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Explainer: मानसून सत्र से हरियाणा की जनता को क्या मिला? जानें 3 दिन की कार्यवाही का लेखा-जोखा और बड़े सियासी घटनाक्रम

हरियाणा का मानसून सत्र 1सितंबर को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ. सवाल ये कि जनता को क्या मिला? चंडीगढ़ ब्यूरो हेड भूपेंद्र जिष्टू की रिपोर्ट.

Explainer monsoon session 2026
Explainer monsoon session 2026 (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : September 3, 2026 at 2:07 PM IST

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Updated : September 3, 2026 at 2:14 PM IST

14 Min Read
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चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र मंगलवार, 1 सितंबर को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया. कैलेंडर में सत्र 27 अगस्त से 1 सितंबर तक था, लेकिन वास्तविक सदन की बैठक तीन दिन ही हुई. 28 अगस्त को रक्षाबंधन और 29-30 अगस्त को सप्ताहांत के कारण सदन की बैठक नहीं हुई. आधिकारिक विधानसभा पोर्टल पर इस सत्र के लिए 2,319 सवाल, 479 नोटिस और 14 सरकारी विधेयक दर्ज हैं. इस सत्र का हिसाब केवल इतने आंकड़ों से पूरा नहीं होता. असली सवाल ये है कि विधानसभा में तीन दिन की कार्यवाही के बाद हरियाणा के आम आदमी के हाथ क्या आया?

मानसून सत्र में हंगामा, बवाल और सवाल: क्या युवाओं को रोजगार पर कोई ठोस राहत मिली? किसानों को क्या मिला? गांवों की शामलात जमीन से जुड़े मामलों में क्या बदलेगा? कारोबार शुरू करने वालों के लिए क्या आसान हुआ? बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और पानी से जुड़े सवालों के जवाब कितने काम के हैं? इस सबके बीच सदन के पहले दिन हुआ हंगामा, धक्का-मुक्की के आरोप और आठ कांग्रेस विधायकों का निलंबन क्या इस सत्र की सबसे बड़ी पहचान बन गया?

हरियाणा मानसून सत्र में हंगामा, बवाल और सवाल (ETV Bharat)

हरियाणा सरकार ने गिनाई योजनाएं, क्या जमीन पर उतरेंगी? कुछ मामलों में जवाब साफ है. कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान करने के लिए Right to Business का कानूनी ढांचा आया, शामलात जमीन के कुछ लंबित मामलों के निपटारे का रास्ता आसान करने का प्रयास हुआ, महिला आयोग में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई, स्थानीय निकायों के ऑडिट के लिए नया कानूनी ढांचा बनाया गया और पंचायतों से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया. दूसरी तरफ प्रश्नकाल में AIIMS माजरा में 50 MBBS सीटों, किसानों के मुआवजे, बिजली के पोल बदलने, खेल स्टेडियम और कई स्थानीय परियोजनाओं से जुड़े आंकड़े भी सामने आए.

मानसून सत्र में जनता को क्या मिला? इस सत्र से जनता को फैसले भी मिले, सरकारी आंकड़े भी मिले और कई ऐसे सवालों के जवाब भी मिले जिनका असर जमीन पर दिखाई देना अभी बाकी है.

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मानसून सत्र में जनता को क्या मिला? (ETV Bharat)

कानून पास हुए, लेकिन जनता को इनका फायदा कैसे मिलेगा? सत्र के अंतिम दिन सरकार ने 11 विधेयक पारित किए. इनमें कुछ ऐसे हैं, जिनका सीधा या अप्रत्यक्ष असर आम लोगों पर पड़ सकता है. हरियाणा कारोबार का अधिकार अधिनियम, कारोबार शुरू करने और सरकारी मंजूरियों की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में है. सरकार का दावा है कि इससे कारोबारियों को मंजूरियों के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे.

  • शामलात भूमि संशोधन के जरिए 31 मार्च 2004 या उससे पहले शामलात भूमि पर घर बनाने वाले पात्र लोगों से जुड़े लंबित मामलों में प्रक्रिया तेज करने का प्रावधान किया गया है. ऐसे मामलों में उपायुक्त स्तर पर मंजूरी का रास्ता दिया गया है.
  • स्थानीय लेखा परीक्षा विधेयक स्थानीय निकायों और दूसरी संस्थाओं के वित्तीय ऑडिट के लिए कानूनी ढांचा मजबूत करता है. आम आदमी के लिए इसका महत्व इसलिए है क्योंकि पंचायतों और स्थानीय निकायों के पास आने वाला पैसा आखिरकार सड़क, नाली, पानी, स्ट्रीट लाइट और दूसरी स्थानीय सुविधाओं पर खर्च होता है.
  • पंचायती राज संशोधन ग्राम सभा के कोरम से जुड़े प्रावधानों में बदलाव करता है. इसका उद्देश्य ग्राम सभाओं की बैठकें बार-बार कोरम पूरा नहीं होने के कारण स्थगित होने से रोकना है.
  • हरियाणा राज्य महिला आयोग संशोधन में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या 5 से बढ़ाकर 7 करने का प्रावधान है.
  • राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक राज्य में अल्पसंख्यक आयोग को वैधानिक आधार देने की दिशा में है.
  • GST संशोधन का असर मुख्य रूप से कारोबार और कर व्यवस्था पर पड़ेगा.

हरियाणा विनियोग विधेयक के तहत 2026-27 में राज्य की संचित निधि से ₹7,136.63 करोड़ तक भुगतान और विनियोग का अधिकार दिया गया है. यानी कानूनों की सूची लंबी है, लेकिन जनता के लिए असली सवाल अब शुरू होता है. कानून पास होने के बाद नियम कब बनेंगे, अमल कब शुरू होगा और उसका फायदा कितने लोगों तक पहुंचेगा?

विपक्ष के सवालों में भी दिखे जनता के मुद्दे: विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस सत्र के लिए 2,319 सवाल और 479 नोटिस दर्ज हैं. ये संख्या बताती है कि विधायकों ने बड़ी संख्या में स्थानीय और राज्यस्तरीय मुद्दे सरकार के सामने रखे.

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हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के तीनों दिन की कार्यवाही में क्या हुआ? (ETV Bharat)

मानसून सत्र में कितना काम हुआ? लेकिन सवालों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि उनमें से कौन से सवाल जनता के लिए सीधे मायने रखते हैं. 31 अगस्त को इसका उदाहरण देखने को मिला. सरकार ने बताया कि रेवाड़ी के माजरा स्थित AIIMS में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 50 MBBS सीटों को मंजूरी मिली है. मेडिकल शिक्षा की तैयारी कर रहे हरियाणा के छात्रों के लिए ये सीधा अवसर है. किसानों से जुड़े सवाल पर सरकार ने बताया कि खरीफ 2023 के नुकसान के लिए ₹25.49 करोड़ और 2024 के नुकसान के लिए ₹2.65 करोड़ मुआवजा बैंक खातों में दिया गया.

बिजली के पोल से लेकर स्टेडियम तक, स्थानीय समस्याएं भी विधानसभा में पहुंचीं: पिहोवा क्षेत्र के दो गांवों में 107 लोहे के बिजली पोल चिन्हित किए गए. इनमें 16 रेल पोल थे. सरकार ने बताया कि बाकी 91 लोहे के पोल जनवरी 2027 तक PCC पोल से बदले जाएंगे. इसके अलावा सरकार ने सदन में बताया कि चीका के स्टेडियम का 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है, लेकिन परियोजना अभी पूरी नहीं हुई. ठेकेदार को 8 नोटिस दिए गए और ₹4.50 लाख से ज्यादा जुर्माना लगाया गया. ₹9.06 करोड़ की अनुबंधित राशि में से ₹3.78 करोड़ का भुगतान हुआ है.

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चीका स्टेडियम की स्थिति (ETV Bharat)

ये आंकड़ा सिर्फ खेल से जुड़ा नहीं है. ये बताता है कि विधानसभा में सवाल पूछे जाने पर किसी सरकारी परियोजना की प्रगति, खर्च और देरी का हिसाब भी सामने आ सकता है. लेकिन ये सत्र सिर्फ कानून और सवालों का नहीं था. इस विधानसभा सत्र की सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान हंगामा, निलंबन और धक्का-मुक्की के आरोप भी रहे.

तीन दिनों में कैसे बदली विधानसभा की तस्वीर? हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र की शुरूआत पहले से लगाए जा रहे अनुमानों के मुताबिक ही रही. सत्र के शुरू होने से पहले विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने काले कपड़े पहनकर हाथों में विभिन्न मुद्दों की तख्तियां लेकर विधानसभा की तरफ कूच किया, लेकिन विधानसभा परिसर के बाहर कांग्रेस विधायकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का मुक्की हो गई. ये मुद्दा सदन के अंदर भी पहुंच गया. इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोंकझोंक भी हुई.

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सरकार ने जानकारी दी कि किसानों को कितना मुआवजा दिया (ETV Bharat)

पहले दिन धक्का-मुक्की पर विवाद: सदन के पहले दिन धक्का-मुक्की विवाद इतना बढ़ा कि स्पीकर को दो बार सदन की कार्यवाही को स्थगित भी करना पड़ा. हंगामे को और हवा तब मिली, जब कांग्रेस के विधायक इंदुराज नरवाल ने पार्टी के बागी विधायक जनरैल सिंह के हाथों से '1984 दंगों के दोषी को दोस्त मानने वाले माफी मांगे वाला' पर्चा छीन लिया. इसके बाद धक्का मुक्की का मुद्दा और जनरैल सिंह के साथ हुआ विवाद सदन में जोरदार हंगामे की वजह बना. सत्ता पक्ष ने जनरैल सिंह के मुद्दे को सिख और दलित अस्मिता से जोड़ दिया. इस बीच स्पीकर ने कांग्रेस के आठ विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करके उन्हें नेम करके सदन की कार्रवाई से बाहर कर दिया.

दूसरे दिन HKRN के मुद्दे पर हंगामा: दूसरे कामकाजी दिन विधानसभा की तस्वीर कुछ बदली. प्रश्नकाल में स्वास्थ्य, कृषि, बिजली, खेल और स्थानीय विकास से जुड़े सवाल आए. AIIMS माजरा की 50 MBBS सीटों, किसानों के ₹28.14 करोड़ मुआवजे और बिजली के 91 पोल बदलने जैसे आंकड़े सामने आए. इस दिन विशेषाधिकार से जुड़े मामले भी चर्चा में रहे. कांग्रेस विधायकों जस्सी पेटवाड़ और इंदूराज नरवाल के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्तावों को स्वीकार कर Privileges Committee को भेजे जाने की जानकारी सामने आई. वहीं शून्यकाल में सज्जन कुमार का मुद्दा गरमाया. सीएम ने सदन में पहले दिन विपक्ष पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया था. इस मुद्दे पर भी तीखी बहस देखने को मिली. हालांकि बाद में स्पीकर ने उस शब्द को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया.

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मानसून सत्र में 15 विधेयक पारित हुए. (ETV Bharat)

कैसा रहा सदन का तीसरा दिन? सदन की कार्यवाही से पहले कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने राहुल गांधी पर एफआईआर रद्द करने और मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद हल्द्वानी में हुए शुद्धिकरण को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की. वहीं सदन की कार्यवाही के दौरान प्रश्नकाल, शून्यकाल और सरकारी प्रस्ताव पर चर्चा हुई. आखिरी दिन विधानसभा में कानून बनाने का काम सबसे ज्यादा दिखाई दिया. 15 विधेयक पारित हुए और सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया.

कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल की ब्राह्मणों पर कथित टिप्पणी पर हंगामा: तीसरे और आखिरी दिन गीता भुक्कल ने ब्राह्मण समाज पर टिपण्णी की. जिसको लेकर जमकर हंगामा और तीखी नोकझोंक हुई. गीता भुक्कल ने कहा 'ब्राह्मण ना पूजिये, जो होंवे गुणहीन. पूजिये चरण चांडाल के, जो होवे गुण परवीन.' भुक्कल ने गुरु रविदास जी महाराज समरसता संकल्प अभियान पर आए सरकारी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान ये बात कही. बाद में उनकी टिप्पणी को कार्यवाही से हटा दिया गया.

सरकार का रिपोर्ट कार्ड: सरकार के नजरिए से देखें, तो इस सत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि विधायी काम रहा. 15 विधेयक पारित हुए. प्रश्नकाल में स्वास्थ्य, बिजली, कृषि, सिंचाई, पानी, शिक्षा और खेल से जुड़े कई सवालों के जवाब आए. AIIMS माजरा की 50 MBBS सीटों से लेकर किसानों के मुआवजे और बिजली के पोल बदलने तक कई मुद्दों पर सरकार ने समयसीमा या आंकड़े सदन में रखे. लेकिन सरकार के लिए रिपोर्ट कार्ड का दूसरा पक्ष भी है. सत्र की शुरुआत ही हंगामे और आठ विधायकों के निलंबन से हुई. विपक्ष ने रोजगार, कानून-व्यवस्था और दूसरे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की. इसलिए सवाल ये भी रहेगा कि क्या कम कामकाजी दिनों में विधानसभा ने पर्याप्त राजनीतिक और नीतिगत बहस की?

विपक्ष का रिपोर्ट कार्ड: विपक्ष ने पहले दिन HKRN, पेपर लीक, कानून-व्यवस्था, सफाई कर्मचारियों और दूसरे मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला किया. लेकिन पहले दिन का हंगामा इतना बड़ा रहा कि विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई और उसके विधायी काम के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया. आठ विधायकों का निलंबन विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना. दूसरी तरफ प्रश्नकाल में विपक्षी विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों के जरिए कई स्थानीय समस्याएं सदन के रिकॉर्ड पर आईं. पानी, सड़क, अस्पताल, बिजली, सिंचाई और मुआवजे से जुड़े सवालों के जवाब सरकार को देने पड़े. इस लिहाज से विपक्ष का आकलन सिर्फ हंगामे से नहीं किया जा सकता.

सीएम नायब सैनी का कांग्रेस पर निशाना: हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने सत्र में कांग्रेस के प्रदर्शन पर कहा कि "कांग्रेस ने विधानसभा की गरिमा को गेट पर ही नहीं बल्कि सदन के अंदर भी तार तार कर दिया. मैं हैरान था, ये चिंता का विषय है. कांग्रेस के विधायक, जो सिख और दलित भी हैं, उन्होंने छोटी सी मांग उठाई थी, कोई शोर शराबा नहीं कर रहे थे. वो तो खाली एक पोस्टर लेकर विरोध कर रहे थे, लेकिन ऐसा करने पर नेता प्रतिपक्ष के इशारे पर उनके लाडले विधायक इंदुराज नरवाल ने अपमानजक ढंग से उसको सदन में फेंकने का काम किया. इससे कानून तो तार तार हुआ है, साथ ही इंसानियत भी तार तार हुई है.

क्या बोले सत्र को लेकर नेता विपक्ष? पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि "मैं कई बार सांसद और विधायक रह चुका हूं, लेकिन जैसा जैसा दुर्व्यवहार हमें इसबार मॉनसून सत्र में झेलना पड़ा, ऐसा कभी नहीं देखा. बीजेपी सरकार ने वरिष्ठ विधायकों तक के विरुद्ध जो तानाशाही दिखाई, वो विधानसभा के इतिहास में काले अध्याय के रुप में लिखी जाएगी. ना सिर्फ़ शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले विधायकों के साथ धक्का-मुक्की की गई, बल्कि उन्हें ये तक नहीं बताया गया कि ये सब किसके आदेश पर किया गया. भाजपा ने पूरे सत्र के दौरान सिर्फ झूठ बोला और सदन को गुमराह किया. सरकार विपक्ष के किसी भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई और अपने ही झूठ में फंसती नजर आई."

पूरा सत्र तू-तड़ाक में निकाल गया. प्रदेश के लोगों से जुड़े मुद्दे को ना कांग्रेस ने उठाया और ना ही बीजेपी ने इस पर कोई जवाब दिया. जब हमारे विधायक मुद्दे उठा रहे थे, तो स्पीकर ने उन्हें सिर्फ दो मिनट का समय दिया. ये छोटी सोच की बात है. विधायक को हर रोज समय मिलना चाहिए, ताकि वो अपनी बात रख सकें. क्योंकि उनके पास प्रदेश के अलग-अलग वर्गों से लोग अपनी समस्याओं को लेकर आते हैं. जिस पर विधायकों को अपनी बात रखनी होती है. -इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय चौटाला

क्या कहते हैं सत्र को लेकर जानकार? वहीं तीन दिन के सत्र को लेकर राजनीतिक मामलों के जानकार धीरेंद्र अवस्थी ने कहा कि "विपक्ष की समय अवधि बढ़ाने की मांग कहीं ना कहीं सही दिखाई देती है. जिस तरह के मुद्दे प्रदेश के विपक्ष उठाना चाहता था, उनके लिए ये समय अवधि कम दिखाई देती है. सभी सदस्यों को अपनी बात हर मुद्दे पर रखने का मौका मिलना चाहिए. जिससे वो अपने लोगों की आवाज सदन में उठा सकते हैं. सभी सदस्यों को सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए. चाहे बात सत्ता पक्ष की हो या फिर विपक्ष की."

'हंगामा नहीं, सदन में चर्चा होनी चाहिए': वरिष्ठ पत्रकार राजेश मोदगिल ने कहा कि "विधानसभा सदन का सही मकसद लोगों से जुड़े मसलों पर चर्चा और उसके समाधान का होता है. इसके लिए हर मुद्दे पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए. इस बार जिस तरह का हंगामा देखने को मिला. इस तरह का माहौल बनने से सदन और लोगों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का समय खराब होता है. इसलिए सदन के असल मकसद पर राजनीतिक दलों को काम करना चाहिए."

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Last Updated : September 3, 2026 at 2:14 PM IST