गणेश मंदिरों में फागोत्सव, मोती डूंगरी से नहर के गणेशजी तक गुलाल-गोटा, ढप-चंग और कथक की प्रस्तुतियों से रंगे
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में जयपुर की होली से जुड़ी राजसी परंपरा को उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाया गया.


Published : February 25, 2026 at 10:55 PM IST
जयपुर: भारतीय संस्कृति का पावन पर्व होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि परंपरा, लोक-संगीत और भक्ति के संगम का भी पर्व है. छोटी काशी के प्रमुख गणेश मंदिरों में बुधवार को फाल्गुनी उल्लास चरम पर दिखा. श्रद्धालु जहां प्रथम पूज्य के दरबार में गुलाल अर्पित कर रहे थे, वहीं मंदिर महंतों व पुजारियों ने पुष्प वर्षा और गुलाल-गोटा उछालकर भक्तों तक भगवान का आशीष पहुंचाया. सुगंधित अबीर-गुलाल से पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया और हर कोई बप्पा के रंग में रंगता नजर आया.
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पारम्परिक राजसी फाग की झलक: मोती डूंगरी स्थित भगवान गणपति के दरबार में फागोत्सव पारंपरिक विधि से मनाया गया. महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि जयपुर की होली राजसी परंपरा से जुड़ी है. करीब 150 वर्ष पूर्व जयपुर राजघराने के आग्रह पर मनिहारों ने विशेष लाख से बने गुलाल गोटा तैयार करना शुरू किया था. राजा हाथी पर विराजमान होकर प्रजा के बीच इन्हीं गुलाल गोटों को बरसाते थे और पूरा शहर रंगों से सराबोर हो जाता था. उसी परंपरा का निर्वहन आज भी मंदिर परिसर में गुलाल-गोटा और पुष्प वर्षा के माध्यम से किया जाता है. इसके साथ ही मंदिर परिसर के ठीक बाहर ढप-चंग की थाप पर लोकगीत गूंजे और भक्तों ने पारंपरिक फाग गाकर माहौल को जीवंत बना दिया.
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गणपति को कथक और ध्रुपद पसंद: महंत शर्मा ने बताया कि शेखावाटी अंचल की लोक-शैलियों को भी पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ा जा सके. फागोत्सव के दौरान भगवान गणपति को विशेष फाल्गुनी पोशाक धारण कराई गई. कथक के साथ कलाकारों ने प्रस्तुतियां देकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. क्योंकि भगवान गणपति स्वयं भी कथक और ध्रुपद पसंद करते हैं, इसी वजह से कथक और ध्रुपद के साथ भगवान को सेवा अर्पित की गई.

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नहर के गणेशजी मंदिर में कला और भक्ति का संगम: ब्रह्मपुरी माउंट रोड स्थित दक्षिणमुखी श्री नहर के गणेशजी महाराज मंदिर में विशाल फागोत्सव का आयोजन हुआ. मंदिर महंत पं जय शर्मा ने बताया कि पूजा-अर्चना के बाद भगवान को रंगबिरंगी फागुणिया पोशाक पहनाकर उत्सव का शुभारंभ हुआ. मंदिर में ढप-चंग, पिचकारी और रंग-बिरंगी गुलाल से सजी भव्य फाल्गुनी झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. यहां पद्मश्री सम्मानित लोक नृत्यांगना गुलाबो सपेरा और उनके साथी कलाकार नृत्य गुरु राजेन्द्र राव और अन्य ने लोक और शास्त्रीय कलाओं की सजीव प्रस्तुतियां दी.

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परकोटा गणेश मंदिर में गुलाल के गजरे और भजनों की फाग: चांदपोल स्थित परकोटा गणेश मंदिर में भी फाग महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया. महंत पंडित अमित शर्मा के सान्निध्य में गणेशजी को विभिन्न तीर्थों के जल से स्नान कराया गया, सिंदूर का चोला चढ़ाया गया और नवीन फाल्गुनी पोशाक धारण कराई गई. भगवान को गुलाल के गजरे पहनाए गए और फूलों से सजी फाल्गुनी झांकी सजाई गई. ठंडाई, गुंजिया, खीर और मालपुओं का भोग अर्पित किया गया. वहीं महिला मंडल की ओर से पेश किए गए भजनों ने भक्तिमय वातावरण बना दिया. इस दौरान श्रद्धालुओं को गुलाल का तिलक लगाकर भगवान का आशीर्वाद दिया गया.

फागोत्सव-परंपरा और संस्कृति का अंग: बहरहाल, जयपुर के इन प्रमुख गणेश मंदिरों में मनाया गया फागोत्सव केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास भी है. ढप-चंग की पारंपरिक थाप, लोकगीतों की गूंज, कथक की मुद्राएं और पुष्प-गुलाल की वर्षा इन सबने मिलकर ये संदेश दिया कि होली का उत्सव हमारी आस्था, लोककला और सामाजिक एकता का प्रतीक है.

