जींद में फाल्गुन अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने लगाई श्रद्धा की डुबकी, पिंडदान कर तर्पण किया, सुखद भविष्य की कामना
फाल्गुन अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पिंड तारक तीर्थ में स्नान और पिंडदान कर घर-परिवार वालों के लिए सुखद भविष्य की कामना की.

Published : February 17, 2026 at 3:05 PM IST
जींद: फाल्गुन अमावस्या पर पांडू पिंडारा स्थित पिंड तारक तीर्थ पर मंगलवार को श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया और पिंडदान करके तर्पण किया. पिंडारा तीर्थ पर सोमवार शाम से ही श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए थे. पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग और कीर्तन चलते रहे. सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान और पिंडदान शुरू कर दिया जो मध्याह्न के बाद तक चलता रहा.
बच्चों और महिलाओं ने की खरीदारीः मौके पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान कर सूर्य देव को जल अर्पण कर सुख समृद्धि की कामना की. वहीं पिंडारा तीर्थ पर अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने खरीदारी भी की. बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे तो वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे.
12 साल तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में पांडवों ने की थी तपस्याः जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पिंड तारक तीर्थ के संबंध में किवदंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की. बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया. तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंड तारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है.
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से दरिद्रता का होता है नाशः महाभारत काल से ही सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है. यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालु आते हैं. जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि फाल्गुन मास की अमावस्या को शिव खप्पर पूजा करने का विधान है. यह पूजा दुखों को नष्ट कर सुखमय जीवन जीने की एक आध्यात्मिक पद्धति है. पूरे विधि विधान से पूजा पाठ करने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होते हैं, जिससे दरिद्रता का नाश होता है. दुख खत्म होते हैं और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है.

