कोटा जेके लोन अस्पताल पर गंभीर आरोप: थैलेसीमिया पीड़ित को ब्लड चढ़ाने से हुआ HIV संक्रमण, जांच कमेटी गठित
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के परिजनों का आरोप है कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन से हुआ एचआईवी, HOD बोले- हम दे रहे हैं सबसे सेफ रक्त.

Published : July 4, 2026 at 9:53 AM IST
कोटा : मेडिकल कॉलेज के जेके लोन अस्पताल में थैलेसीमिया बच्चों को चढ़ाए जाने वाले ब्लड से एचआईवी संक्रमण होने का आरोप लगा है. मामले में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने जांच शुरू करवा दी है, लेकिन ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने उनके यहां से जारी किए गए ब्लड से एचआईवी संक्रमण होने की बात से इनकार किया है.
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन का कहना है कि जिला कलेक्टर कार्यालय से उनके पास पत्र आया था. जिसमें थैलेसीमिया पीड़ित बालिका के एचआईवी संक्रमित होने का आरोप लगाया गया है. इस मामले में तीन सदस्य जांच कमेटी गठित की गई है. जिसमें शिशु रोग विभाग की प्रो. अमृता मयंगर, ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के विभाग अध्यक्ष डॉ. परमेंद्र पचौरी और डॉ. मनीष बोहरा शामिल है. मामले में जांच रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. इस संबंध में ज्यादा जानकारी भी जेके लोन अस्पताल, ब्लड बैंक और शिशु रोग विभाग दे सकते हैं.
यह लगा है आरोप- 2023 में नेगेटिव और एचआईवी पॉजिटिव : मामले में कोटा निवासी 8 वर्षीय बालिका थैलेसीमिया पीड़ित है. उसे 3 साल की उम्र में ही थैलेसीमिया का पता चल गया था. जिसके बाद परिजन कोटा के जेके लोन अस्पताल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन कर रहे थे, परिजनों का आरोप है कि बालिका को पिछले साल जून में अंतिम बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन करवाया था. जिसके बाद उन्होंने जयपुर में इलाज करवाया. अब ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं है, केवल दवाईयों से ही काम चल रहा है. हाल ही में उन्होंने जब बच्ची की जांच करवाई तो उसमें एचआईवी पॉजिटिव आया है. जबकि साल 2023 में उन्होंने जांच करवाई थी, इसमें एचआईवी पॉजिटिव नहीं थी. जेके लोन अस्पताल में हुए इस ब्लड ट्रांसफ्यूजन से ही संक्रमण फैला है. दूसरी तरफ इस तरह का एक और मामला भी सामने आए हैं, जिसमें बूंदी निवासी 13 वर्षीय बालक भी एचआईवी संक्रमित मिला है. उसके माता-पिता मजदूर हैं, उनकी हाल ही में हुई जांच में वह एचआईवी पॉजिटिव नहीं मिले हैं, जबकि बेटा एचआईवी पॉजिटिव मिला है.
दूसरे अस्पताल में भी लिया है उपचार : थैलेसीमिया पीड़ित एचआईवी पॉजिटिव मिली 8 वर्षीय बालिका ने जयपुर में भी लंबे समय तक उपचार लिया है दूसरी तरफ बूंदी निवासी 13 वर्षीय बालक ने बूंदी में भी उपचार लिया है. इसके अलावा जेके लोन अस्पताल में भी उनका उपचार हुआ है. ऐसे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है कि संक्रमण कैसे फैला है. एचआईवी फैलने के भी कई कारण होते हैं. ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के एचओडी डॉ. पचौरी का कहना है कि इनफेक्टेड नीडल के चलते और कई कारण है. कई जगह पर उपचार मरीज करवाता है. वहां इंजेक्शन और ड्रिप भी चढ़ाई जाती है. अधिकांश मरीज यह भी नहीं बताते हैं कि उन्होंने और कहां-कहां पर इलाज लिया है, संभावना दूसरी जगह एचआईवी पॉजिटिव होने की है.
नेट टेस्टेड ब्लड सबसे एडवांस, संक्रमण का खतरा कम : जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा का कहना है कि उन्हें फिलहाल इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. पूरी जानकारी मेडिकल कॉलेज के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग अध्यक्ष दे सकते हैं. मामले पर मेडिकल कॉलेज के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग अध्यक्ष डॉ. परमेंद्र पचौरी का कहना है कि ब्लड बैंक में आने वाले रक्त की कई तरीकों से जांच हो रही है. सबसे एडवांस तकनीक न्यूक्लियर एसिड टेस्ट (नेट) का उपयोग थैलेसीमिया बच्चों को दिए जाने वाले ब्लड की जांच में किया जा रहा है. यह सबसे सटीक और फोर्थ जनरेशन वाली जांच है. नेट जांच में कुछ दिनों में हुए संक्रमण का भी पता चल जाता है. इसलिए हमारे यहां से जारी किए गए ब्लड से एचआईवी होने की संभावना ना के बराबर है. हमारे यहां सबसे सेफ ब्लड दिया जा रहा है. अब तो रूटीन के मरीजों को भी नेता टेस्टेड ब्लड उपलब्ध कराया जा रहा है.

