टीसीपी विभाग के नाम से तैयार NOC को देख दंग रह गए अधिकारी, पुलिस तक पहुंचा मामला
नगर निगम हमीरपुर के पास टीसीपी की ओर से जारी एनओसी पहुंची. विभागीय जांच के दौरान इसमें बड़ी गलती पकड़ में आ गई.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 9, 2026 at 1:17 PM IST
|Updated : January 9, 2026 at 1:32 PM IST
हमीरपुर: टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) विभाग के मंडलीय नगर योजनाकार कार्यालय के नाम से फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) तैयार कर उसे विभिन्न विभागों में जमा करवाने का मामला सामने आया है. विभागीय जांच में ये सामने आया है कि संबंधित एनओसी पर अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे, जबकि जिस क्षेत्र के लिए यह एनओसी जारी होने का दावा किया गया है, वो टीसीपी के अंतर्गत आता ही नहीं है. यह क्षेत्र नगर निगम के तहत शहर का एक वार्ड है.
जांच में सामने आया कि शातिरों ने टीसीपी विभाग के नाम से फर्जी एनओसी तो तैयार कर ली, लेकिन नगर निगम के उस क्षेत्र के लिए टीसीपी की एनओसी बना डाली जो इसके अंतर्गत आता ही नहीं. यही गलती विभागीय जांच के दौरान पकड़ में आ गई. इसके बाद पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई थी. अब पुलिस ये जांच कर रही है कि फर्जी एनओसी कहां तैयार की गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं.
एनओसी पर फर्जी हस्ताक्षर
हमीरपुर नगर योजनाकार अधिकारी हरजिंद्र सिंह ने बताया कि 'विभागीय जांच में यह एनओसी पूरी तरह फर्जी पाई गई है. जिस क्षेत्र के लिए ये एनओसी जमा की गई है वो टीसीपी के अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं है. साथ ही दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षर भी जाली पाए गए हैं. एनओसी में इस बात की पुष्टि की गई थी कि संस्थान की बिल्डिंग टीसीपी एक्ट लगने से पहले बनकर तैयार हुई है.'
शिक्षा संस्थान से जुड़ा है मामला
वहीं, एसपी हमीरपुर बलवीर ठाकुर ने बताया कि 'ये मामला एक शैक्षणिक संस्थान से संबंधित एनओसी से जुड़ा हुआ है. टीसीपी विभाग के अधिकारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. इस बात की जांच की जा रही है कि ये फर्जी एनओसी किसने और कैसे तैयार की है. इसे किन-किन विभागों में भेजा गया. जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.'
29 दिसंबर को दर्ज हुई थी शिकायत
आपको बता दें कि बीते वर्ष 29 दिसंबर को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मंडलीय कार्यालय हमीरपुर की ओर से सदर थाना हमीरपुर में इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई गई थी. शिकायत में विभागीय अधिकारी ने बताया कि कुछ दिन पहले एक अज्ञात व्यक्ति उनके कार्यालय पहुंचा और एक एनओसी प्रस्तुत की, जिसे उसने कार्यालय की ओर से जारी बताया. अधिकारियों ने दस्तावेज की जांच की तो कई खामियां सामने आईं. जांच में ये स्पष्ट हुआ कि एनओसी पर प्लानिंग ऑफिसर के हस्ताक्षर फर्जी थे. इसके अलावा एनओसी पर लिखा डिस्पैच नंबर भी कार्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता था. इतना ही नहीं, इस एनओसी की एक प्रति प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी भेजी गई थी.
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