जिंदा रहेंगी मेरे बेटे की आंखें, पुत्र की मौत के बाद परिजनों ने किया नेत्रदान का फैसला
कंप्यूटर ऑपरेटर की मौत उस वक्त हुई, जब वह ड्यूटी जा रहे थे. ठोकर मारने वाले वाहन को पुलिस ने जब्त कर लिया है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 8, 2026 at 3:50 PM IST
|Updated : January 8, 2026 at 4:01 PM IST
धमतरी:अर्जुनी थाना इलाके के ग्राम भानपुरी में वाहन की ठोकर से ड्यूटी जा रहे कंप्यूटर ऑपरेटर की दर्दनाक मौत हो गई. सूचना मिलते ही अर्जुनी पुलिस मौके पर पहुंची और ठोकर मारने वाले वाहन को जब्त कर लिया. शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल लाया गया जहां परिजनों ने नेक पहल करते हुए मृत बेटे के नेत्रदान करने का फैसला किया. परिजनों का कहना था कि किसी और के शरीर में मेरे बेटे की आंखें जिंदा रहेंगी ये हमारे लिए अच्छी बात होगी. ऐसा लगेगा जैसे हमारा बेटा जिंदा है, हमारे सामने है और दुनिया देख रहा है.
दुख की घड़ी में परिजनों ने लिया सामाजिक संदेश देने का फैसला
दरअसल, ग्राम भानपुरी निवासी देवेंद्र साहू, जिनकी उम्र 37 साल थी, वो अपनी बाइक से ड्यूटी करने के लिए कलेक्ट्रेट जा रहे थे. गांव से निकलते ही सामने से आ रही गाड़ी ने उनको जोरदार टक्कर मार दी. देवेंद्र साहू को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया, जहां पर डॉक्टरो ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया.
मोडिफाइड गाड़ी से हुई थी टक्कर
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ठोकर मारने वाला वाहन बाइक है, जिसे मोडिफाइड करके ऑटो जैसा बनाया गया था. आरोपी ड्राइवर मंडई मेले के लिए सामान लेकर जा रहा था, तभी उसने गाड़ी के ऊपर से अपना नियंत्रण खो दिया और उसकी टक्कर बाइक से हो गई. पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है. मृतक आदिम जाति कल्याण विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था.
फर्ज निभाने के साथ सामाजिक संदेश दिया
बेटे की मौत की सूचना मिलते ही परिजन रोते बिलखते अस्पताल पहुंचे. परिजनों ने तत्काल ये फैसला लिया कि वो अपने बेटे की आंखों को दान करेंगे, ताकि दूसरा कोई दुनिया देख सके. परिजनों के इस फैसले पर लोग भी खुशी जता रहे हैं. परिजनों के नेत्रदान के फैसले के बाद नेत्रदान में नोडल अधिकारी डॉ राजेश सूर्यवंशी, गुरुशरण साहू और उनकी टीम ये प्रक्रिया पूरी करेगी.
घर का इकलौता बेटा था देवेंद्र साहू
परिजनों के अनुसार देवेंद्र साहू घर का इकलौता कमाने वाला था, घर में माता पिता के अलावा पत्नी और एक छोटा पुत्र है. इस घटना से घर में सभी का रो-रो कर बुरा हाल है. वहीं गांव में मातम छाया हुआ है. लोगों के ये विश्वास नहीं हो रहा है कि हंसमुख व्यवहार का देवेंद्र अब नहीं रहा.

