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Explainer: इस बार कितने का हो सकता है हरियाणा बजट 2026? जानें कैसी है हरियाणा की आर्थिक स्थिति

हरियाणा में पिछले बजट का कितना पैसा इस्तेमाल हुआ? आने वाला बजट कितने का होगा? हरियाणा की आर्थिक स्थिति क्या है? विस्तार से जानें.

Explainer on Haryana Budget
Explainer on Haryana Budget (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 26, 2026 at 2:24 PM IST

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Updated : February 26, 2026 at 6:08 PM IST

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चंडीगढ़ से भूपेंद्र जिष्टू की रिपोर्ट

चंडीगढ़: हरियाणा का बजट इस बार सरकार दो मार्च को सदन में पेश करेगी. इससे जहां जनता राहत की उम्मीद लगाए हुए है. वहीं विपक्ष लगातार प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठा रहा है, लेकिन सरकार प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सही बता रही है. हालांकि इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि पिछले कुछ सालों से लगातार हरियाणा भी अन्य राज्यों की तरह कर्ज के दबाव का सामना कर रहा है. जो इस बार करीब चार लाख करोड़ तक पहुंच सकता है.

सवा दो लाख करोड़ तक पहुंच सकता है बजट: हरियाणा में 2014 से बीजेपी सत्ता में है. ये सरकार का तीसरा कार्यकाल है. वहीं सीएम नायब सिंह सैनी वित्त मंत्री के तौर पर दूसरी बार हरियाणा का बजट पेश करेंगे. हालांकि बीजेपी के शासन में प्रदेश के बजट में हर साल दस से बारह फीसदी की वृद्धि हो रही है. जिसको अनुमान मानते हुए इस बार हरियाणा का बजट सवा दो लाख करोड़ के पार हो सकता है. वहीं पिछले बजट के मुताबिक प्रदेश पर कर्ज करीब साढ़े तीन लाख करोड़ से ज्यादा था. जो इस बार चार लाख करोड़ तक पहुंच सकता है.

कितने करोड़ के थे पिछले तीन बजट, कर्ज क्या है स्थिति? अगर हम पिछले तीन बजटों पर नजर डालें, तो साल 2023 में हरियाणा का बजट प्रस्ताव एक लाख 83 हजार 950 रुपये का था. जो 2022 की तुलना में 11.6 प्रतिशत ज्यादा था. वहीं 2024-25 का बजट 1,89,876.61 करोड़ था. जिसमें राज्य का कुल ऋण 3,17,982 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था. वहीं साल 2025-26 में बजट का आकार 2,05,017.29 करोड़ था. जिसमें पिछले बजट के मुकाबले 13.7% की वृद्धि हुई थी. राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.67% था और कुल कर्ज 3,52,819 करोड़ रुपये रहने का अनुमान था. जिसके अनुमान के आधार पर विपक्ष का कहना है कि कर्ज इस बार चार लाख करोड़ तक पहुंच सकता है.

इस बार कितने का हो सकता है हरियाणा बजट 2026? (Etv Bharat)

पिछले बजट 2025-26 की क्या है जमीनी स्थिति? हरियाणा सरकार का दावा है कि उसने उसके घोषणा पत्र में उन्होंने 217 संकल्प लिए थे. जिनमें से साठ को सरकार ने पहले साल में ही पूरा किया है. जबकि 120 पर काम चल रहा है. वहीं सरकार का दावा है कि पिछले बजट का ग्यारह विभाग 80 फीसदी इस्तेमाल कर चुके हैं. जबकि 21 विभागों का 70 फीसदी से ज्यादा इस्तेमाल कर चुके हैं. 31 मार्च तक पिछले बजट का करीब दो लाख करोड़ तक इस्तेमाल कर के ही ये 2025-26 के बजट का 98 प्रतिशत होगा.

सरकार की बजट की तैयारी और दावे: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कहना है कि उन्होंने अपना पहला बजट साल 2025-26 का जनता के और विभिन्न वर्गों के सुझावों से बनाया था. 11 बैठकों में 1592 सुझाव मिले थे, 706 सुझाव बजट में शामिल किए गए. उन सुझावों के आधार पर 248 घोषणाए की गई. 77 घोषणाएं पूरी हो गई. 165 घोषणाओं पर कार्य अंतिम चरण में है. उनके मुताबिक 2026-27 की 13 बजट बैठकों में 2199 सुझाव मिले हैं. एआई चैट बॉट से प्रदेश के लोगों ने करीब 12400 सुझाव दिए. सरकार इस बार लोगों के चार से पांच हजार सुझावों को बजट में शामिल कर सकती है.

हरियाणा की अर्थव्यवस्था और राजकोष की स्थिति: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कहना है कि 29 जनवरी 2026 को योजना विभाग के जारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2025-26 के अग्रिम अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक 13,67,769 करोड़ रुपये रहा है, जबकि साल 2024-25 में ये 12,13,951 करोड़ रुपये था. यानी जीडीपी 12.67 प्रतिशत से बढ़ी है. वहीं राज्य की जनसंख्या में अगर इसको बांटा जाए, तो 2024-25 में प्रति व्यक्ति आय 3,58,171 रुपये रही. जोकि राष्ट्रीय स्तर से ज्यादा थी. इस मामले में हरियाणा शीर्ष के पांच राज्यों में शामिल है. 2014-15 में ये 1,47,382 रुपये थी. दस सालों में इसमें करीब ढाई गुना वृद्धि हुई है.

हरियाणा की राजकोषीय स्थिति: सरकार के मुताबिक हरियाणा की राजकोषीय स्थिति की बात करे, तो 2024-25 में राजकोषीय घाटा तत्कालीन जीडीपी का 2.83 प्रतिशत रहा, जोकि एफवीआरएम यानि राजकोषीय घाटे की ऊपरी सीमा तीन प्रतिशत के अंदर है. 16वें वित्त आयोग 2026 से 2031 तक सिफारिशों के मुताबिक हरियाणा को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 1.093 प्रतिशत से बढ़कर 1.361 हो गई है. जोकि 15वें वित्त आयोग की तुलना में 24.52 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है.

वित्त विभाग के श्वेत पत्र के मुताबिक राज्य का अपना राजस्व 2013-14 में 25,567 करोड़ था, जबकि 2024-25 में ये बढ़कर 77,943 करोड़ रुपये हो गया, जोकि 52,376 करोड़ की वृद्धि को दर्शाता है. सरकार का दावा है कि शहरी बेरोजगारी में साल 2004-05 में हरियाणा की रैंकिंग राज्यों और केंद्रीय शासित राज्यों में 17वें स्थान पर थी. जबकि 2023-24 में ये आठवें स्थान पर थी. इसी तरह ग्रामीण बेरोजगारी में हरियाणा की रैंकिंग 2004-05 में हरियाणा 22वें स्थान पर थी. जोकि 2023-24 में 15वें स्थान पर आ गई है.

क्या है हरियाणा में औद्योगिक विकास की स्थिति? हरियाणा का आद्योगिक विकास को लेकर सरकार का दावा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में हरियाणा का औद्योगिक उत्पादन 11.08 लाख करोड़ रुपये था. हर फैक्ट्री से औसतन उत्पादन 15,549 लाख रुपये रहा है. देश की औसत से करीब दो गुना है. हर कर्मचारी से उत्पादन करीब 93 लाख रुपये रहा है. औद्योगिक मूल्य में हरियाणा की कुल हिस्सेदारी 6.2 प्रतिशत है.

देश के MSME इको सिस्टम में हरियाणा की हिस्सेदारी 9-10 प्रतिशत: साल 2004 से 14 के बीच एमएसएमई की 33000 के करीब इकाइयां थी. जबकि आज 2015 से 2025 के बीच बीस लाख से अधिक एमएसएमई पंजीकृत है. साल 2014 से 2024 के बीच इस सेक्टर में करीब 38 लाख नए रोजगार के अवसर बने. इस दौरान राज्य का कुल आद्योगिक रोजगार 2018-19 में 10 लाख 16 हजार से बढ़कर, साल 2023-24 में 11,91,000 हो गया. एमएसएमई इको सिस्टम में देश में हरियाणा की हिस्सेदारी 9 से 10 प्रतिशत है.

रोजगार को लेकर सरकार का क्या है दावा? रोजगार के विषय में सरकार का दावा है कि मई 2025 की नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 2004-05 में हरियाणा में लगभग 90,61,000 सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारी काम करते थे. साल 2014-15 में ये आंकड़ा घटकर 86,93,000 हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक 2023-24 में एक करोड़ दस लाख लोग विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे थे.

उच्च शिक्षा पर क्या कहती है सरकार? शिक्षा क्षेत्र में सरकार का दावा है कि 2004 से 14 के बीच उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशों करीब 27 प्रतिशत था. जबकि 2015 से 25 में ये 34 प्रतिशत हो गया. 2005 से 14 के बीच प्रदेश में 45 विश्वविद्यालय थे. जबकि 2015 से 2025 के बीच 80 न्यू विश्विद्यालय प्रदेश में स्थापित किए गए. बेटियों को हर 20 किलो मीटर पर महाविद्यालय मिल रहा है.

कितने हैं सामाजिक सुरक्षा के तहत लाभार्थी? बुढ़ापा, विधवा, दिव्यांग और अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत 34.14 लाख लोगों को सीधा लाभ दिया जा रहा है. सरकार हर घर-हर गृहिणी योजना के तहत सिलेंडर पर एक लाख अस्सी हजार से कम आय के परिवारों से गैस सिलेंडर पर 500 रुपये लेती है. बाकी सब्सिडी सरकार देती है. करीब 12.62 लाख लाभार्थी इस योजना का लाभ ले रहे हैं.

दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत 2100 रुपये: हरियाणा सरकार के मुताबिक दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत सूबे में 9,22,452 महिला लाभार्थियों को 2100 रुपये की राशि प्रति महीना के हिसाब से दी जा रही है. इसके अलावा किसानों की 24 फसलें सरकार एमएसपी पर खरीद रही है. हरियाणा ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना है. यानी इसका बजट पर सबसे बड़ा दबाव है, क्योंकि सामाजिक लाभ देने की ओर भी कई योजनाएं सरकार चला रही है. जिस पर बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है.

नेता विपक्ष हुड्डा ने क्या कहा? हरियाणा बजट को लेकर नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि "सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया है. किसानों की इनकम 2022 तक डबल करने की बात कही, लेकिन आमदनी दुगनी नहीं हुई, लगत बढ़ गई. 2014 में डीजल और खाद का क्या भाव था? दवाओं का क्या भाव था? आज क्या है? इनपुट बड़ी आमदनी घट गई. लाडो लक्ष्मी योजना सभी 85 लाख महिलाओं को देने की बात कही थी, लेकिन उसमें लिमिट लगाई गई. मनरेगा में सौ दिन का रोजगार नहीं दे पा रहे हैं. किसानों को नुकसान का मुआवजा नहीं मिला. सरकार सिर्फ कर्ज बढ़ाएगी. प्रदेश में कोई नया प्रोजेक्ट दस साल में नहीं आया. जो मंजूर किए गए प्रोजेक्ट थे. वो भी यहां से चले गए."

अभय चौटाला हरियाणा बजट पर क्या कहा? हरियाणा के आने बजट पर कहा कि "हर बार बेतहाशा कर्ज बढ़ रहा है, फिर प्रदेश के बजट से क्या उम्मीद कर सकते हैं. ओपी चौटाला की जब सरकार गई थी, तब 3 हजार करोड़ रुपये सरकार के खजाने में छोड़कर गए थे, जो आज के हिसाब से 3 लाख करोड़ रुपये के लगभग बनता है और ये ऑन रिकॉर्ड है. पूर्व की कांग्रेस सरकार और मौजूदा भाजपा सरकार में केवल कर्ज बढ़ा है."

हरियाणा की वित्तीय स्थिति को लेकर क्या है एक्सपर्ट की राय? अर्थशास्त्र के मामलों के जानकार बिमल अंजुम ने ईटीवी भारत से बातचतीत के दौरान कहा कि "जब से जीएसटी के रेट रिवाइज हुए हैं. उसका डायरेक्ट या इंडियारेक्ट असर हरियाणा पर पड़ा है. हरियाणा का एक बड़ा हिस्सा एनसीआर में है. उसमें बहुत अच्छा राजस्व था. बावजूद इसके आंकड़े कहते हैं कि इससे हरियाणा पर ज्यादा असर नहीं पड़ा. हरियाणा के पास फंड इनफ्लो अच्छा चल रहा है.

'24 फसलों को एमएसपी पर खरीदना पॉसिबल नही': विमल अंजुम ने कहा कि "हरियाणा देश का पहला राज्य है. जहां 24 फसलों पर एमएसपी दी जाती है, लेकिन प्रैक्टिकली ये पॉसिबल नहीं है. उसकी वजह से सरकार कर्ज या कहें कि फाइनेंशियल दबाव में रहेगी, क्योंकि हरियाणा की सीमाओं से लगते राज्यों में इस तरह की व्यवस्था नहीं है. जिसकी उन राज्यों की बहुत सारी फसलें बिकने के लिए आने लगी हैं. उसका प्रदेश पर बुरा प्रभाव पड़ता है."

'लगातार कर्ज बढ़ना चिंता का विषय': उन्होंने कहा कि "जहां तक ऋण की बात करें. तो सरकार उसको ले या ना ले फिर भी कर्ज बढ़ना ही बढ़ना है. क्योंकि हम अपने कुल रेवेन्यू का 12 से 14 फीसदी इंटरेस्ट में देंगे ही देंगे. जो बढ़ता ही जाएगा, क्योंकि हमारे पास उसको वापस करने का कोई प्रोविजन नहीं है. इसलिए सरकार को चाहिए कि हम नए बजट में कुछ ऐसे प्रोविजन लेकर आए, जो हमने कर्ज लिया है उसको कैसे वापस करे. नया कर्ज लेकर सरकार सोचे कि हम कोई नई सामाजिक गतिविधि को शुरू करेंगे उससे कोई लाभ नहीं होगा.

'मुफ्त वाली योजनाएं देने और कर्ज लेने से बचें': अर्थशास्त्र के मामलों के जानकार ने कहा "क्योंकि हरियाणा एक समृद्ध राज्य बन चुका है. गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों का आंकड़ा बड़ा नहीं है. मुफ्त वाली योजनाएं सिर्फ गरीबों को दी जाए, विदेशी कर्ज से बचा जाए. पिछली बार भी विदेशी कर्ज को लेकर अलग-अलग तरह के आंकड़े सामने आए थे. वो आंकड़ों का खेल था, लेकिन सच्चाई और है कि हरियाणा के ऊपर कर्ज का बोझ बहुत ज्यादा है. जब फिसिकल डेफिसिट तीन प्रतिशत से ज्यादा हो जाता है, तो वो एक चेतावनी देता है."

"नेचुरल फॉर्मिंग को बढ़ावा देना चाहिए": बिमल अंजुम ने कहा "हालांकि ये कहा जाता है कि कर्ज चार प्रतिशत ठीक है. क्योंकि स्टैंडर्ड रेशो तीन प्रतिशत है. हरियाणा की जीडीपी का अमाउंट बहुत बड़ा है. उसका नेशनल जीडीपी में भी बड़ा कॉन्ट्रिब्शन है, लेकिन हमें चार या पांच प्रतिशत तक उसके होने को फेवरेबल नहीं कहना है. सरकार को इस रेशो को तीन फीसद तक लाना होगा. इसके अलावा इंटरनल सोर्सेज पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. नेचुरल फॉर्मिंग को बढ़ावा देना चाहिए. चाहे उनके लिए कोई गारंटी स्कीम लाएं, वो फायदेमंद रहेगी, क्योंकि एमएसपी का दबाव सरकार पर ज्यादा आएगा. पहले से ही सरकार पर दो से तीन फसलों का दबाव है. इसलिए उसको कम करने के उपाय खोजने होंगे."

'बिना बात पैसा बांटने से फायदा नहीं': उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा की जो स्कीम सरकार चलती है. उससे कोई प्रोडक्टिविटी नहीं होती. कुछ चीज सामाजिक दायरे में आती हैं, जैसे बुढ़ापा पेंशन, हेल्थ इंश्योरेंस सही है, लेकिन कुछ योजनाएं तो सिर्फ जनता को खुश करने के लिए चलाई जाती हैं. एक राज्य ने शुरू किया, तो दूसरे राज्य में शुरू कर दिया. हरियाणा ने भी ऐसी कुछ योजनाओं को कॉपी किया है. उनकी जरूरत नहीं है. लाडली स्कीम है, तो आपको उनकी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. उनकी ट्रेनिंग और डेवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए. पैसे बांटने से कोई फायदा नहीं होगा. इस तरह की योजनाओं का लाभ समृद्ध से ज्यादा गरीबों को जरूरत है. उनको चिह्नित करके उसका लाभ दीजिए.

'राजस्व को बढ़ाने की जरूरत': बिमल अंजुम ने कहा कि "केंद्र सरकार जो नया फाइनेंशियल बिल लाई है. उसमें सरकार ने 2029 तक गारंटी दी है. केंद्र ने राज्यों का राजस्व बढ़ाने के लिए अपना शेयर कम किया है. सरकार को काफी राहत उससे मिली है. जब राहत मिल रही है, तो आपको कर्ज पर नहीं जाना चाहिए. आपको अन्य कदमों को देखना होगा. टैक्स फ्री बजट पेश करना सही नहीं है. जहां थोड़ा बहुत हो सकता है आप टैक्स लगाइए, उसके सेक्टर को फाइंड आउट कीजिए. समाज का टैक्स फ्री बजट से उद्धार नहीं हो सकता."

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Last Updated : February 26, 2026 at 6:08 PM IST