जोधपुर के गंगश्याम मंदिर में फाग, 1931 से चली आ रही वृहद फागोत्सव परंपरा का जयपुर राजघराने से है संबंध
मंदिर पुजारी ने बताया कि गंगश्याम मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति 800 साल से ज्यादा पुरानी है.

Published : February 28, 2026 at 5:25 PM IST
जोधपुर: भीतरी शहर के ऐतिहासिक गंगश्याम मंदिर में इन दिनों फागोत्सव चरम पर है. बसंत पंचमी से यहां यह सिलसिला चल रहा है. श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां का माहौल वृंदावन जैसा होता है. 265 साल पुराने इस मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति 800 साल से ज्यादा पुरानी है. 1931 में जोधपुर की राजकुमारी मरुधर कंवर ने जयपुर राजघराने के कुलदीपक भवानी सिंह को जन्म दिया, तो यह परम्परा वृहद स्तर पर आयोजित होना शुरू हुई. मंदिर में बसंत पंचमी से विशेष फाग उत्सव की शुरुआत होती है.
मंदिर के पुजारी मुरली मनोहर ने बताया कि यहां रंग पंचमी तक यह फाग चलता है. इस दौरान दोपहर में श्याम के साथ गुलाल से होली खेली जाती है. शाम को होरिया गाई जाती है. इस दौरान पुष्प वर्षा की जाती है. मंदिर में बसंत पंचमी से डेढ़ माह तक फाग उत्सव चलता है. प्रतिदिन सैकड़ों लोग शामिल होते हैं. होली के समीप यह संख्या बढ़ जाती है. रंग पंचमी तक फाग की धूम रहेगी. पुजारी ने बताया कि पुजारी परिवार पीढ़ियों से यहां परंपरा का निर्वहन कर रहा है. बसंत पंचमी के दिन ही भगवान को साल में एक बार कुमकुम का तिलक लगाया जाता है.
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डिप्टी सीएम का है मंदिर से गहरा कनेक्शन: जोधपुर की राजकुमारी मरुधर कंवर का विवाह जयपुर के मानसिंह द्वितीय के साथ हुआ था. उनकी दो संतान हुई राजकुमारी प्रेम कुमारी और राजकुमार भवानी सिंह. दोनों जोधपुर रियासत के भानजा और भानजी थे. भवानी सिंह के जन्म पर मंदिर में वृहद उत्सव की शुरुआत हुई. भवानी सिंह का विवाह पद्मिनी देवी से हुआ, जिनसे उनकी बेटी दीया कुमारी का जन्म हुआ. जो वर्तमान में प्रदेश की उपमुख्यमंत्री हैं.


