीड़न, बाल मजदूरी, ब्याजखोरी, दहेज प्रथा, श्रमिक शोषण समेत कई मुद्दों पर काम करते हैं और निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करते हैं."
ऐसे लोगों की करते हैं मदद: एडवोकेट आकाश गुप्ता ने कहा कि, "कभी ऐसा भी होता है कि कोई महिला दहेज के लिए प्रताड़ित होती है और उसकी सुनने वाला कोई नहीं होता. ऐसे में उन महिलाओं को हम मुफ्त में कानूनी सहायता प्रदान करते हैं. इसके अलावा कई बार नाबालिग के साथ शोषण होता है, उसको लेकर भी हम कानूनी सहायता प्रदान करते हैं. कोर्ट तक जाते हैं, उनकी लड़ाई लड़ते हैं और उन्हें इंसाफ दिलवाते हैं."
इन केसेज को हाल ही में किया सॉल्व: एडवोकेट आकाश ने हाल के केसेज का जिक्र करते हुए कहा कि, "हाल ही में हमने ऐसे दबंगों को जेल भेजा है, जिन्होंने एक गरीब मजदूर को बेरहमी से मारा था. उसके शरीर पर लगभग 70 से 72 टांके आए थे और उसकी सुनवाई नहीं हो पा रही थी. इसके बाद हमने उस व्यक्ति को इंसाफ दिलाया और जितने भी दबंग थे, उन सभी को जेल भेजा. इसके अलावा दिवाली से पहले हमने एक महिला को इंसाफ दिलाया है. महिला अपने ससुराल में रहती थी और उसके ससुराल वाले मिलकर दहेज का दबाव डालते थे. दहेज न लाने की सूरत में महिला की पिटाई होती थी. फिर उस महिला ने अपने मायके वालों को बताया. इसके बाद उन लोगों ने हमसे संपर्क किया. हालांकि वह परिवार गरीब था और उन्हें थाने, कोर्ट-कचहरी का ज्ञान नहीं था. यही वजह है कि महिला अपने ससुराल में दहेज को लेकर उत्पीड़न सह रही थी. उस मामले में हमने आरोपियों को जेल भेजा और अभी भी आरोपी जेल में हैं."
निःशुल्क देते हैं सेवा: एडवोकेट आकाश ने आगे कहा कि, "पहले के जमाने में जो वकील होते थे, वे बड़ा सा गाउन पहनते थे और गाउन के पीछे जेब हुआ करती थी. ऐसे में अगर वे किसी को इंसाफ दिलाते थे, तो इंसाफ मिलने वाला पक्ष अपनी श्रद्धा के अनुसार उसमें पैसे डाल देता था. हालांकि आज वकील भारी-भरकम फीस लेते हैं. वकालत समाज सेवा है, न कि सिर्फ पैसे कमाने का जरिया. इसी सोच के साथ हम आगे बढ़े. आज हमारे वकील साथी कई कोर्ट में बैठे हैं और जिस कोर्ट का मामला होता है, वहीं पर हम उन्हें फोन करके जानकारी देते हैं. फिर वे वहीं से कानूनी सहायता प्रदान करते हैं. इस तरह से हमारा नेटवर्क चल रहा है और यह पूरी सेवा निःशुल्क है."
गरीब बच्चों को देते हैं निःशुल्क शिक्षा: एडवोकेट आकाश गुप्ता ने आगे बताया कि, "इसके अलावा हम सभी वकील मिलकर गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा भी देते हैं. हम उन गरीब बच्चों की मदद करते हैं, जिनके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं होते और पैरों में जूते-चप्पल नहीं होते. उन्हें ये सभी चीजें मुहैया करवाई जाती हैं. इसके अलावा हम और हमारी टीम समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों में जाकर कैंप लगाते हैं और कानूनी जानकारियां देते हैं."
झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर करते हैं काउंसलिंग: एडवोकेट आकाश गुप्ता ने बताया कि, "इसके साथ ही हम गरीब बस्तियों में जाकर लोगों की काउंसलिंग भी करते हैं. कई बार ऐसा होता है कि मां-बाप काम पर गए होते हैं और घर में नाबालिग बच्ची के साथ छेड़छाड़ की घटना हो जाती है, लेकिन वह खुलकर अपने मां-बाप को नहीं बता पाती. और अगर बच्चे बता भी देते हैं, तो उनके मां-बाप पुलिस के पास नहीं जाते. ऐसे लोगों की हम काउंसलिंग करते हैं, उन्हें कानूनी सहायता देते हैं और उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देते हैं."
हजारों लोगों की कर चुके हैं मदद: एडवोकेट आकाश की मानें तो उनकी यह संस्था अब तक हजारों लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान कर चुकी है और उनका यह काम लगातार जारी है. अगर आपको भी किसी भी तरह की कानूनी सहायता की आवश्यकता है, तो आप इस संस्था से संपर्क कर मुफ्त में कानूनी सहायता ले सकते हैं.
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