दिल्ली के विद्यालयों में अब होगी छात्रों के आंखों की जांच, नगर निगम और दिल्ली एम्स की संयुक्त पहल
राजधानी में बच्चों की आंखों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली नगर निगम और एम्स की संयुक्त पहल के तहत 20 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू

Published : March 2, 2026 at 7:14 PM IST
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बच्चों के भविष्य को स्वच्छ,स्पष्ट और सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हुई है. अब स्कूल में ही बच्चों की आंखों की जांच की जाएगी. दिल्ली नगर निगम और एम्स की संयुक्त पहल के तहत 20 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसमें टीचर खुद बच्चों की शुरुआती आई-स्क्रीनिंग करेंगे. और इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग कर रहे हैं डॉ. प्रवीण वशिष्ठ .जो एम्स में डिपार्टमेंट ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी में प्रोफेसर और ऑफिस इंचार्ज हैं.
एमसीडी में प्राथमिक स्कूलों में आंखों की सेहत पर ध्यान
दिल्ली के एमसीडी प्राथमिक स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की आंखों की सेहत पर भी खास ध्यान दिया जाएगा. इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे बच्चों की प्रारंभिक दृष्टि जांच कर सकें.अगर कोई बच्चा ब्लैकबोर्ड साफ नहीं देख पा रहा…किताब को बहुत पास लाकर पढ़ रहा है,या बार-बार सिरदर्द की शिकायत कर रहा है,तो अब टीचर तुरंत उसे चिन्हित करेंगे.
शिक्षक क्लास में बच्चों की बेसिक स्क्रीनिंग करेंगे
इस योजना की प्रक्रिया इस प्रकार है: शिक्षक क्लास में बच्चों की बेसिक स्क्रीनिंग करेंगे,जिन बच्चों में आंखों की समस्या दिखेगी, उनकी सूची बनाई जाएगी.इसके बाद AIIMS की विशेषज्ञ टीम उनकी विस्तृत जांच करेगी.जरूरत पड़ने पर मुफ्त चश्मा दिया जाएगा और यदि इलाज की जरूरत होगी, तो पूरा उपचार भी उपलब्ध कराया जाएगा.
आंखों की समस्या समय रहते ही सही कर लिया जाना चाहिए
AIIMS के डिपार्टमेंट ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी प्रोफेसर और ऑफिस इंचार्ज डॉ. प्रवीण वशिष्ठ का कहना है,अगर बच्चों की आंखों की समय रहते जांच कर ली जाए, तो भविष्य में गंभीर दृष्टि समस्याओं से बचा जा सकता है. स्कूल स्तर पर स्क्रीनिंग से नजर की कमी का जल्दी पता चलता है और तुरंत समाधान संभव होता है.

योजना 20 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई
डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने यह भी कहा कि कई बार बच्चे अपनी परेशानी व्यक्त नहीं कर पाते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है,फिलहाल यह योजना 20 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई है अगर यह सफल रहती है, तो इसे पूरे दिल्ली के स्कूलों में विस्तारित किया जाएगा.
मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की वजह से बढ़ रही समस्या
आज के दौर में बच्चों का स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ रही है. मोबाइल और डिजिटल उपकरणों का असर सीधे आंखों पर पड़ रहा है.ऐसे में यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई में सुधार होगा, बल्कि अभिभावकों को भी समय पर समस्या का पता चल सकेगा.
एमसीडी और AIIMS की सफल साझेदारी बनेगी मिसाल
तो अब दिल्ली में बचपन धुंधला नहीं होगा,क्योंकि स्कूल में ही होगी आंखों की जांच, एमसीडी और AIIMS की यह साझेदारी अगर सफल रहती है, तो यह मॉडल पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है.
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