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फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम से मिली नई ताकत , AI सिस्टम बताएगा परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट व क्रिमिनल का रिकॉर्ड

राज्य में एआई तकनीक से पहचान में क्रांति ने डिजिटल नवाचार की मिसाल पेश की है.

फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम से मिली नई ताकत
फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम से मिली नई ताकत (Photo Credit - DOIT Rajasthan)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 23, 2026 at 11:29 AM IST

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जयपुर : देश के कई राज्य जहां अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सेवाओं की शुरुआती अवस्था में हैं, वहीं राजस्थान सरकार ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है. चैटबॉट आधारित सेवाओं के सफल संचालन के बाद अब राज्य ने कंप्यूटर विज़न तकनीक पर आधारित उन्नत एआई एप्लिकेशन लागू कर प्रशासनिक और कानून प्रवर्तन तंत्र को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया है. जिसके कारण अब चेहरा छुपाकर बच निकलना आसान नहीं होगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल सीधे कानून व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं की निगरानी में शुरू हो गया है. राजस्थान में एआई तकनीक का यह बहुआयामी उपयोग प्रशासनिक दक्षता, कानून व्यवस्था, परीक्षा पारदर्शिता और जनसेवा जैसे सभी क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है.

फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम से मिली नई ताकत : सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग की ओर से विकसित फेस सिमिलैरिटी सर्च तकनीक शासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है. विभाग के आयुक्त हिमांशु गुप्ता के मुताबिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर ने एआई आधारित कई समाधान तैयार कर सफलतापूर्वक लागू किए हैं. ये सिस्टम ना सिर्फ तकनीकी रूप से उन्नत हैं , बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और गति भी ला रहे हैं. उन्होंने कहा कि विभाग के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट ने कंप्यूटर विजन तकनीक पर आधारित एडवांस एआई सिस्टम तैयार किया है, जो कामयाबी के साथ लागू किया जा चुका है. इसकी मदद से किसी भी संदिग्ध की तस्वीर का डेटाबेस से मिलान कर उसकी असल पहचान उजागर की जा सकेगी. एआई तकनीक के मदद से पहचान के सिलसिले में सटीकता और तेजी दोनों काफी कारगर है.

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प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट पर लगाम : राज्य में भर्ती परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थियों की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए विकसित फेस सिमिलैरिटी एप्लिकेशन बेहद प्रभावी साबित हुआ है. संदिग्ध अभ्यर्थी की फोटो का 50 लाख से अधिक पंजीकृत अभ्यर्थियों के डेटाबेस से मिलान कर संभावित फर्जी उम्मीदवारों की पहचान की जा रही है. इससे परीक्षाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता मजबूत हुई है तथा चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है.

अपराधियों की पहचान भी होगी आसान : इसी तकनीक का एक अन्य संस्करण कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए तैयार किया गया है, जो करीब 10 लाख फोटो वाले आपराधिक डेटाबेस से मिलान कर आदतन अपराधियों की पहचान आसान बनाता है. इससे जांच एजेंसियों को संदिग्धों की पहचान, गतिविधियों के पैटर्न विश्लेषण और निगरानी में तेज़ी मिली है, जिससे अपराध नियंत्रण व्यवस्था मजबूत हुई है. पुलिस जांच के दौरान जैसे ही किसी संदिग्ध की फोटो अपलोड की जाती है. सिस्टम संभावित मैच दिखा देता है. इससे आदतन अपराधियों की पहचान आसान हो रही है. पुराने मामलों से लिंक जोड़ने और अपराध के पैटर्न समझाने में भी मदद मिल रही है. जांच एजेंसियों का मानना है कि इससे अपराधियों के लिए नाम और पहचान बदलकर बच निकलना मुश्किल हो रहा है.

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लावारिस शवों की पहचान में मानवीय पहल : एआई का उपयोग केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है. विभाग ने एक विशेष फेस सिमिलैरिटी सिस्टम लागू किया है, जो अज्ञात शवों की तस्वीरों का गुमशुदा व्यक्तियों और अन्य डेटाबेस से मिलान कर उनकी पहचान में मदद करता है. इससे परिजनों तक सूचना पहुंचाने और मानवीय संवेदनाओं की रक्षा में मदद मिल रही है. इसकी मदद से परिवारों को जल्द सूचना देने और मामलों को सुलझाने में राहत मिल सकती है. प्रशासन का कहना है कि तकनीक का उपयोग संवेदनशील मामलों में मदद के लिए भी किया जा रहा है.

सुरक्षित डेटा और नैतिक एआई उपयोग पर जोर : ये सभी एआई एप्लिकेशन राजस्थान स्टेट डेटा सेंटर में एयर-गैप्ड वातावरण में संचालित किए जा रहे हैं, जिससे डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित होती है. ऑडिट लॉगिंग, ट्रेसबिलिटी और सुरक्षा प्रोटोकॉल के माध्यम से नैतिक और जिम्मेदार एआई उपयोग को प्राथमिकता दी गई है.

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