1 रुपए, एक नारियल और विवाह संपन्न, बेटे की शादी में परिवार ने पेश की मिसाल
परिवार ने पुत्री पिंकी बुरानिया के विवाह में भी इसी परंपरा का पालन करते हुए केवल 1 रुपए और एक नारियल का आदान-प्रदान किया था.

Published : July 8, 2026 at 9:28 AM IST
|Updated : July 8, 2026 at 9:44 AM IST
सीकर : समाज में दहेज प्रथा आज भी कई परिवारों के लिए बड़ी सामाजिक चुनौती बनी हुई है. शादी-ब्याह में लाखों रुपए और कीमती सामान के लेन-देन की खबरें अक्सर सामने आती हैं, लेकिन सीकर जिले के खाटूश्यामजी क्षेत्र के मदनी-मंडा का एक परिवार वर्षों से इस कुरीति के खिलाफ अपनी अनूठी परंपरा निभा रहा है. बुरानिया परिवार ने एक बार फिर अपने घर के विवाह में दहेज के नाम पर केवल 1 रुपए और एक नारियल लेकर और उतना ही देकर समाज के सामने सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है.
हाल ही में मदनी निवासी अर्जुनराम बुरानिया के पुत्र सुभाष बुरानिया का विवाह मंडा निवासी पंछीलाल राबिया की पुत्री सरोज , जो राजस्थान पुलिस में हैं, के साथ संपन्न हुआ. विवाह समारोह पूरी सादगी के साथ आयोजित किया गया. इस दौरान दोनों परिवारों ने दहेज की किसी भी प्रकार की परंपरा को पूरी तरह नकारते हुए केवल 1 रुपए और एक नारियल का प्रतीकात्मक शगुन स्वीकार किया. इतना ही नहीं, परिवार की पुत्री पिंकी बुरानिया के विवाह में भी इसी परंपरा का पालन करते हुए केवल 1 रुपए और एक नारियल का आदान-प्रदान किया गया.

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कई वर्षों से परिवार परंपरा : दूल्हे के भाई डॉ. युद्धवीर सिंह बुरानिया ने बताया कि यह परंपरा आज की नहीं, बल्कि कई वर्षों से परिवार की पहचान बन चुकी है. इसकी शुरुआत उनके पिता बोदूराम बुरानिया ने अपनी बड़ी पुत्री डॉ. सुमन बुरानिया के विवाह के समय की थी. उसी दिन परिवार ने संकल्प लिया था कि आने वाले समय में घर के किसी भी विवाह में दहेज नहीं लिया जाएगा और न ही दिया जाएगा. विवाह केवल 1 रुपए और एक नारियल के प्रतीकात्मक शगुन के साथ संपन्न कराया जाएगा, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचे.
बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना सबसे बड़ा दहेज : उन्होंने बताया कि परिवार किसान पृष्ठभूमि से जुड़ा है, लेकिन शिक्षा को हमेशा सबसे बड़ा धन माना गया. परिवार की दो बेटियां डॉ. सुमन बुरानिया और डॉ. प्रियंका बुरानिया चिकित्सा क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं, जबकि बड़े भाई महेश कुमार बुरानिया देश सेवा में एसएसबी में कार्यरत हैं. परिवार के दामाद डॉ. पंकज निठरवाल एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर में सहायक आचार्य हैं. वे इस सामाजिक सोच को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. परिवार का कहना है कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना ही सबसे बड़ा दहेज है.

